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किस ‘राज’ से पर्दा उठाना चाहती है CBI:बीजेपी और सत्ता में घबराहट; और ‘दिल्ली रन’, कहीं पर निगाहें, कहीं पर निशाना

मध्यप्रदेश5 महीने पहलेलेखक: राजेश शर्मा
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नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के एक ठेके को लेकर देश की नामी कंस्ट्रक्शन कंपनी दिलीप बिल्डकॉन के एक कर्मचारी को CBI ने 20 लाख रुपए की रिश्वत देने के मामले में गिरफ्तार किया था। यह मामला भले ही ठंडा होता दिख रहा है, लेकिन अंदर जांच की आग सुलग रही है। CBI जिस तरह पड़ताल कर रही है, उससे BJP और सत्ता में घबराहट दिखाई दे रही है।

BJP में इसलिए, क्योंकि एक महिला पदाधिकारी का भाई इस कंपनी में वर्षों से सीधे जुड़ा है। सत्ता में इसलिए क्योंकि दूसरा भाई सरकार में अंदर तक दखल रखता है। दोनों को CBI का नोटिस मिलने की हवा भी चल रही है। इतना ही नहीं, CBI ने मध्यप्रदेश के एक बड़े उद्योगपति के बैंक लोन के पुराने मामले को खोदकर निकालने की कवायद शुरू कर दी है। सुना है कि इस मामले में मुंबई की एक टीम ने भोपाल में आकर पूछताछ भी की है। राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारे में यह सवाल घूम रहा है कि आखिर CBI किस ‘राज’ से पर्दा उठाना चाहती है।

क्या अगड़ों की आवाज दबा रही सरकार?
पिछली कैबिनेट की बैठक में एक मंत्री ने OBC आरक्षण का मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा- पिछड़ा वर्ग को हक दिलाने के लिए सरकार का कदम अच्छा है, लेकिन इससे सवर्ण समाज को लग रहा है कि उनकी उपेक्षा की जा रही है। पता चला है कि मंत्रीजी आगे कुछ कहते, मुख्यमंत्री ने यह कहते हुए उन्हें रोक दिया कि इसको लेकर बात करने का यह सही वक्त नहीं है। बता दें कि कैबिनेट में यह मुद्दा उठाने वाले मंत्री सवर्ण हैं। ऐसा नहीं है कि वे पहली बार कैबिनेट बैठक में इस तरह से मुखर हुए। इससे पहले भी ठेकों को लेकर वे सिस्टम को कठघरे में खड़ा कर चुके हैं।

‘दिल्ली रन’, कहीं पर निगाहें, कहीं पर निशाना
गृहमंत्री डाॅ. नरोत्तम मिश्रा दिल्ली गए थे। वैसे तो वे महीने में एक-दो बार आलाकमान के दर पर जाते ही हैं, लेकिन इस बार उनका दिल्ली जाना सियासी गलियारे में चर्चा का विषय बना रहा। वजह यह थी कि वे दिल्ली तो गए, लेकिन विशेष विमान लेकर। वहां भी अपनी Z श्रेणी की सुरक्षा को छोड़कर एक निजी वाहन में घूमें। जैसे ही यह खबर भोपाल पहुंची, वही पुराने कयास कि क्या सरकार में कोई बदलाव हो रहा है? मिश्रा से जब भोपाल लौटने के बाद दिल्ली दौरे के बारे में मीडिया ने सवाल किया तो उन्होंने नो कमेंट्स कह कर पल्ला झाड़ लिया।

इससे सियासी कयासों को और बल तब मिला, जब वे PWD मंत्री गोपाल भार्गव के घर अचानक पहुंच गए। उन्होंने इसकी बाकायदा फोटो सोशल मीडिया पर शेयर की। भार्गव के घर पर फिर मीडिया का जमावड़ा लग गया। दोनों नेताओं के बीच करीब आधा घंटा बंद कमरे में बात हुई। इसके बाद वे मीडिया के दूरी बनाते हुए वहां से चले गए। इस पूरे घटनाक्रम पर BJP के एक बड़े नेता ने कहा- डाॅ. मिश्रा जो कदम उठाते हैं, उनकी कोई न कोई राजनीतिक वजह जरूर होती है। ‘दिल्ली रन’ पर वे कहते हैं- कहीं पर निगाहें, कहीं पर निशाना। मतलब, नरोत्तम जो करते हैं,उसका असर कहीं और होता है।

‘सरकार’ के खास विधायक बन गए स्वयंभू मंत्री
शिवराज कैबिनेट का तीन बार विस्तार हो चुका है, लेकिन ‘सरकार’ के खास विधायक को जगह नहीं मिल पाई। शिवराज के पिछले कार्यकाल में उनके पास भारी भरकम विभाग था। इससे ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस बार उनके मंत्री नहीं बन पाने के पीछे जरूर कोई बड़ी वजह है। हालांकि, उन्होंने रूतबा वापस मिलने की उम्मीद नहीं छोड़ी है, क्योंकि अभी भी कैबिनेट में जगह खाली है।

सुना है कि पिछले कुछ दिनों से वे बिना विभाग के मंत्री बन गए हैं। उन्होंने श्यामला हिल्स में अस्थाई दफ्तर भी बना लिया है। प्रदेश भर से यहां आने वाले लोगों से वे संवाद कर रहे हैं। इस पर एक BJP नेता की टिप्पणी- विधायकजी मंत्री नहीं बन पाए, लेकिन लगता है कि वे बिना विभाग के मंत्री बन गए हैं। उनका व्यवहार बिल्कुल वैसा ही है, जैसा अमूमन मंत्रियों का रहता है।

यह दरवाजा 11 महीने बाद खुलेगा
मंत्रालय के चौथे फ्लोर पर एक बड़े अफसर ने अपने कार्यालय के एंट्री के तीन दरवाजे हैं। इसमें सिर्फ दो खुले हैं। एक दरवाजा बंद है। जिस पर लिखा है- कृपया इसे खोलने की कोशिश न करें। उन्होंने ऐसा इसलिए किया, क्योंकि मुख्यमंत्री कार्यालय में एंट्री के तीन में से दो दरवाजे खुले हैं। एक अपर मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी ने इस पर तंज कसा- चौथी मंजिल का बंद दरवाजा 11 महीने बाद खुलने से कोई नहीं रोक सकता। ऐसा उन्होंने इसलिए कहा, क्योंकि दरवाजा बंद रखने वाले साहब इसी साल दिसंबर में रिटायर हो जाएंगे।

और अंत में: विदाई पार्टी है..जरूर आना
PWD के प्रमुख अभियंता अखिलेश अग्रवाल रिटायर हो गए हैं। ‘सरकार’ के करीबी होने के कारण उम्मीद थी कि उन्हें एक्सटेंशन या संविदा नियुक्ति मिल जाएगी। इसको लेकर विभाग में एक खास जाति-वर्ग के इंजीनियरों ने अग्रवाल के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। प्रमुख सचिव से लेकर मंत्री और मुख्यमंत्री तक कुछ ठेकेदारों और अजाक्स से शिकायत कराई गई। सुना है कि अग्रवाल ने अपनी विदाई पर एक पार्टी अरेंज की थी, जिसमें विरोधियों को आमंत्रित नहीं किया गया। अब विरोधी एक पार्टी आयोजित करने वाले हैं, जिसमें अग्रवाल के समर्थकों को छोड़कर न्योता दे रहे हैं। यह भी कहा जा रहा है- विदाई पार्टी है... जरूर आना।