♦ तारीख- 27 सितंबर 2022 ♦ स्थान- UP के आगरा का कुर्रा तिराहा ♦ समय- सुबह 6.30 बजे।
उत्तर प्रदेश की आगरा पुलिस ने मध्यप्रदेश के मुरैना निवासी 21 साल के युवक आकाश को खनन तस्कर बता मुठभेड़ में तीन गोली मारी। 48 दिन तक अस्पताल में जिंदगी और मौत से संघर्ष के बाद युवक ने दम तोड़ दिया। अब छह महीने बाद आगरा जिला कोर्ट ने इस एनकाउंटर को फर्जी बताकर आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करने के आदेश दिए हैं। एक मां और वकील के संघर्ष से मामला साक्ष्य के साथ कोर्ट पहुंचा। कोर्ट ने इसे फर्जी एनकाउंटर माना है। एक मां ने सबूत जुटाकर पुलिस की झूठी थ्योरी से पर्दा हटा दिया।
दैनिक भास्कर आकाश के घर पहुंचा। उसके परिजन और वकील से बात की। पढ़िए फर्जी एनकाउंटर की वो सच्ची कहानी जो आपने पहले कभी नहीं पढ़ी थी।
फर्जी एनकाउंटर में जान गंवाने वाले आकाश के पिता लाल सिंह की जुबानी…
खेती-किसानी और दूध बेचकर हमारे घर का खर्च चलता है। तीन बेटों में सबसे बड़ा आकाश 12वीं पास करने के बाद अग्निवीर भर्ती की तैयारी में जुटा था। उससे छोटा अभिषेक 10वीं में फेल होने के बाद पढ़ाई छोड़कर मेरे साथ खेती में हाथ बंटाता है। सबसे छोटा अंशु अभी 11वीं में पढ़ रहा है।
आगरा में अग्निवीर की भर्ती चल रही थी। आकाश 26 सितंबर की रात 10 बजे के घर से आगरा के लिए निकला था। वहां मेरा भतीजा और आकाश का चचेरा भाई विष्णु गुर्जर रहता है। विष्णु केंद्रीय आयुध डिपो (सीओडी) में काम करता है। गड़ौरा गांव से मुख्य मार्ग को जाने वाली रोड से लगा पिपरई गांव है। आकाश वहां से बस पकड़ने गया था। पिपरई गांव के रिश्तेदार परमलाल से मालूम चला कि आकाश को ये बस पिपरई में 27 सितंबर की सुबह 4 से 4.30 बजे के बीच मिली थी। इंदौर से दिल्ली जाने वाली बस यूपी-75 एटी-9864 के ड्राइवर रामेश्वर ने भी इसकी पुष्टि की। रामेश्वर से ही पता चला कि सुबह 6.30 बजे के लगभग आगरा से पहले कुर्रा तिराहे के पास आकाश पेशाब करने के लिए उतरा था और काफी देर तक वह नहीं लौटा, जिसके बाद वह बस लेकर निकल गया था।
अब वो कहानी जो KGMC लखनऊ में बेटे ने मां को सुनाई
आकाश की मां ममता गुर्जर के मुताबिक 27 सितंबर को आगरा पुलिस की सूचना पर आगरा जिला अस्पताल पहुंची। वहां बेटा आईसीयू में भर्ती था। मैं पुलिस के सामने हाथ जोड़ गिड़गिड़ाती रही, लेकिन बेटे से मिलने नहीं दिया गया। मेरा बच्चा तड़पता रहा। वहां ठीक से इलाज नहीं हो रहा था। पुलिस ने उसे हथकड़ी लगाए रखी थी। उसे तीन गोली लगी थी। दो जांघ पर और एक पेट में, जिससे उसका खूब खून बह गया था। उसे 7 बॉटल खून भी चढ़ाया गया, लेकिन हालत बिगड़ती गई।
फिर उसे आगरा जिला अस्पताल से किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) लखनऊ (यूपी) रेफर कर दिया गया। वहां मैं अपने बेटे आकाश से मिल पाई। तब उसने बताया कि वह बस से पेशाब करने उतरा था। इतने में कुछ पुलिस वाले सिविल ड्रेस में आए और उसे गोली मार दी। तीन में से दो गोली जांघ पर और एक पेट पर लगी थी। उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि उसे गोली क्यों मारी गई। 48 दिनों के संघर्ष के बाद 13 नवंबर 2022 को उसने दम तोड़ दिया। इलाज में 10 लाख खर्च हुए। पुलिस या वहां की सरकार से कोई मदद नहीं मिली।
अब पुलिसिया दावे भी पढ़ लीजिए
इस एनकाउंटर की पुलिसिया कहानी आगरा जिले के इरादत नगर में कायम दो FIR में दर्ज है। दोनों FIR आकाश को एनकाउंटर में गोली मारने वाले इसी थाने के सिपाही योगेश कुमार ने एक मिनट के अंतराल में दर्ज कराई है।
FIR नंबर 0169
धारा-307 (हत्या का प्रयास), 332 (लोकसेवक को चोट पहुंचाना), 353 (सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने)
आरोपी- आकाश, मामा हरेंद्र और 1 अज्ञात
FIR नंबर 0170
धारा-3, 25 (आर्म्स एक्ट)
आरोपी- आकाश गुर्जर
FIR का मजमून- 27 सितंबर 2022 को मैं सिपाही (253) योगेश कुमार इंसास और 20 कारतूस के साथ बाइक क्रमांक यूपी 80 एजी 0755 और सिपाही (4054) अनुज धामा रिवॉल्वर एवं 6 कारतूस के साथ खुद की बाइक से तड़के 2.35 बजे गश्त पर निकले थे। गढ़ी हुद्दा और सूरजपुरा के बीच में सुबह 6.18 बजे हवलदार दिनेश ने अनुज धामा को खबर दी कि एनएच 03 कुर्रा मोड की तरफ से तीन ट्रैक्टर-ट्रॉली चंबल से रेत लेकर मां भगवती ढाबा से निकली हैं। दरोगा मदन सिंह के साथ हम उनका पीछा करते हुए आ रहे हैं।
सुबह 6.30 बजे कुर्रा मोड की तरफ से तीन ट्रैक्टर-ट्रॉली आते दिखे। आगे वाले ट्रैक्टर पर ड्राइवर सहित तीन लोग थे। सामने बाइक लगाकर हम लोगों ने रुकने का इशारा किया। ट्रैक्टर ड्राइवर ने स्पीड बढ़ाते हुए हमारे ऊपर वाहन चढ़ाने का प्रयास किया। ट्रैक्टर पर सवार एक व्यक्ति ने गोली मारने के लिए कहा। ट्रैक्टर की टक्कर से बाइक सहित हम गिर गए। आरोपियों ने डंडा फेंककर मारा। फिर ड्राइवर ने फायर कर दिए।
तब बचाव में योगेश ने फायर किए। इस पर ट्रैक्टर पर सवार लोग भागे और मुड़-मुड़ कर एवं झुक-झुक कर हम पर फायर करने लगे। इंसास से फायर किया तो एक सड़क किनारे घायल मिला। उसके जांघ और पेट में गोली लगी थी। थाने और कंट्रोल रूम को अवगत कराते हुए एम्बुलेंस बुलाई। घायल की पहचान आकाश गुर्जर निवासी गडौरा जिला मुरैना एमपी के रूप में हुई। फरार होने वालों में एक की पहचान मामा हरेंद्र के रूप में की, 7 अन्य लोग थे।
एनकाउंटर की खबर पाकर मौके पर एसआई कौशल किशोर, अनुज कुमार व नितिन कुमार भी पहुंचे। नितिन के साथ आरोपी आकाश को आगरा जिला अस्पताल पहुंचाया गया। वहां डॉक्टर ने ब्लड की जरूरत बताई तो पुलिसवालों ने ही 7 यूनिट ब्लड भी डोनेट किए। पुलिस ने आकाश के पास से एक कट्टा और 4 खोखा सहित 5 कारतूस जब्त किए गए।
मां ने बेटे के कातिलों के बेनकाब करने किया संघर्ष
ऊपर की तीन कहानियां पढ़ने के बाद वापस चलते हैं आकाश की मां के पास। 13 नवंबर को आकाश की मौत के बाद उसकी मां ममता ने आगरा कोर्ट में वकील भारतेंद्र सिंह के माध्यम से परिवाद लगाया। इसमें एनकाउंटर को फर्जी बताते हुए आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज कराने की गुहार लगाई। आखिरकार ममता के संघर्ष और विश्वास की जीत हुई।
आगरा सीजेएम मृत्युंजय श्रीवास्तव की कोर्ट ने इस एनकाउंटर में शामिल पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज कराते हुए आगरा पुलिस कमिश्नर को किसी अन्य एजेंसी से FIR की निष्पक्ष जांच के आदेश दिए। आगरा पुलिस कमिश्नर प्रीतिंदर सिंह के मुताबिक इस आदेश पर विधिक राय ली जा रही है। जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई करेंगे।
6 फैक्ट जिनसे कोर्ट में फेल हो गई पुलिस की थ्योरी
आकाश एनकाउंटर को फेंक साबित करने की लड़ाई कोर्ट में लड़ने वाले वकील भारतेंद्र सिंह से दैनिक भास्कर ने बात की। हमने जाना कि आखिर वे कौन से तथ्य थे, जो पुलिस की थ्योरी को झूठी साबित करने में मददगार बनी।
परिवार का दावा उसे तो ट्रैक्टर चलाना तक नहीं आता था
आकाश के गांव गड़ौरा में हमारी बात उसके पिता लाल सिंह, बड़े पिता परमलाल, सरपंच नत्थी सिंह, मां ममता सिंह और मौसी बर्फी से बात हुई। सभी बोले कि आकाश को ट्रैक्टर चलाना नहीं आता था। वह पढ़ाई में भले ही औसत था, लेकिन काफी होशियार था। परिवार वालों ने एमपी के सीएम से भी गुहार लगाई कि वे इस मामले में हमारी मदद करें। कोई पुलिसवाला झूठी वाहवाही के लिए किसी निर्दोष की जान कैसे ले सकता है?
इनपुट- मुरैना से रतन मिश्रा और खैरागढ़ (आगरा) से सोनू सिंघल
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