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ऑनलाइन क्लास में गुड पेरेंटिंग:बच्चों को प्रश्न पूछने के लिए प्रेरित करें, बैठने की जगह मोबाइल ओरिएंटेशन भी सही रखें, बीच-बीच में देखते रहें

मध्यप्रदेशएक महीने पहले

कोरोना के चलते बच्चों की ऑनलाइन क्लासेस एक बार फिर 50 % क्षमता के साथ खुलने के आदेश सरकार ने जारी किए हैं। इससे माता-पिता की चिंता और बढ़ गई है। बच्चों को ऑनलाइन क्लास में बैठने की समस्या होने लगी है। पेरेंट्स को बच्चों की आंखों में समस्या भी परेशान कर रही है। ऑनलाइन क्लास बंक करने के कारण वे पूरे समय पढ़ाई नहीं कर पाते।

शिक्षाविद् डॉ. भरत व्यास के पहले दिन के सुझावों के बाद प्रदेश के कई पेरेंट्स ने अपने सवाल पूछे हैं। उनका सबसे बड़ा सवाल बच्चों की रेगुलर क्लास अटेंड करने को लेकर है। बच्चे मोबाइल पर पढ़ने के दौरान वे कैमरा ऑफ कर देते हैं। इससे टीचर्स उन पर नजर नहीं रख पाते। ऐसे में बच्चों की निगरानी कैसे करें? उनके स्वास्थ्य का कैसे ध्यान रखें। इस बारे में पाठकों के पूछे गए सवालों का जवाब दिया डॉ. भरत व्यास ने।

जानिए पाठकों के सवालों के जवाब -

ऑनलाइन और कन्वेंशनल क्लास में श्रेष्ठ क्या है? ऑनलाइन क्लासेस पेरेंट्स को बोझ लगने लगी है।
कन्वेंशनल क्लासरूम का विकल्प नहीं है। वहां सामूहिकता में बच्चे पढ़ाई करते हैं। यहां टीचर्स भी बच्चों को मॉनिटर करते हैं, लेकिन ऑनलाइन क्लासेस में बच्चा अकेला रहता है। ऐसे में पेरेंट्स इसे बोझ न समझें। यह इमरजेंसी परिस्थिति है। इसे डे टू डे वर्किंग में शामिल करें।

मोबाइल से क्लास रूम की कमी को कैसे पूरा करें।
बच्चे अपना कम्प्यूटर या मोबाइल ऑन करके कैमरा ऑफ कर देते हैं। बच्चा दूसरे काम या खेलकूद में लग जाता है। ऐसे में परिवार का रोल अहम हो जाता है। उनके क्लास के टाइम टेबल को नोट करके रखें।

पेरेंट्स कैसे बच्चों पर नजर रखें?
बच्चों की क्लास के अनुसार पेरेंट्स भी अपने कामकाज का रूटीन तय करें। बच्चों की निगरानी कर सकें। थोड़ी मॉनिटरिंग जरूरी है।

ऐसे में तो बच्चे को लगेगा कि उस पर नजर रखी जा रही है‌?
उन्हें रोकना-टोकना नहीं चाहिए। केवल नजर रखें। वे जरा भी कम्प्यूटर या मोबाइल से नजर हटाएं या कैमरा ऑफ करें, तो टोक दें। या क्लास के बीच-बीच में जाकर देखते रहें। उन्हें खुले कमरे में ऐसी जगह बैठाएं, जहां से उन पर नजर रखी जा सके।

बच्चे क्लास से बंक न मारें, इसके लिए बच्चों को कैसे प्रेरित करें?
ऑनलाइन क्लास में बच्चे टीचर्स की आधी-अधूरी बात ही सुन और सीख पाते हैं। टीचर्स ने उन्हें जो समझाया, वे समझ पाए या नहीं टीचर्स को भी पता नहीं चल पाएगा। वे पढ़ाते-पढ़ाते आगे बढ़ जाएंगे। ऐसे में बच्चों को सवाल पूछने के लिए प्रेरित करना चाहिए, ताकि वे टीचर्स की बात को ध्यान से सुन सकें। और क्लास को अटैंड कर सकें।

बच्चों को क्लास में बैठने के लिए क्या करें कि उन्हें दिक्कत न हो?
बच्चों का के बैठने का ओरिएंटेशन ठीक से रखना चाहिए। कोशिश करें कि उन्हें ऐसा माहौल दे सकें जो क्लास में मिलता है। कैमरा हमेशा ऑन रखें और मोबाइल की सेटिंग ऐसी रखें कि बच्चों को ये लगना चाहिए कि टीचर्स सामने खड़े होकर पढ़ा रहे हैं।