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MP में कोरोना का कोहराम, देखें VIDEO:अस्पतालों में न आईसीयू बेड हैं, न ऑक्सीजन की गारंटी मिल रही; वेंटिलेटर के लिए तब तक वेटिंग जब तक सांसें न उखड़ने लगें

मध्यप्रदेश2 वर्ष पहले
शिवपुरी जिला अस्पताल में बुधवार को इलाज नहीं मिला तो सड़क पर तड़प कर मौत हो गई।

मध्यप्रदेश में कोरोना के सामने पूरा हेल्थ सिस्टम तहस-नहस हो गया है। अस्पतालों में बेड से लेकर ऑक्सीजन की मारामारी है। अगर कहीं से बेड मिल भी जा रहा है तो ऑक्सीजन नहीं है। हालत बिगड़ने पर वेंटिलेटर खाली नहीं मिल रहे हैं। बेड नहीं मिलने पर कोई अस्पताल कैंपस में तड़प रहा है तो किसी ने ऑटो में ऑक्सीजन लगा रखी है। संकटकाल में मौतें छुपा रही शिवराज सरकार के मंत्री अब बेतुके बयान भी देने लगे हैं। जनता की मदद के नाम पर जारी हुए टोल फ्री नंबर भी रस्म अदायगी बनकर रह गए।

सरकार के पास पिछली लहर के समय जो संसाधन थे, वह आज भी हैं, लेकिन दूसरी लहर में 6 गुना नए केस मिले हैं। अगर आंकड़ों की बात करें तो प्रदेश में 38 हजार कोविड मरीजों के लिए बेड उपलब्ध है। यह आंकड़ा मप्र सरकार का है। सरकार अब इसे एक लाख करने का दावा कर रही है।

24 घंटे में ही 11,045 नए केस मिले हैं। वर्तमान में एक्टिव केस 59,183 हैं। इसमें से 39, 847 केस पिछले 15 दिनों में आए हैं। यानी सरकार के पास जितने बेड हैं, एक्टिव केस ही उससे 20 हजार ज्यादा हैं। यही वजह है कि अस्पतालों में बेड नहीं है। पहली लहर के पीक पर सितंबर में 1 से 15 तारीख के बीच 367 मौतें हुई थीं, लेकिन दूसरी लहर में 1 से 15 अप्रैल के बीच 411 की जान जा चुकी है। यह पीक है या नहीं, यह भी साफ नहीं है। सरकार ने 94 कोविड केयर सेंटर खोल दिए हैं लेकिन ऑक्सीजन, वेंटिलेटर और बेड की कमी बनी हुई है।

इंदौर में कोरोना संक्रमित बुजुर्ग महिला ने ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर अपने पति के साथ 9 घंटे तक अस्पतालों के चक्कर लगाए। तब भी 50 हजार देकर भर्ती हो पाई।
इंदौर में कोरोना संक्रमित बुजुर्ग महिला ने ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर अपने पति के साथ 9 घंटे तक अस्पतालों के चक्कर लगाए। तब भी 50 हजार देकर भर्ती हो पाई।

कोरोना उपचार के लिए 37 हजार 719 बिस्तर, एक लाख करेंगे

प्रदेश में कोरोना के इलाज के लिए वर्तमान में 37 हजार 719 बिस्तर हैं। सरकार ने इन्हें बढ़ाकर एक लाख करने का दावा किया है। इनमें से 21 हजार 516 सरकारी अस्पतालों में जबकि 16 हजार 213 निजी अस्पतालों में हैं। एम्स भोपाल से 500 बिस्तरों का अनुबंध किया गया है। 165 बिस्तर आईसीयू के हैं। भोपाल में 6,361 बिस्तर हैं जिन्हें बढ़ाकर 9,822 किया जा रहा है। इंदौर में वर्तमान में 6,774 बिस्तर हैं, जिन्हें 13 हजार किया जा रहा है। जबलपुर में 3,150 बिस्तर हैं जिन्हें बढ़ाकर 5,132, उज्जैन में 1090 को बढ़ाकर 1933 किया जा रहा है। ग्वालियर में 600 बिस्तर बढ़ाए जा रहे हैं। प्रशासन अकादमी भोपाल में 150 बिस्तरों का कोविड केयर सेंटर शुरू किया जा रहा है। ऑक्सीजन के लिए ऑक्सीजन कंसंट्रेटर लगाए जा रहे हैं।

इंदौर में ऑक्सीजन लेकर घूम रहे मरीज और परिजन

इंदौर में एक सप्ताह से ऑक्सीजन की किल्लत बनी हुई है। गुरुवार को कई अस्पतालों ने मरीजों को भर्ती करने से मना कर दिया। अरबिंदो, इंडेक्स सहित शहर के सभी बड़े अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी से परेशानी आई। विजय नगर क्षेत्र के कोविड अस्पतालों से भी यही जवाब मिला कि नया मरीज भर्ती नहीं कर सकते। भर्ती मरीजों को ही जरूरी ऑक्सीजन देने में दिक्कत आ रही है। अस्पताल प्रबंधन परिजनों से ही ऑक्सीजन लाने के लिए कहा जा रहा है।

भोपाल के जेपी अस्पताल में गुरुवार को महिला की मौत के बाद परिजन हंगामा करने लगे। डॉक्टर को स्टूल से मारने की कोशिश की गई।
भोपाल के जेपी अस्पताल में गुरुवार को महिला की मौत के बाद परिजन हंगामा करने लगे। डॉक्टर को स्टूल से मारने की कोशिश की गई।

भोपाल में हालात ज्यादा खराब, 6 गुना बढ़े संक्रमित

कोरोना की दूसरी लहर से भोपाल में हालात ज्यादा खराब हैं। सरकारी आंकड़ों में सितंबर की तुलना में यहां मौतें कम दर्ज हैं, लेकिन संक्रमण की रफ्तार पहली लहर की तुलना में 6 गुना ज्यादा है। सितंबर के 15 दिनों में भोपाल में 2,788 संक्रमित मिले थे, लेकिन अप्रैल माह में अब तक 12,744 पॉजिटिव मरीज मिल चुके हैं।

इसकी वजह से अधिकतर अस्पतालों में बेड फुल हो चुके हैं। आईसीयू में जगह नहीं बची है। ऑक्सीजन रह-रहकर खत्म हो जा रही है। गुरुवार को जयप्रकाश अस्पताल में भर्ती एक महिला की मौत ऑक्सीजन न मिलने से मौत हो गई। इसके बाद परिजनों ने जमकर हंगामा मचाया। डॉक्टर को स्टूल से मारने की काेशिश भी की गई। इसके पहले भी भोपाल के अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी से मरीजों की मौत हो चुकी है।

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जबलपुर: अस्पतालों के बाहर इंतजार में मरीज

अस्पतालों में एक-एक बेड के लिए मारामारी मची हुई है। यहां 4,614 एक्टिव केस और 2,082 संदिग्ध केस हो गए हैं। शहर में सभी उपलब्ध 764 वेंटिलेटर पर मरीज हैं। इसी तरह ऑक्सीजन सपोर्ट वाले 1602 बेड लगभग फुल हैं। शहर की कुछ निजी अस्पतालों के बाहर कारों में मरीज को लेकर परिजन इंतजार में हैं। उन्हें उम्मीद है कि किसी मरीज की छुट्‌टी हो जाए तो उन्हें बेड मिल जाए। बेड की दलाली भी शुरू हो गई है।

शिवपुरी में दो मरीजों ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया

तीन दिन पहले यहां के जिला अस्पताल में भर्ती कोरोना संक्रमित शिक्षक की ऑक्सीजन मशनी वार्ड बॉय ने निकाल दी। शिक्षक की तड़प-तड़प कर मौत हो गई। उसके अगले ही दिन एक युवक को अस्पताल में भर्ती नहीं किया गया। अपने गृह जिले छिंदवाड़ा लौटते समय रास्ते में उसकी मौत हो गई।

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खंडवा में ऑक्सीजन बेड खत्म
ऑक्सीजन की कमी के बाद अब खंडवा के कोविड अस्पताल में ऑक्सीजन बेड खत्म हो गए हैं। यहां कोरोना मरीज अस्पताल के बाहर बरामदे में तड़प रहे हैं। 24 घंटे में यहां 20 मरीजों की मौत हुई है। परिजनों ने कहा कि यह अस्पताल नहीं कत्लखाना है। मामले में मेडिकल कॉलेज के डीन का कहना है कि हमारे पास वाकई में ऑक्सीजन बेड नहीं है।

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