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विदेश में पढ़ना चाहते हैं तो ये बातें जान लें...:सरकार और कई विदेशी यूनिवर्सिटी देती हैं 100% स्कॉलरशिप; एक्सपर्ट से समझें A to Z

भोपाल4 महीने पहलेलेखक: अनूप दुबे

विदेश में पढ़ने का सपना किसका नहीं होता? लेकिन बेहद महंगी होने के कारण या कमजोर माली हालत के कारण कम लोग ही ये सपना पूरा कर पाते हैं। अगर आप भी ऐसी इच्छा रखते हैं, लेकिन पैसे नहीं होने से दिक्कत आ रही है, तो ये खबर आपके लिए है। जी हां, मध्यप्रदेश सरकार आपकी इस हसरत को पूरा करने में आपकी मदद करेगी। कम ही लोगों को पता है कि प्रदेश सरकार टॉपर्स के लिए 100% स्कॉलरशिप के साथ ही रहने और खाने तक का खर्च उठाती है। यही नहीं, कई विदेशी यूनिवर्सिटी भी टॉपर्स को पूरी स्कॉलरशिप देती हैं। स्वीडन, नॉर्वे, जर्मनी और डेनमार्क जैसे देशों में पढ़ाई फ्री में होती है। मध्यप्रदेश से हर साल करीब 15 हजार से ज्यादा छात्र विदेश जाते हैं। 4 जून को इसी संबंध में IDP का एग्जाम है। एडमिशन कैसे होगा, प्रोसेस और क्राइटेरिया क्या है, नॉलेज किंगडम ग्रुप की डायरेक्टर और एजुकेशन एक्सपर्ट मनी मिश्रा से A to Z जानते हैं...।

स्कॉलरशिप के लिए क्या करना होगा
प्रदेश सरकार हर साल स्कॉलरशिप निकालती है। इसमें यूजी-पीजी के कोर्स शामिल रहते हैं। इसके लिए अंग्रेजी भाषा का IELTS (इंटरनेशनल इंग्लिश लैंग्वेज टेस्टिंग सिस्टम) एग्जाम क्वालीफाई करना होता है। ज्यादातर देशों के लिए अंग्रेजी भाषा आना जरूरी है। जर्मनी जाने के लिए जर्मन भाषा की एग्जाम भी पास करना होता है। इसके लिए IDP के माध्यम से ऑस्ट्रेलिया, GRI के माध्यम से अमेरिका और ब्रिटिश काउंसिल टेस्ट कंडक्ट करवाते हैं। भोपाल में आथोराइज सेंटर हैं। इंदौर और भोपाल में हर महीने टेस्ट होता है। टेस्ट के बाद मेडिकल और इंटरव्यू होता है। उसमें सिलेक्ट होने पर 100% स्कॉलरशिप दी जाती है।

10वीं-12वीं में 80% से ज्यादा मार्क्स जरूरी
स्कॉलरशिप पाने के लिए 10वीं व 12वीं में 80% से ज्यादा मार्क्स होना चाहिए। इसके साथ ही क्वालीफाई भी अच्छे नंबरों से होना जरूरी है। प्रोफाइल अच्छा होने पर विदेशी यूनिवर्सिटी बच्चों को ले लेती हैं। वह देश ही पढ़ाई का खर्चा उठाती हैं।

उस देश का टेस्ट भी करना होगा पास
भारत में एग्जाम निकालने के बाद अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में पढ़ाई के लिए लोकल एग्जाम भी पास करना होगा। इसके बाद ही क्वालीफाई होंगे। अमेरिका में टेस्ट सबसे ज्यादा टफ होता है। कई यूरोपियन देशों के साथ ही छोटे देशों में भारतीय छात्रों को बिना टेस्ट के एडमिशन दिया जाता है। यहां बड़े कोर्स 15 से 20 लाख रुपए में हो जाते हैं। परेशानी ये है कि यहां से MBBS जैसे कोर्स करने वालों को भारत में दोबारा टेस्ट देना होता है। इस कारण पढ़ाई के बाद भारत में परेशानी होती है।

स्कॉलरशिप कैसे मिल सकती है
मध्यप्रदेश सरकार हर साल SC, ST और OBC के लिए स्कॉलरशिप देती है। निश्चित संख्या में परीक्षा पास करने वाले छात्रों को सरकार द्वारा यह स्कॉलरशिप दी जाती है। इसमें सरकार सभी तरह के खर्च उठाती है। बशर्ते छात्र के पेरेंट्स की आय साल में 5 लाख रुपए से कम हो।

बैंक लोन भी मिल सकता है क्या?
विदेश में पढ़ाई करने के लिए स्टूडेंट लोन सबसे आसान रास्‍ता माना जाता है। बैंक से लेकर कई तरह की निजी कंपनियां भी छात्रों को लोन देती हैं। खास बात यह है कि इसमें लड़कियों को बैंक की तरफ से विशेष छूट होती है। उन्हें कई बैंक की तरफ से लड़कों की तुलना में करीब 1% कम ब्याज पर लोन दिया जाता है।

क्या करना होगा, यूनिवर्सिटी की रैंकिंग देखना भी जरूरी
क्वालीफाई करने के बाद विदेश से कई यूनिवर्सिटी ऑफर देती हैं। छात्रों को इसके लिए आवेदन करना होता है। एक फॉर्म ही करीब 100 डॉलर का होता है। कॉलेज में फॉर्म भरने के पहले देखना चाहिए कि उस यूनिवर्सिटी की रैंकिंग क्या है। अगर वह टॉप यूनिवर्सिटी में शामिल नहीं है, तो वहां पढ़ाई करने से जॉब गांरटी नहीं होती।

पढ़ाई के बाद जॉब कहां करें
मनी कहती हैं कि विदेश में पढ़ाई करने के बाद प्रोफाइल अच्छा करने के लिए वहां कम से कम 2 से 3 साल जॉब करना चाहिए। इससे सीवी मजबूत होता है। अगर विदेश में किसी कारण से नहीं रहना या जॉब करना चाहते हैं, तो भारत में आकर अच्छी जॉब मिल जाती है। इसका फायदा होता है।