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जूडा की हड़ताल वापस होने की कहानी:हाई कोर्ट के हड़ताल अवैध बताने के बाद से दबाव में थे; सीनियर वकील ने कह दिया था- ऊपरी अदालत जाने के लिए पक्ष मजबूत नहीं

भोपाल2 महीने पहलेलेखक: अनूप दुबे
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सोमवार को भोपाल में चिकित्सा शिक्षा मंत्री से मुलाकात के लिए उनके ऑफिस में बैठे जूडा नेता। - Dainik Bhaskar
सोमवार को भोपाल में चिकित्सा शिक्षा मंत्री से मुलाकात के लिए उनके ऑफिस में बैठे जूडा नेता।

मध्यप्रदेश में 31 मई से प्रारंभ हुई जूनियर डॉक्टर्स (जूडा) की हड़ताल आठवें दिन आधे मन से खत्म हो गई। मजबूरी में ही सही जूडा ने सरकार के प्रस्ताव को यह कहते हुए स्वीकार कर लिया कि कोर्ट के आदेश का सम्मान और मरीजों की परेशानियों को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। हालांकि वे हड़ताल खत्म करने के बाद भी काम पर लौटने के सवाल को टालते नजर आए, लेकिन बाद में कहा कि सभी काम पर लौट रहे हैं।

सूत्रों की माने तो प्रदेश भर में 8 दिन से सरकार के खिलाफ लामबंद जूडा के तेवर तीन दिन पहले ही ढीले पढ़ गए थे। हालांकि वे लगातार सरकार से लिखित में आदेश मांग रहे थे। ऐसे में सरकार भी कोर्ट के आदेश को सामने रखते हुए बात करने लगी। इधर, जूडा पर कोर्ट के आदेश का दबाव बढ़ गया।

जूडा इस मामले को लेकर कोर्ट जाने की तैयारी में थी, लेकिन एक वरिष्ठ वकील ने भी उन्हें ऐसा करने से मना कर दिया। सूत्रों की माने तो उन्हें जवाब मिला कि उनके पास मजबूत पक्ष नहीं है। अभी सब कुछ उनके खिलाफ है। ऐसे में वहां जाना ठीक नहीं होगा। इसके बाद जूडा के नेता मायूस हो गए।

यही से मंत्री से मुलाकात का दौर शुरू हुआ

जूडा ने 31 मई से हड़ताल शुरू की थी, लेकिन 31 मई को कोविड मरीज का इलाज किया और 1 जून से पूरी तरह से काम बंद कर दिया। इधर, सरकार की तरफ से चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने बयान जारी कर कहा कि सरकार ने उनकी 6 में से चार मांगे मान ली हैं, अब उन्हें मरीजों के लिए काम पर लौट जाना चाहिए। मरीजों के साथ इस तरह की ब्लेकमेलिंग ठीक नहीं है।

सरकार के इस रवैये के बाद जूनियर डॉक्टरों ने इस्तीफा देना शुरू कर दिया, तो सरकार ने उनके खिलाफ बर्खास्तगी की कार्रवाई शुरू कर दी। इससे हड़ताल पर अड़े जूडा पर परिजनों का दबाव भी बढ़ने लगा। इसी बीच कोर्ट का उनके खिलाफ टिप्पणी करने से बाजी उलटी पड़ गई। इसके बाद से ही जूडा के तेवर नरम हुए और वे खुद ही मंत्री से मिलने पहुंचे।

सोमवार को भोपाल में चिकित्सा शिक्षा मंत्री से मुलाकात के लिए उनके ऑफिस में बैठे जूडा नेता।
सोमवार को भोपाल में चिकित्सा शिक्षा मंत्री से मुलाकात के लिए उनके ऑफिस में बैठे जूडा नेता।

सरकार अपनी बात पर अड़ी रही

चिकित्सा शिक्षा मंत्री शुरू से ही एक्शन के मूड में नजर आए। उन्होंने साफ कहा था कि हड़ताल वापस लेने के बाद ही जूडा के नेताओं से बात की जाएगी। सरकार संवाद बनाने की बात तो कहती रही, लेकिन जूडा से सीधे बात नहीं की गई। बयान जारी कर उन पर दबाव बनाया गया।

इसका नतीजा यह निकला कि जूडा के नेताओं को खुद ही पहल करते हुए चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग से मिलने जाना पड़ा। इसके बाद मंत्री ने बयान जारी कर कहा कि हम अभी भी कह रहे हैं कि पहले हड़ताल वापस लें फिर बात करेंगे। सरकार की यह रणनीति आखिर में कामयाब रही। इधर, सुबह से ही फूट की खबरों के कारण अंत में जूडा ने हड़ताल खत्म कर दी।

जूनियर डॉक्टरों की मांगें

  • जूनियर डॉक्टरों का मानदेय 24% बढ़ाया जाए।
  • कोरोना के इलाज में लगे डॉक्टरों को अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि दी जाए।
  • जूनियर डाक्टरों के कोविड में इलाज करने के लिए 10 नंबर अतिरिक्त मिलना चाहिए।
  • 2018 के जूडा डॉक्टर, जिनका 3 साल का कार्यकाल पूरा हो चुका है उनको एसआर (सीनियर रेजीडेंट) माना जाए।
  • ग्रामीण क्षेत्र में सेवा देने का बांड रद्द किया जाए।
  • उनके साथ ही उनके परिजनों को भी कोरोना के इलाज के लिए अलग से सुविधा दी जाए।
  • सरकार द्वारा दिए गए सभी बातें लिखित में चाहिए।
  • 31 मई के बाद इस्तीफा देने वाले डॉक्टरों पर की गई कार्रवाई को वापस लिया जाए।

सहमति बनी

  • सरकार ने स्टाइपेंड 17% बढ़ा दिया
  • ग्रामीण इलाके में बांड अन्य मांगों को लेकर एक कमेटी बनाने की घोषणा की।
  • दोनों पक्षों के बीच बनी सहमति के आदेश जल्द ही जारी किए जाएंगे।
  • कोरोना ड्यूटी करने वाले डॉक्टरों और उनके परिजनों को अलग से इलाज की व्यवस्था।
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