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खंडवा लोकसभा सीट पर चुनावी रणनीति:BJP ने ज्ञानेश्वर को टिकट देकर खेला OBC कार्ड; यहां 26% आबादी इसी वर्ग की, कांग्रेस से 15 साल बाद सामान्य वर्ग का कैंडिडेट

भोपाल13 दिन पहले

मध्यप्रदेश में होने वाले उपचुनावों में खंडवा लोकसभा सीट पर सबकी निगाहें हैं। दोनों प्रमुख सियासी दलों ने अपनी रणनीति बना ली है। BJP ने पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष ज्ञानेश्वर पाटिल को टिकट देकर OBC कार्ड खेला है। इसे यहां की 26% OBC आबादी को साधने की रणनीति माना जा रहा है, जबकि इसके बिल्कुल उलट कांग्रेस ने सामान्य वर्ग के राजनारायण सिंह पुरनी पर दांव लगाया है। यहां सामान्य वर्ग की आबादी 20 फीसदी है।

BJP ने खंडवा लोकसभा सीट पर 25 साल बाद OBC चेहरा दिया है। इसकी एक वजह यह भी है कि इस संसदीय क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या 19 लाख 68 हजार है। इसमें से OBC 5 लाख 16 हजार हैं, जबकि सामान्य वर्ग के मतदाता 4 लाख से कम हैं। जातीय समीकरण के गणित से देखें तो एसी-एसटी वर्ग के वोटर सबसे ज्यादा 7 लाख 68 हजार हैं। इस लोकसभा क्षेत्र में आठ में से सिर्फ 3 विधानसभा क्षेत्रों में आदिवासी वोटर निर्णायक भूमिका में है।

22 साल बाद चुनाव लड़ रहे राज नारायण
इस सीट पर कांग्रेस से उम्मीदवार मांधाता से तीन बार के MLA रहे राज नारायण सिंह की उम्र 69 साल की है। वे करीब 22 साल बाद चुनाव लड़ने जा रहे हैं। कांग्रेस में अर्जुन सिंह और दिग्विजय सिंह की सरकार में विधायक रहे राज नारायण सिंह पुरनी की पहली बार संसदीय राजनीति में एंट्री हुई है। हालांकि, 2019 के मांधाता उपचुनाव में कांग्रेस ने उनके बेटे उत्तमपाल सिंह को ही टिकट दिया था, लेकिन उत्तमपाल को BJP के नारायण पटेल से 22 हजार वोटों से हार मिली। कांग्रेस से सिर्फ अरुण यादव ने 2009 में चुनाव जीता था। उनसे पहले 1991 के लोकसभा चुनाव में महेंद्रसिंह कांग्रेस से जीते थे। यानी 1996 के बाद 2009 के लोकसभा चुनाव को छोड़ दिया जाए तो BJP से नंदकुमार सिंह ही चुनाव जीतते आ रहे थे।

आठ बार भाजपा और सात बार कांग्रेस का रहा कब्जा
1962 से अब तक हुए 15 चुनाव में इस सीट पर 8 बार BJP तथा BLD और 7 बार कांग्रेस का कब्जा रहा है। नंदकुमार सिंह चौहान और अरुण यादव के बीच तीन बार मुकाबला हुआ। इनमें दो बार अरुण यादव को हार का सामना करना पड़ा है। दिवंगत सांसद चौहान 6 बार खंडवा लोकसभा का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। नंदकुमार सिंह चौहान और अरुण यादव के बीच तीन बार मुकाबला हुआ। इनमें दो बार अरुण यादव को हार का सामना करना पड़ा है। दिवंगत सांसद चौहान 6 बार खंडवा लोकसभा का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। कोरोना संक्रमित होने के बाद इलाज के दौरान सांसद चौहान की मौत हो जाने से इस सीट पर उप चुनाव हो रहा है।

BJP के लिए अग्नि परीक्षा होगी आदिवासी वोट की वापसी
आदिवासी वोट की अहमियत का अहसास 2018 के विधानसभा चुनाव में कर चुकी BJP के लिए उपचुनाव में भी चुनौती बनी हुई है। खंडवा लोकसभा सीट सहित 3 विधानसभा क्षेत्रों के उपचुनाव में आदिवासी वर्ग की निर्णायक भूमिका तय है। खंडवा और जोबट सीट पर इस वर्ग को साधना BJP के लिए अग्नि परीक्षा साबित होगी।

दरअसल, खंडवा लोकसभा सीट की आठ में से तीन आदिवासी और एक अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित विधानसभा सीटों पर मतदान का आंकड़ा देखें तो स्पष्ट होता है कि यहां सीधा मुकाबला हमेशा से BJP और कांग्रेस के बीच रहा है। विधानसभा-लोकसभा में किसे भेजना है, इसकी चाबी आदिवासी वर्ग के हाथ में ही रही है, लेकिन मुश्किल यह है कि फिलहाल कांग्रेस और BJP के पास आदिवासी चेहरों का टोटा है।

कांग्रेस को फॉर्मूला- 2018 पर भरोसा
कांग्रेस 2018 के विधानसभा चुनाव में मिली जीत को उपचुनाव में कैश कराने की तैयारी में है। 2018 के चुनाव में कांग्रेस को खंडवा लोकसभा क्षेत्र में आने वाली विधानसभा सीटों पर BJP के मुकाबले अच्छी बढ़त हासिल हुई थी। फिर भी कांग्रेस को 2021 के लोकसभा सीट के उपचुनाव में आदिवासी वोटरों से खासी उम्मीद है।

चार में से दो सीटों पर बाहरियों पर भरोसा
BJP ने चार सीटों में से दो विधानसभा सीटों पर बाहर से आए लोगों को टिकट दिया है। सुलोचना रावत तीन दिन पहले ही BJP में शामिल हुई थीं। उन्हें पार्टी ने टिकट दे दिया है। वहां कांग्रेस से तीन बार विधायक रह चुकी हैं। वहीं, पृथ्वीपुर से पार्टी ने शिशुपाल सिंह यादव को टिकट दिया है। वह समाजवादी पार्टी से आए हैं। मध्यप्रदेश से पार्टी नेतृत्व ने कई दावेदारों के नाम भेजे थे। आधी रात को इस पर दिल्ली में मुहर लगी है। गुरुवार की सुबह सूची जारी की गई है।

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