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शहडोल में 12 मौतों का सच,17 घंटे बाद टैंकर पहुंचा:रात 11 बजे ऑक्सीजन टैंकर को पहुंचना था, दमोह में खराब हो गया और मरीजों ने दम तोड़ दिया; स्वास्थ्य मंत्री का दावा- ऑक्सीजन की कमी से नहीं गई कोई जान

भोपाल2 महीने पहलेलेखक: राजेश शर्मा
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शहडोल मेडिकल अस्पताल में ऑक्सीजन टैंकर न पहुंचने से ऑक्सीजन की कमी हो गई। इसकी वजह से शनिवार रात 12 बजे के बाद 12 संक्रमित गंभीर मरीजों ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया। शासन-प्रशासन अपनी नाकामी को छिपाने में जुट गया है। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री ने तो यह दावा भी कर दिया कि ऑक्सीजन की कमी से कोई जान नहीं गई है। मामले की सच्चाई यह है कि ऑक्सीजन टैंकर को शनिवार रात 11 बजे पहुंच जाना था, लेकिन दमोह में वह खराब हो गया। 17 घंटे बाद रविवार शाम 4 बजे ऑक्सीजन टैंकर शहडोल मेडिकल कॉलेज पहुंचा। शहडोल मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. मिलिंद शिलारकर का कहना है कि कोरोना के 62 मरीज गंभीर अवस्था में थे और रात में ऑक्सीजन का प्रेशर कम हो गया था।

सूत्रों के मुताबिक शहडोल जाते समय शनिवार को ऑक्सीजन टैंकर दमोह में खराब हो गया, लेकिन इसकी सूचना शहडोल जिला प्रशासन को देर शाम तक नहीं मिली। इस बीच ऑक्सीजन की कमी के चलते मरीजों की हालत खराब होने लगी। आनन-फानन में प्रशासन के अफसर भी अस्पताल पहुंच शुरू हो गए थे। इन मरीजों को सिलेंडर से ऑक्सीजन देने का इंतजाम शुरू किया गया, लेकिन यह व्यवस्था नाकाफी थी।

शहडोल मेडिकल कॉलेज में 17 घंटे बाद पहुंचा ऑक्सीजन टैंकर।
शहडोल मेडिकल कॉलेज में 17 घंटे बाद पहुंचा ऑक्सीजन टैंकर।

सबसे पहले रात 12:30 बजे दो मरीजों की मौत हुई। इसके बाद अस्पताल में हड़कंप मच गया। मरीजों के परिजनों को अस्पताल प्रशासन कोई जानकारी नहीं दे रहा था। रात 2 बजे के बाद मरने वालों की संख्या 6 हो गई, जबकि सुबह यह आंकड़ा 12 मरीजों की मौत के रूप में सामने आया।

इस घटना ने ऑक्सीजन सप्लाई सिस्टम की पोल खोल दी है। सरकार के सभी दावे कागजों तक ही सीमित दिखाई दे रहे हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा था कि ऑक्सीजन सप्लाई करने वाले वाहनों को एंबुलेंस का दर्जा दिया गया है। इन्हें प्लांट से रवाना होने से लेकर अस्पताल तक पहुंचाने के दौरान पुलिस का वाहन आगे रहेगा, लेकिन दमोह में टैंकर खराब होने के बाद वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई।

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जबलपुर में हो चुकी है 5 मरीजों की मौत
इससे पहले 15 अप्रैल को जबलपुर में ऑक्सीजन सप्लाई बंद होने से 5 मरीजों की मौत हो गई थी। वह भी सभी वेंटिलेटर पर थे। वहीं 4 की हालत गंभीर हो गई थी। पहली मौत वेंटिलेटर पर 82 वर्षीय महिला की हुई थी। जबकि 4 लोगों ने सुख-सागर मेडिकल कॉलेज में दम तोड़ा था। इसके बाद भी शासन-प्रशासन ने कोई ध्यान नहीं दिया।

सारंग ने कहा - ऑक्सीजन की कमी से नहीं हुई मौत
चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने कहा है कि उनकी शहडोल के मेडिकल डीन से बात हुई है। जिन मरीजों की मौत हुई है। वे गंभीर अवस्था में थे। ऑक्सीजन की कमी से किसी की मौत नहीं हुई। जरूरत होगी तो इस मामले की जांच कराएंगे।

कांग्रेस का आरोप- सरकार झूठे आंकड़े परोस रही

पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा है कि सरकार ऑक्सीजन की आपूर्ति के झूठे आंकड़े पराेस रही है। उन्होने सोशल मीडिया पर लिखा- अब शहडोल में ऑक्सीजन की कमी से मौतों की बेहद दुखद खबर। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, सागर,जबलपुर ,खंडवा और खरगोन में ऑक्सीजन की कमी से मौतें होने के बाद भी सरकार नहीं जागी। कब तक प्रदेश में ऑक्सीजन की कमी से यूं ही मौतें होती रहेंगी।

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