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MP में 12वीं के रिजल्ट पर प्राइवेट स्कूलों का पेंच:कोर्ट के डर से CBSE पैटर्न से परहेज; 11वीं के अंकों को नहीं बनाएंगे आधार, 10वीं-12वीं के अनुसार तैयार हो सकता है रिजल्ट

भोपाल3 महीने पहलेलेखक: अनूप दुबे
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मध्यप्रदेश में एमपी बोर्ड के 12वीं क्लास के रिजल्ट बनाने के फॉर्मूला पर प्राइवेट स्कूलों ने पेंच फंसा दिया है। इस साल 12वीं क्लास में करीब साढ़े 7 लाख छात्र-छात्राएं हैं। पहले CBSE की तरह ही 10वीं और 11वीं की परीक्षा के रिजल्ट को आधार बनाए जाने का प्रस्ताव भेजा गया था। लेकिन निजी स्कूलों ने 11वीं क्लास को इसमें शामिल करने से मना कर दिया।

सूत्रों के मुताबिक प्राइवेट स्कूलों में गत वर्ष 11वीं की परीक्षाओं को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई गई। ऐसे में अधिकांश बच्चों कोई भी परीक्षा नहीं दी। प्राइवेट स्कूलों को डर है कि अगर 11वीं को इसमें शामिल किया गया और कोई बच्चा कॉपी दिखाने की मांग को लेकर कोर्ट चला गया, तो कहां लाकर देंगे।

इसी कारण अब नया फॉर्मूला तैयार किया गया है। इसके बाद इतना तय हो गया है कि मध्यप्रदेश में BCSE का फॉर्मूला लागू नहीं होगा। हालांकि रिजल्ट से नाखुश छात्रों के पास परीक्षा देने का भी विकल्प रहेगा। इस साल 12वीं पास करने वाले छात्रों को लैपटॉप योजना का लाभ नहीं मिल पाएगा।

इसलिए CBSE फॉर्मूला नहीं

CBSE ने 10वीं, 11वीं और 12वीं के परीक्षा परिणाम को आधार बनाकर 12वीं के रिजल्ट का फॉर्मूला बनाया गया था। इसे देश भर के CBSE स्कूलों ने अपनाया। लेकिन MP के प्राइवेट स्कूलों ने इस फॉर्मूले से 11वीं क्लास को हटाने का दबाव बनाया। उनका तर्क था कि अगर रिजल्ट से नाखुश छात्र कोर्ट चला गया, तो काॅपियां कहां से लाएंगे। इसी कारण कमेटी ने नया फॉर्मूला बनाते हुए रिजल्ट के लिए 10वीं और 12वीं की परीक्षा को ही आधार बनाए जाने का दिया।

पहला फॉर्मूला

10वीं के रिजल्ट को आधार बनाकर 12वीं का रिजल्ट तैयार किया जाए। लेकिन 10वीं में छह विषय रहते हैं और 12वीं में 18 विषय होते हैं। ऐसे में विषयों की मैपिंग की जाएगी। हालांकि इस फॉर्मूले को लेकर कई लोग सहमत नहीं हुए, क्योंकि सिर्फ 10वीं के आधार पर मैपिंग से रिजल्ट पर काफी प्रभाव पड़ता। इसलिए इस फॉमूर्ला ड्रॉप कर दिया गया।

दूसरा फॉर्मूला

10वीं के रिजल्ट का 60% और 12वीं की छह माही परीक्षा के आधार पर 40% को आधार बनाकर रिजल्ट तैयार किया जाए। इसमें भी विषयों की मैपिंग की जाएगी। जैसे फिजिक्स, कैमिस्ट्री और बायोलॉजी को विज्ञान विषय से जोड़ा जाएगा। काॅमर्स के एकाउंट जैसे विषयों को गणित से जोड़ा जाएगा। हिंदी और अंग्रेजी एक समान रहेंगे। इसी तरह आर्टस के विषयों की मैपिंग की जाएगी। हालांकि रिजल्ट में अधिकतम 2 से लेकर 5% तक का ही अंतर रह सकता है।

बच्चों के लिए यह विकल्प दिया

MP बोर्ड ने कोर्ट का सामना करने से बचने के लिए बच्चों को एक विकल्प देगी। इसमें जो बच्चे इस तरह के रिजल्ट से खुश नहीं होंगे, वह आने वाले समय में होने वाली परीक्षा में शामिल हो सकेंगे। इसका मतलब जिसे औसत रिजल्ट से परेशानी नहीं है, उन्हें परीक्षा देने की जरूरत नहीं है।

सोमवार को बैठक संभावित है

कमेटी सभी तरह के फॉर्मूलाें को लेकर मंत्री समूह को अपनी रिपोर्ट सौंप चुकी है। इसमें उन्होंने तीन तरह के फॉर्मूले और इनको लेकर आने वाली कानूनी अड़चनों का जिक्र करते हुए रास्ता सुझाया है। संभावना है कि दूसरे फॉर्मूले के आधार पर ही 12वीं का रिजल्ट बनना जा सकता है।

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