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MP में अगस्त के पहले स्कूल खुलना मुश्किल:इस बार जिलास्तर पर होंगे स्कूल से जुड़े फैसले; सरकार, एक्सपर्ट और संचालकों की क्या है राय और रणनीति...यहां पढ़िए सब कुछ

मध्यप्रदेश2 महीने पहलेलेखक: अनूप दुबे
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कोरोना की तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए मप्र में अगस्त के पहले सरकारी-प्राइवेट स्कूल खुलने के आसार नहीं हैं। तीसरी लहर नहीं आई और हालात सामान्य रहे तो ही अगस्त में स्कूल खोले जा सकेंगे। इसे लेकर सरकार ने स्कूल संचालक, एक्सपर्ट से बात की जिसमें समान रूप से यही निकलकर आया कि जुलाई आखिरी तक स्कूल नहीं खोले जाने चाहिए। वैसे मंत्री समूह अपनी रिपोर्ट तीन दिन में तैयार कर लेगा। दैनिक भास्कर ने सरकार के मंत्रियों, प्रदेश के बड़े स्कूल संचालकों, हेल्थ एक्सपर्ट्स से बात की, जिसमें भी यह बात निकलकर आई।

परीक्षा का अब कोई दबाव नहीं, ऑनलाइन क्लासेस की परमिशन भी दे दी

राज्य सरकार इस पर गंभीरता से विचार कर रही है कि जुलाई अंत तक कोई स्कूल न खोले जाएं। वैसे भी अब किसी तरह की परीक्षा का दबाव भी नहीं है। सभी तरह के स्कूलों में 15 जून से एडमिशन देने के साथ ऑनलाइन कक्षाएं फिर से चालू करने की अनुमति देने के पीछे भी यही कारण है।

शिक्षा मंत्री इंदरसिंह परमार ने कहा- वैसे इस बार सरकार पवर डेलीगेट करने जा रही है। पहले राज्य स्तर पर फैसले होते थे, अब कोरोना संक्रमण के हालात, जिले और स्कूलों में मौजूद संसाधनों के आधार पर निर्णय होंगे। इसके लिए अधिकार कलेक्टर और जिला क्राइसिस मैनेजमेंट कमेटी को दिए जा सकते हैं। कमेटी से कहा जाएगा कि वह अपने यहां के शिक्षाविदों, एक्सपर्ट्स और स्कूल संचालकों से चर्चा करके ही फैसला लें।

कहां के स्कूल पहले खुलेंगे, इसका क्या फार्मूला होगा?

सरकार एक फार्मूला निकाल रही है जिसके अंतर्गत जहां न्यूनतम 50% लोगों को पहली वैक्सीन लग गई हो और संक्रमण दर न्यूनतम स्तर पर हो वहां स्कूल खोलने पर पहले विचार किया जाएगा। कोरोना संक्रमण दर के साथ छोटे बच्चों के माता-पिता के वैक्सीनेशन की भी मॉनिटरिंग की जाएगी। इसीलिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने घोषणा की है कि 12 साल तक के बच्चों के माता-पिता का प्राथमिकता से वैक्सीनेशन होगा।

कहां के स्कूल खोलने में ज्यादा चुनौती होगी, गांव या शहर?

ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में ज्यादा समस्या नहीं है क्योंकि वहां बच्चों की संख्या कम है। संक्रमण दर कम है और डिस्टेंस भी पर्याप्त है। विभाग के अफसरों ने कहा- हमारे लिए शहर के स्कूल चुनौती हैं। वहां अधिक बच्चे हैं, इसलिए स्कूल वाइज फैसला करना पड़ेगा, उनकी जरूरत और परिस्थिति के अनुसार ही स्कूल खोलने की रणनीति बनेगी और मंजूरी दी जाएगी।

क्रम से खुलेंगे स्कूल; पहले 10-12वीं फिर 9वीं-11वीं फिर छठी से आठवीं और फिर प्राइमरी क्लास

सबसे पहले शिक्षक और निजी स्कूलों के संचालकों को बुलाकर उनसे तैयारी पर बात की जाएगी। पहला फोकस 12वीं और 10वीं की क्लासेस शुरू करने पर रहेगा। उसके बाद नौवीं-11वीं की चालू करेंगे। इसके बाद छठीं से आठवीं और सबसे आखिरी में पहली से पांचवीं की क्लासेस शुरू होगी। इसमें इतना बदलाव हो सकता है कि नौवीं से 12वीं तक की क्लासेस एक साथ चालू हो जाएं।

निजी स्कूल ऑनलाइन कराएंगे, सरकारी में मोबाइल का क्या विकल्प है?

शिक्षा विभाग के अफसरों ने कहा- हम सरकारी स्कूलों के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन के बीच का विकल्प ढूंढ़ रहे हैं। यह भी संभव है कि हम एक क्लास के एक विषय के स्टूडेंट्स को सप्ताह में एक दिन बुलाकर पढ़ाएं। या फिर शिफ्टवाइज कुछ-कुछ घंटे बुलाकर पढ़ा सकते हैं। इसके लिए पेरेंट्स से सहमति लेना अनिवार्य होगा। पेरेंट्स से सुझाव भी लिए जा रहे हैं कि स्कूल कैसे खोले जाएं।

क्या ऐसी कोई स्टडी है, जिसमें तीसरी लहर में बच्चों की चपेट में आने की बात हो

ऐसी कोई अधिकृत स्टडी सरकार के पास उपलब्ध नहीं है। खबरों और एक्सपर्ट की राय के आधार पर ही यह माना जा रहा है कि तीसरी लहर में बच्चे प्रभावित हो सकते हैं क्योंकि उन्हें वैक्सीन नहीं लगा होगा।

निजी स्कूल संचालक इस बार स्कूल खोलने पर क्या सोच रहे हैं?

तीसरी लहर की आशंका के चलते निजी स्कूल संचालकों ने भी फिलहाल किसी तरह के स्कूल खोलने की डिमांड नहीं की है। वे सरकार के रुख के साथ दिख रहे हैं। कुछ बड़े स्कूल संचालकों की ओर से सरकार को सुझाव दिया गया है कि तत्काल कोई फैसला न करें। जुलाई अंत तक रुकना ही ठीक रहेगा। पहले बड़ी क्लास पर ही फोकस किया जाए।

हेल्थ एक्सपर्ट्स ने भी सरकार को सलाह दी- स्कूल खोलने के लिए इंतजार कीजिए

मध्य प्रदेश स्टेट एडवाइजरी कमेटी के सदस्यों ने सरकार को स्कूल खोलने के लिए इंतजार करने की सलाह दी है। वे चाहते हैं कि सरकार को ज्यादा से ज्यादा जगहों पर ट्रायल की अनुमति देनी चाहिए ताकि बच्चों के लिए जल्द से जल्द वैक्सीन उपलब्ध हो सके। पहली लहर में बुजुर्ग, दूसरी में युवा संक्रमित हुए, इससे लगता है कि तीसरी लहर में बच्चे हो सकते हैं।

15 अगस्त के बाद स्कूल खोलने का दिया है सुझाव

हमसे भी शासन ने बात की थी। उन्हें सुझाव दिया है कि कम से कम 15 अगस्त तक स्थितियों को देखते हुए स्कूल न खोलें। इसके बाद रिव्यू कर स्कूल खोलने पर निर्णय लें। हालांकि यह ख्याल रखें कि पहले बड़ी क्लास को फोकस कर प्लानिंग के साथ उसे शुरू करने पर विचार किया जाना चाहिए, लेकिन जुलाई तक तो किसी स्थिति में स्कूल नहीं खुलना चाहिए।

-अभिषेक मोहन गुप्त, संचालक डीपीएस स्कूल भोपाल

15 जुलाई तक हालात देखें, फिर हालात की समीक्षा के बाद फैसला हो

अभी के हालात को देखते हुए 15 जुलाई तक तो स्कूल नहीं खुलाना चाहिए। उसके बाद सरकार समीक्षा करें और पहले एक महीने के लिए बड़ी क्लास शुरू करे। एक महीने तक संक्रमण पर नजर रखे और अगर सब ठीक चलता है, तो फिर दूसरी क्लास को लेकर विचार करे।

-विनी राज मोदी, सचिव एसोसिएशन ऑफ अन-ऐड प्राइवेट स्कूल मध्यप्रदेश एवं सहोदय ग्रुप

ज्यादा से ज्यादा जगहों पर बच्चों पर वैक्सीन ट्रायल की मंजूरी देना चाहिए

सरकार को अपने स्तर पर अस्पतालों में इलाज की तैयारी शुरू करना चाहिए। अभी बच्चों के वैक्सीनेशन ट्रायल की मंजूरी एम्स दिल्ली, पटना और नागपुर के एक अस्पताल को दी गई है। सरकार को ज्यादा से ज्यादा जगहों पर ट्रायल की अनुमति देनी चाहिए ताकि बच्चों के लिए जल्द से जल्द वैक्सीन उपलब्ध हो सके। इसके बाद स्कूल खोलना आसान हो जाएगा। पहली लहर में बुजुर्ग, दूसरी में युवा संक्रमित हुए, इससे लगता है कि तीसरी लहर में बच्चे हो सकते हैं। जरूरी नहीं कि ऐसा हो लेकिन तैयार रहना चाहिए।

- डॉ. ज्योत्सना श्रीवास्तव, विभागाध्यक्ष, जीएमसी भोपाल एंड सदस्य टेक्निकल एडवाइजरी कमेटी कोविड-19 एमपी

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