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एमपी बोर्ड में 10वीं के नतीजे:भोपाल की कर्णिका ने प्रदेश में टॉप किया, उन्होंने 5 साल पहले पिता को खोया, कई बार भूखे रहकर पढ़ाई की; पीएससी में सिलेक्शन का लक्ष्य

भोपाल5 महीने पहलेलेखक: अनूप दुबे
भोपाल की टॉपर कर्णिका का सेमरा स्थित उसके स्कूल में स्वागत सम्मान किया गया। कर्णिका ने 300 में से 300 अंक हासिल कर प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है।
  • कर्णिका ने रोजाना करीब 3 घंटे सुबह-शाम पढ़ाई की, 90% तक अंक की उम्मीद थी
  • अगला लक्ष्य पीसीएम विषय लेकर एमपी पीएससी को पास करने का रखा है
  • स्कूल प्रबंधन और ट्यूशन के टीचर ने फीस तक माफ की, सबकी चहेती रही

मध्यप्रदेश शिक्षा बोर्ड की कक्षा 10वीं में टॉप करने वाली भोपाल की कर्णिका मिश्रा ने इस दिन के लिए कई बार भूखे पेट तक पढ़ाई की। पांच साल पहले पिता को खोने के बाद कर्णिका की मां को जॉब करनी पड़ी। शनिवार को जब रिजल्ट आया, तब तक मां ड्यूटी पर चली गई थीं। कर्णिका को उनके घर आने का इंतजार है, ताकि वह मां को गले लगा सकें।

कर्णिका के टॉप करने के बाद बधाई देने वालों का तांता लग गया। मंत्री विश्वास सारंग ने भी उसे बधाई दी।
कर्णिका के टॉप करने के बाद बधाई देने वालों का तांता लग गया। मंत्री विश्वास सारंग ने भी उसे बधाई दी।

टॉपर कर्णिका का अगला लक्ष्य एमपी पीएससी 
कर्णिका ने बताया कि दिल का दौरा पड़ने से पिता की मौत के बाद मां ने ही सबकुछ संभाला। मां और नानी ही उसके लिए सबकुछ हैं। मां सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक ड्यूटी पर रहती हैं। उन्हें तो अभी इसके बारे में पता तक नहीं है। मैंने कभी भी पढ़ाई सिर्फ नंबर के लिए नहीं की।  नॉलेज के लिए पढ़ाई करती हूं। सालभर रोजाना सुबह से शाम तक 3 से 4 घंटे नियमित पढ़ाई करती हूं। परीक्षा के दौरान भी इसी तरह पढ़ाई करती हूं। इससे अचानक कोई बोझ नहीं होता। इससे कुछ भूलने की घबराहट भी नहीं होती। मां और नानी ने पढ़ाई के लिए कभी भी प्रेशर नहीं डाला। मुझे पढ़ना अच्छा लगता है, क्योंकि उससे सीखने को मिलता है। अगला लक्ष्य एमपी पीएससी पास करना है। इसके लिए पीसीएम विषय से आगे की पढ़ाई करूंगी। 

कर्णिका के लिए स्कूल में एक कार्यक्रम रखा गया। इसमें उसे और उसकी नानी को बुलाया गया। मां के ड्यूटी पर होने के कारण अभी वे बेटी से नहीं मिल पाई हैं।
कर्णिका के लिए स्कूल में एक कार्यक्रम रखा गया। इसमें उसे और उसकी नानी को बुलाया गया। मां के ड्यूटी पर होने के कारण अभी वे बेटी से नहीं मिल पाई हैं।

स्कूल में किया गया कार्यक्रम
कर्णिका अपने पढ़ाई के कारण स्कूल में सबकी चहेती है। फीस नहीं भर पाने के कारण स्कूल प्रबंधन ने उसकी फीस भी माफ कर दी। इसके साथ ही ट्यूशन के पैसे भी उससे नहीं लिए गए। रिजल्ट आने के बाद स्कूल प्रबंधन ने अपनी टॉपर के लिए एक कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें मंत्री विश्वास सारंग भी पहुंचे। उन्होंने कर्णिका की कोचिंग की जिम्मेदारी ली है।

कर्णिका ने काफी मुश्किलों का सामना किया
कर्णिका के मौसा और शिक्षक अरविंद द्विवेदी ने बताया कि उसने काफी मुश्किलों का सामना किया है। पिता की मौत के बाद कर्णिका नानी के यहां रहने लगी। एक एक्सीडेंट में उसे पैर की सभी अंगुलियां गंवाना पड़ीं, लेकिन कभी हार नहीं मानी। उसकी मां स्वाती मिश्रा पहले स्कूल में पढ़ाती थीं। उन्हें बच्चों को पढ़ाना अच्छा लगता है, लेकिन पति की मौत के बाद उन पर घर की जिम्मेदारी आ गई। इसके लिए एक कंपनी में जॉब शुरू की। अभी वे ऑफिस में ही ड्यूटी पर हैं। 

राज्यभर में 15 टॉपर, इनमें 3 छात्र गुना के भी
एमपी बोर्ड के कक्षा 10वीं के रिजल्ट में राज्यभर में 15 स्टूडेंट्स ने पूरे 300 अंक हासिल किए। इनमें भोपाल की कर्णिका मिश्रा भी हैं। 3 छात्र गुना के हैं। इस बार 62.84% स्टूडेंट्स पास हुए। ये पिछले साल के रिजल्ट 61.32% से करीब 1% ज्यादा है। इस बार फिर छात्राओं ने बाजी मारी। इनमें 65.97% छात्राएं और 60.09% छात्र पास हुए। इस साल परीक्षा में 11 लाख से ज्यादा छात्र-छात्राएं शामिल हुए। कोरोना महामारी को देखते हुए इस बार बोर्ड का रिजल्ट अलग-अलग जारी किया जा रहा है। 

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