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MP में 10वीं-12वीं परीक्षा जल्द होने के 2 कारण:पहला- मार्च में कोरोना केस बढ़ने की आशंका, दूसरा- CBSE की परीक्षा भी फरवरी में ही

भोपाल3 महीने पहलेलेखक: अनूप दुबे

कोरोना के एमपी बोर्ड की बीते दो साल से 10वीं और 12वीं की परीक्षा आयोजित नहीं हो पा रही हैं। ऐसे में बोर्ड ने इस बार दोनों क्लास की परीक्षा समय से पहले कराने का निर्णय लिया है। अब तक यह परीक्षा 1 मार्च से शुरू होती थीं, लेकिन इस बार से यह फरवरी में शुरू हो जाएंगी। यह निर्णय दो मुख्य कारणों से लिया गया है। पहला कि मंडल को आशंका है कि दोनों बार कोरोना की लहर मार्च के अंत में ही आई है।

अभी कोरोना के केस ज्यादा नहीं हैं, लेकिन अब भी नए संक्रमित मिल रहे हैं। इस बार भी मार्च में ही केस बढ़ने की आशंका है। इसके साथ ही CBSE की प्रायोगिक परीक्षा फरवरी में हो जाती हैं, जबकि मार्च में लिखित परीक्षा होती है। इसी कारण मंडल ने इस बार परीक्षा को फरवरी में शुरू करने का निर्णय लिया है। यह 22 मार्च से प्रारंभ होकर 31 मार्च तक संपन्न हो जाएंगी।

इस तरह होंगी परीक्षा

  • 10वीं और 12वीं क्लास की परीक्षा 12 फरवरी से शुरू होकर 20 मार्च तक संपन्न होंगी।
  • इसके साथ ही 12 फरवरी से 31 मार्च तक प्रायोगिक परीक्षा आयोजित की जाएंगी।

छात्रों को पढ़ाई के लिए कम समय मिलेगा
स्कूल देरी से खुलने के कारण अब तक कोर्स पूरा नहीं हो सका है। परीक्षा जल्दी कराने से छात्रों के पास तैयारी करने के लिए कम समय मिलेगा। ऐसे में छात्रों को अभी से पढ़ाई पर ध्यान देना होगा। इस साल से पेपर में 40% प्रश्न ऑब्जेक्टिव रहेंगे। इससे छात्रों को पास होने में आसानी होगी।

इसलिए लिया गया निर्णय
मंडल अब तक 1 मार्च से दोनों क्लास की परीक्षा प्रारंभ करता था। यह अप्रैल तक चलती थीं। फरवरी में ही पेपर कराने के पीछे तर्क दिया जा रहा है कि अगर कोरोना आता भी है, तो तब तक परीक्षा हो चुकी होंगी। ऐसे में फॉर्मूला रिजल्ट बनाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। दो साल से फॉर्मूला रिजल्ट के आधार पर ही छात्रों को पास किया जा रहा है।

सत्र 2020-21 के सभी बच्चे पास
बीते साल स्कूल शिक्षा विभाग ने फॉर्मूला के आधार पर रिजल्ट तैयार किया था। स्कूल शिक्षा मंत्री के निर्देश पर सभी छात्रों को पास कर दिया गया था। इसके साथ ही रिजल्ट से नाखुश छात्रों को विशेष परीक्षा में शामिल होने का विकल्प लिया गया था। प्रदेश से करीब 15 छात्रों ने विशेष परीक्षा दी थी। पहले शर्त रखी गई थी कि विशेष परीक्षा देने वाले छात्रों का रिजल्ट इसी परीक्षा के रिजल्ट के माना जाएगा। ऐसे में अगर कोई फेल होता है, तो उसे फेल ही माना जाएगा। हालांकि बाद में मंडल ने अपने इस निर्णय को बदलते हुए दोनों परीक्षाओं में से बेहतर रिजल्ट को ही मान्य करने का निर्णय लिया। ऐसे में सभी छात्र पास हो गए।

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