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MP में पूरी क्षमता के साथ खुलेंगे स्कूल:24 घंटे में जारी हो सकते हैं आदेश; तीन अहम शर्तों पर चल रहा मंथन

भोपाल9 महीने पहले
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मध्यप्रदेश में पेरेंट्स 1 से 5वीं क्लास तक के अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए तैयार हो जाएं। पूरी क्षमता से स्कूल खोले जाने संबंधी प्रस्ताव मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पास भेजा जा चुका है। इस संबंध स्कूल शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने रविवार देर शाम एक बयान भी जारी किया। उन्होंने कहा कि जब परिस्थितियां खराब थीं तो ऑनलाइन का विकल्प चुना था। अब परिस्थितियां ठीक हैं, इसलिए पूरी क्षमता के साथ स्कूल खुलेंगे। सभी बच्चों को स्कूल आना चाहिए।

प्रस्ताव में 20 नवंबर से ही सभी स्कूल खोले जाने की अनुशंसा की गई थी, लेकिन मुख्य तीन बिंदुओं के कारण शनिवार को आदेश जारी नहीं किए जा सके। इसमें मुख्य रूप से पेरेंट्स की अनुमति लेने की अनिवार्यता, स्पोर्ट्स और प्रार्थना होगी या नहीं इस पर मंथन किया जा रहा है। स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार अगले चौबीस घंटों के दौरान स्कूल खुलने को लेकर आदेश जारी हो सकते हैं।

कुछ स्कूलों ने नया टाइम टेबल भी जारी किया

राजधानी भोपाल में BCSE के करीब 78 स्कूल हैं। कुछ स्कूल तो पहले से ही कक्षा फर्स्ट से 12वीं क्लास शासन की गाइडलाइन के अनुसार संचालित कर रहे हैं, जबकि कुछ स्कूल ने ऑफलाइन और ऑनलाइन क्लास 3-3 दिन का टाइम टेबल जारी किया है। भेल कॉमर्ल काॅन्वेंट स्कूल ने सभी क्लास का ऑफलाइन और ऑनलाइन टाइम टेबल शनिवार को जारी कर दिया है। इसमें साफ तौर से कहा गया है कि अब परीक्षा ऑफलाइन ही होंगी। हालांकि, अभी भी स्कूल संचालक खुलकर बोलने को तैयार नहीं हैं।

भोपाल में कुल 1800 स्कूल
भोपाल में शासकीय 1100, एमपी बोर्ड के प्राइवेट करीब 350 और CBSE के 78 स्कूल और अन्य बोर्ड के मिलाकर करीब 1800 स्कूल हैं। अभी केजी की क्लास नहीं लग रही हैं। पहली से 12वीं तक की क्लास लग रही हैं। इसमें भी सिर्फ 50% क्षमता और पेरेंट्स की अनुमति जरूरी है।

MP में तीन चरण में स्कूल खुले
पहला चरण : 11वीं और 12वीं की क्लास 50% क्षमता के साथ सप्ताह में दो दिन शुरू की गईं। इसके अलावा 9वीं और 10वीं की क्लास सप्ताह में एक ही दिन लगाई गईं। छात्रों को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों के विकल्प दिए गए।
दूसरा चरण : 9वीं से लेकर 12वीं तक की क्लास के दिन बढ़ाए गए।
तीसरा चरण : 1 सितंबर से 6वीं से 12वीं तक की सभी क्लासेस रोजाना (रविवार को छोड़कर) लगाई जाने लगी। लिमिट 50% ही रखी गई।

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