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मिल गए महाराज:MP की दौलतपुर रियासत को 24 साल बाद जयपुर से मिला नया महाराज; नाती को राजमाता ने लिया गोद

भोपाल2 महीने पहलेलेखक: राजेश गाबा
कुर्सी पर बैठे दौलतपुर के नए महाराज ओंकार इंदर सिंह, राजमाता हितेंद्र कुमारी के साथ ताजपोशी और राजतिलक की रस्म के बाद परिवार के सदस्यों के साथ।
  • राजमाता हितेंद्र कुमारी ने अपने नाती ओंकार सिंह को लिया गोद, शाही अंदाज में हुई ताजपोशी और राजतिलक की रस्म

सिर पर पगड़ियां बांधे, हाथों में तलवार थामे, अलग-अलग रियासतों के 'राजा-महाराजाओं' के जमावड़े को देखकर ऐसा लग रहा था, मानो रियासतों का शाही दौर फिर लौट आया हो। राजघराने की महिलाएं भी राजसी अंदाज में दिख रही थीं। पूरे माहौल में राजसी छटा बिखरी हुई थी। मौका था भोपाल के पास सीहोर जिले में बसे दौलतपुर रियासत के नए महाराजा की भोपाल में ताजपोशी और राजतिलक की रस्म का। चूना भट्‌टी स्थित दौलतपुर हाउस में यह रॉयल सेरेमनी आयोजित की गई। मौका था दौलतपुर की राजमाता हितेंद्र कुमार के नाती ओंकार सिंह के राजतिलक का। दौलतपुर हाउस में हुए एक शाही कार्यक्रम में आज जिस तरह से रियासत के नए 'महाराज' की ताजपोशी के लिए 'राजतिलक' की रस्म को अदा किया गया, उससे एक बार फिर राजा-महाराजाओं के जमाने की यादें लौट आई। हालांकि आम लोगों को इस शाही रस्म को देखने का मौका नहीं मिला, लेकिन देश भर से आए विभिन्न राजसी परिवारों के अतिथि इस ऐतिहासिक घड़ी के गवाह बने।

दौलतपुर के महाराज स्व. भरत इंदर सिंह और हितेंद्र कुमारी।
दौलतपुर के महाराज स्व. भरत इंदर सिंह और हितेंद्र कुमारी।

1996 से खाली पड़ी है दौलतपुर की राजगद्दी

दौलतपुर राजघराने के महाराज भरत इंदर सिंह 1996 में इस दुनिया से चले गए। उनके जाने के बाद दौलतपुर की राजगद्दी खाली हो गई। 24 साल बाद उनकी पत्नी हितेंद्र कुमारी ने जयपुर निवासी अपने नाती ओंकार सिंह को गोद लिया। उसकी ताजपोशी हुई। उसका राजतिलक कर उसे शाही तलवार दी। आज से वह दौलतपुर का महाराज बन गया। अब उसका नाम ओंकार इंदर सिंह हो गया।

महारानी हितेंद्र कुमारी दौलतपुर के नए महाराज ओंकर इंदर सिंह को शाही तलवार सौंपती हुईं।
महारानी हितेंद्र कुमारी दौलतपुर के नए महाराज ओंकर इंदर सिंह को शाही तलवार सौंपती हुईं।

तीन घंटे चला शाही आयोजन

सुबह 10 बजे के करीब शुरू हुआ यह शाही आयोजन करीब तीन घंटे तक चला। राजसी परंपराओं को निभाते हुए ओंकार के राजतिलक की रस्म को अदा किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुए इस राजतिलक को देखकर ऐसा एहसास हो रहा था मानो अब दौलतपुर रियासत को एक बार फिर से यहां के राजसी खानदान द्वारा ही चलाया जाएगा।

वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुईं सारी रस्में।
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुईं सारी रस्में।

गौरतलब है कि दौलतपुर की महारानी हितेंद्र कुमारी वाकानेर गुजरात रियासत के महाराजा रसिक सिंह की बेटी है। दौलतपुर की महारानी हितेंद्र कुमारी और महाराज भरत इंदर सिंह की दो बेटियां हैं। दिव्यानी कुमारी और अपराजिता सिंह। पुत्र न होने की वजह से दौलतपुर को नया महाराजा नहीं मिल पाया। महारानी हितेंद्र कुमारी की बड़ी बेटी दिव्यानी कुमारी है। उनके पति राघवेंद्र सिंह हैं। जो (झालामंड) जोधपुर के राजघराने से हैं। उनका हैरिटेज होटल का बिजनेस है। उनके दो बच्चे हैं। बेटा सुहेद प्रताप सिंह और बेटी हर्षिता कुमारी है। वहीं महारानी की छोटी बेटी अपराजिता सिंह है। इनके पति संदीप सिंह जयपुर में डीआईजी हैं। ओंकार सिंह वर्तमान में दुबई में मल्टीनेशनल कंपनी में परफार्मिंग और मार्केटिंग मैनेजर हैं। उनकी बहन ग्रीष्माराजे है।

दौलतपुर में होंगी बाकी रस्में पूरी

ओंकार सिंह अब महाराज ओंकार इंदर सिंह बन गए हैं। ओंकार ने कहा कि यह एक बड़ी जिम्मेदारी है। पुरखों की परंपरा को आगे बढ़ाना है। ओंकार ने कहा कि भोपाल में सारी रस्में होने के बाद हम दौलतपुर भी जाएंगे। जहां बाकी रस्में अदा की जाएंगी।

शास्त्रों के अनुसार हुईं सारी रस्में

इन सारी रस्मों को पूरा कराने वाले दौलतपुर राजघराने के राजपुरोहित राजेश उपाध्याय दंडीस्वामी ने बताया कि विधिवत आज शास्त्रों के अनुसार और शाही रस्मों को अदा करने के बाद दौलतपुर के नए महाराज की ताजपोशी की गई। राजमाता हितेंद्र कुमारी ने नए महाराज को तलवार सौंपकर नए महाराज की घोषणा की।

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