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MP में जनवरी लास्ट में कोरोना का पीक:एक्सपर्ट की चेतावनी-15-20 हजार केस रोज आएंगे; पाबंदियां नहीं बढ़ाई तो लंबी चलेगी थर्ड वेव

मध्य प्रदेश7 महीने पहले

मप्र में कोरोना की तीसरी लहर में संक्रमितों की मिलने की संख्या हर रोज बढ़ रही है। विशेषज्ञों ने दावा किया है कि मप्र में जनवरी के आखिरी वीक में कोरोना का पीक आएगा। रोज 15-20 हजार केस सामने आएंगे। पाबंदियां नहीं बढ़ाई तो तीसरी लहर लंबे समय तक चलेगी। गुरुवार को प्रदेश में कोरोना के 24 घंटे में 9385 नए केस मिले हैं। हर आठवें सैंपल में एक संक्रमित मिल रहा है। बावजूद पाबंदियां नहीं बढ़ाई गई हैं। सरकार ने सिर्फ नाइट कर्फ्यू लगाया है, लेकिन वह भी बेअसर है।
तब 4 हजार केस पर वीकेंड कर्फ्यू लगा था, अभी 10 हजार केस आने पर भी छूट
दूसरी लहर में 4 हजार केस आने पर ही वीकेंड कर्फ्यू लगा दिया था, लेकिन अब तीसरी लहर में 10 हजार केस आने पर छूट दे रखी है। एक्सपर्ट इससे हैरान हैं। वे कहते हैं कि संक्रमण की चेन को तोड़ना है तो पाबंदियां बढ़ाना पड़ेंगी। केस बढ़ना अपनी जगह है लेकिन संक्रमण दर बढ़ना चिंताजनक है। ऐसी स्थिति में हालात लंबे समय तक बिगड़े रह सकते हैं।

पॉजिटिविटी रेट 15-20% तक पहुंच जाएगी
आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर राजेश रंजन का दावा है कि मध्यप्रदेश में कोरोना का पीक 3 दिन का होगा। इस दाैरान 15 से 20 हजार तक नए केस आ सकते हैं। संक्रमण की मौजूदा रफ्तार से संकेत मिलते हैं कि यहां पॉजिटिविटी रेट अगले एक सप्ताह में 15 से 20% तक पहुंच जाएगी। मप्र में रोजाना करीब 80 हजार टेस्ट हो रहे हैं। इस हिसाब से भी अधिकतम 15 हजार केस आएंगे।

पाबंदियां नहीं बढ़ाईं, तो मार्च में नीचे आएंगे केस
प्रो. रंजन का मानना है कि सरकार ने यदि तीसरी लहर की रफ्तार को कमजोर करने के लिए पाबंदियां लगाईं और लोग गाइडलाइन का पालन करेंगे तो फरवरी के पहले सप्ताह में इसका ग्राफ नीचे आ जाएगा। अगर पाबंदियां नहीं बढ़ाई गईं, तो मार्च तक तीसरी लहर के पीक के नीचे आने की उम्मीद है।

दूसरी लहर में आए थे अधिकतम 13 हजार केस
कोरोना की दूसरी लहर में अधिकतम 13 हजार केस आए थे। इस दौरान सरकार ने पहले वीकेंड फिर पूरे सप्ताह का कर्फ्यू लगाना पड़ा था। इसके बाद ही संक्रमण की चेन टूटी थी और केस कम होना शुरू हुए थे। दूसरी लहर में एक्टिव केस अधिकतम 1 लाख 11 हजार तक पहुंच गए थे। 50 हजार केस आने के बाद पांबदियां बढ़ाई गई थीं। तीसरी लहर में 20 जनवरी को एक्टिव केस 49741 रिकॉर्ड में आए हैं।

पॉजिटिविटी रेट कंट्रोल करना जरूरी
प्रो. रंजन कहते हैं कि मप्र का डेटा देखें तो पॉजिटिविटी रेट अधिकतम 20% तक जाने की आशंका है। जो 10 हजार केस आने पर 12% पहुंच गई है। दूसरी तरह में 15 अप्रैल 10,166 को केस आने पर 21% हो गई थी। उन्होंने कहा कि पाबंदियां बढ़ाई जाएं। संक्रमण की चेन टूटती है, तो इसे 20% पर ही रोका जा सकता है। तीसरी लहर के दौरान केवल 3% मरीजों को ही अस्पताल की जरूरत पड़ेगी। ये वे मरीज होंगे, जिन्हें गंभीर बीमारी है। इस दौरान सीनियर सिटीजन को एहतियात बरतने की जरूरत है।

पीक की परिभाषा क्या है?
लगातार 15 दिन तक रिकवर होने वाले मरीज ज्यादा और नए संक्रमित कम मिलें, तो उसे पीक कहते हैं। पीक बताता है कि वायरस को अपना प्रसार करने के लिए ज्यादा लोग नहीं मिल रहे हैं। इसकी शुरुआत पॉजिटिविटी रेट गिरने या स्थिर होने से होती है।

दूसरी लहर में चरणबद्ध तरीके से लगा था कर्फ्यू
दूसरी लहर के दौरान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जिला क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप को अपने-अपने जिले में कर्फ्यू लगाने का अधिकार दिया था। जिस जिले में तेजी से संक्रमण फैला, वहां पहले कर्फ्यू लगाया गया था। प्रदेश में वीकेंड कर्फ्यू अप्रैल में लगाया था, लेकिन पूरे सप्ताह का कर्फ्यू सबसे पहले 20 मई 2021 को बुरहानपुर में लगा था। भोपाल, जबलपुर सहित 25 जिलों में 24 मई और इंदौर में 29 मई को कर्फ्यू लगाया गया था। जबकि उज्जैन, ग्वालियर सहित 19 जिलें में 31 मई को पूरी तरह से पाबंदियां लगाई गई थीं।

तीसरी लहर में चारों बड़े शहरों में तेजी से बढ़े केस
तीसरी लहर में प्रदेश के चारों बड़े शहरों में संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। सबसे ज्यादा इंदौर में एक दिन में 3 हजार से ज्यादा केस आना शुरू हो गए हैं। भोपाल में ये आंकड़ा 2 हजार के करीब पहुंचने वाला है। दोनों शहरों में 24 घंटे में क्रमश: 1 हजार व 400 केस बढ़े हैं। ग्वालियर में अब रोजना 600 व जबलपुर में 500 से ज्यादा केस मिलना शुरू हो गए हैं।

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