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जनता नहीं पार्षद ही चुनेंगे महापौर और नपाध्यक्ष:कमलनाथ जो चाहते थे, शिवराज सरकार वही करेगी; ला रही नया प्रस्ताव

भोपाल9 महीने पहलेलेखक: राजेश शर्मा

MP में नगरीय निकाय चुनाव को लेकर शिवराज सरकार एक बार फिर बैकफुट पर है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद महापौर-अध्यक्ष को सीधे जनता द्वारा चुने जाने के अध्यादेश को सरकार ने राज्यपाल के पास से वापस बुला लिया। अब नगर निगम में महापौर, नगर पालिका और नगर परिषदों के अध्यक्षों को पार्षद ही चुनेंगे। इसके लिए नगरपालिका नियम में संशोधन करने का प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। इस पर मुख्यमंत्री की सैद्धांतिक सहमति लेना बाकी है।

मंत्रालय सूत्रों ने बताया कि नगर निगम में महापौर और नगर पालिका व नगर परिषद का अध्यक्ष चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली से कराने की तैयारी है। यानी सीधे जनता से वोटिंग नहीं कराएंगे। जीते हुए पार्षद मिलकर नेता (महापौर, नपाध्यक्ष) चुनेंगे। नगरीय आवास एवं विकास विभाग ने नगर पालिका नियम में संशोधन का प्रस्ताव तैयार कर सरकार को भेज दिया है। इससे पहले शिवराज सरकार ने नगरीय निकाय चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से कराए जाने के लिए अध्यादेश तैयार कर मंजूरी के लिए राज्यपाल को भेजा था लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरकार ने इसे वापस बुला लिया। इससे संकेत मिल गए थे कि सरकार अप्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव कराना चाहती है।

सत्ता में आते ही पलटा था कमलनाथ सरकार का अध्यादेश
बता दें कि कमलनाथ सरकार ने अप्रत्यक्ष प्रणाली (पार्षदों को महापौर चुनने का अधिकार) से चुनाव कराने का निर्णय लिया था। जैसे ही, शिवराज चौथी बार सत्ता में आए, उन्होंने कमलनाथ सरकार के फैसले को अध्यादेश के जरिए पलट दिया था, लेकिन इसे विधानसभा में डेढ़ साल तक पेश नहीं किया था। इससे कमलनाथ सरकार के समय बनाई गई यह व्यवस्था आज भी प्रभावी है।

अप्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव कराने आयोग को पत्र भेज चुकी सरकार
अध्यादेश की अवधि समाप्त होने से पहले मध्यप्रदेश नगर पालिक विधि (संशोधन) विधेयक 2021 को शिवराज सरकार ने विधानसभा के बजट सत्र में पेश नहीं किया था, जबकि प्रस्तावित विधेयक को कैबिनेट से मंजूरी दे दी गई थी। पिछले साल आयोग को लिखे पत्र में सरकार ने इसका हवाला दिया था कि विधेयक को विधानसभा से मंजूरी नहीं मिलने के कारण अप्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव कराए जाएं।