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MP की पहली महिला गाइड की कहानी:टीचर की नौकरी छोड़ गाइड बनीं; रिश्तेदारों ने ताना मारा तो जवाब दिया- मैं तो इंडिया की ब्रांड एम्बेसडर बन गई हूं

इंदौर6 महीने पहलेलेखक: राजीव तिवारी
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  • भोपाल की रेखा चोपड़ा को एक बार बेस्ट गाइड का अवॉर्ड भी मिला
  • सास ने ही गाइड बनने के लिए हमेशा प्रोत्साहित किया, 47 की बैच में अकेली महिला स्टूडेंट थीं

मध्यप्रदेश की पहली टूरिस्ट महिला गाइड रेखा चोपड़ा। भोपाल में रहती हैं। बतौर टूरिस्ट गाइड रेखा ने 22 साल की उम्र में काम शुरू किया। 55 साल की रेखा पिछले 33 साल से इस पेशे में हैं। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि विदेशी महिला लुइस निकल्सन ने फोर्ब्स इंडिया में लिखा था कि 'यदि आप सांची गए और रेखा चोपड़ा के साथ नहीं गए, तो आपने सांची नहीं देखा।' रेखा का कहना है कि टूरिस्ट गाइड बनने की प्रेरणा सास-ससुर से मिली। महिला दिवस पर उन्होंने भास्कर से अनुभव शेयर किए -

'मूल रूप से दिल्ली से हूं। 22 साल की उम्र में भोपाल में राकेश चोपड़ा से शादी हुई। ससुराल में टूरिज्म का फैमिली बिजनेस था। 1987 में ससुरजी ने पूछा कि क्या करना चाहती हो? चूंकि मैंने बीएड किया था, इसलिए टीचर बनने की इच्छा जताई। पढ़ाना भी शुरू किया। उसी साल पहली बार केंद्र और राज्य सरकार ने टूरिस्ट गाइड का कोर्स शुरू किया था। ससुर आरआर चोपड़ा के कहने पर पति के साथ कोर्स ज्वॉइन कर लिया। क्लास में 48 लोग थे, जिनमें दो महिलाएं थीं। इनमें मैं भी थी। एक महिला ने तीन दिन बाद छोड़ दिया। फिर 47 में अकेली ही महिला बची थी। अजीब भी लगता था।

गाइड बनने के लिए सास पोमल चोपड़ा ने प्रेरित किया। सास और दादी सास रामकौरा चोपड़ा ने बेटे को संभाला। मायके वालों ने विरोध जताया, तो मैंने कहा- मैं गाइड नहीं बन रही हूं, बल्कि एम्बेसडर ऑफ इंडिया हो गई हूं। मुझे ट्रेनिंग मिल रही है कि मैं देश को किसी के सामने कैसे प्रेजेंट कर सकती हूं। जब रिजल्ट आया, तो मैंने टॉप किया। पति दूसरी पोजीशन पर रहे। इसके बाद मेरे प्रोफेसर ने ससुरजी को कॉल करके कहा- बहू से कहिए, वे जिस स्कूल में पढ़ा रही हैं, उसे छोड़ दे क्योंकि उनकी जरूरत टूरिज्म इंडस्ट्री को है।'

पहली बार सांची टूर

रेखा बताती हैं कि 1988 में फ्रेंच ग्रुप के साथ सांची भेजा गया। जब मैंने उन्हें समझाना शुरू किया और उनसे भी उनके देश के बारे में जाना, तो लगा कि यह फील्ड मेरे लिए ही बनी है। दो-तीन बार जब मैं गई, तो लगा कि टीचर रहते हुए मेरी जानकारी सीमित थी।

सांची टूर के दौरान टूरिस्ट के ग्रुप के साथ रेखा चोपड़ा (लाल सूट पहने)।
सांची टूर के दौरान टूरिस्ट के ग्रुप के साथ रेखा चोपड़ा (लाल सूट पहने)।

मुश्किलों भरी थी राह

रेखा ने बताया कि शुरुआत में मुश्किलों का सामना करना पड़ा। हां, हर मुश्किल को पति और परिवार से शेयर किया। कई बार रोते हुए कहती थी- टीचर की जॉब ही अच्छी थी, क्योंकि रिश्तेदार और दोस्त ताने मारते थे। पति और परिवार ने कहा कि जब तुम घर का गेट खोलकर जाती हो, तो मुझे तुम पर विश्वास होता है। लोग क्या कहते हैं या ताने मारते हैं, इससे हमें मतलब नहीं। काम पर फोकस करो। इसके बाद टेंशन लेना छोड़ दिया।

कई भाषाएं सीखीं, पर नमस्ते से ही शुरुआत

रेखा ने बताया, मेरी इंग्लिश पर कमांड अच्छी है। कई बार फोन आते, तो कहा जाता कि रेखा को भेजिए। कोई इटली से आता, जापान से या कहीं और से। मुझे ही जाने के लिए कहा जाता था। मैं इनसे भाषाएं भी सीखने लगी थी। ऐसा कर मैंने थोड़ी-थोड़ी कई लैंग्वेज सीख लीं। हां, उनसे हाथ जोड़कर नमस्ते जरूर करती थी।

दो बार बेस्ट महिला गाइड का अवॉर्ड

रेखा को मुख्यमंत्री द्वारा एक बार बेस्ट महिला गाइड का अवॉर्ड भी मिल चुका है। वे कहती हैं- कई बार विदेशों से कॉल आते हैं कि मैडम फ्री हों, तो हम टिकट बुक कर सांची या भीमबेटका देखने आएं। यह सुन लगा कि जैसे राष्ट्रपति अवॉर्ड मिल गया हो।

प्रदेश सरकार की ओर से रेखा चोपड़ा को बेस्ट महिला गाइड का अवॉर्ड भी मिल चुका है।
प्रदेश सरकार की ओर से रेखा चोपड़ा को बेस्ट महिला गाइड का अवॉर्ड भी मिल चुका है।

फोर्ब्स इंडिया बुक में भी जिक्र

अमेरिका की एक टूरिस्ट लुइस निकल्सन ने भी रेखा को बहुत सराहा। उन्होंने कई लोगों को इनके बारे में बताया भी। रेखा के मुताबिक फोर्ब्स इंडिया बुक में भी उनके बारे में जिक्र किया गया है। इसमें लिखा है कि 'यदि आप सांची गए और रेखा चोपड़ा के साथ नहीं गए, तो आपने सांची देखा ही नहीं।' इसके बाद से मैं पॉपुलर हो गई। कई टूरिस्ट तो मुझे कहकर जाते हैं, लगता है कि आपका पिछले जन्म का कोई रिश्ता है इस धरती से, इसलिए आपका विवाह भोपाल में ही हुआ। जब बेटा हुआ, तो मैंने जाना बंद कर दिया। इस पर कॉल आने लगे कि मैडम को सांची की चिड़िया याद कर रही हैं। मेरे बेटे ने मम्मा कहना बाद में सीखा, पहले बाय-बाय मम्मा कहना सीखा।’ रेखा के मुताबिक ' आज वो जिस मुकाम पर हैं, उसमें बिटिया रुचिता और कार्तिक का बचपन से ही बहुत सपोर्ट रहा है।

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