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BJP में मुलाकातें, कांग्रेस भी कूदी:टीम वीडी में सिंधिया कैंप को जगह दिलाने को बंद कमरों में बैठकें; कांग्रेस का तंज- पता है किसका लॉक खुलेगा, कौन डाउन होगा

भोपाल3 महीने पहले
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अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा और गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा की मुलाकात के बाद सियासी अटकलें शुरू हो गईं। - Dainik Bhaskar
अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा और गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा की मुलाकात के बाद सियासी अटकलें शुरू हो गईं।

दमोह में मिली हार के बाद भाजपा में सियासी मेल-मुलाकातों का दौर जारी है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा और गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा की बंद कमरे में हुई बातचीत ने कांग्रेस को बोलने का मौका दे दिया, तो शर्मा की मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात ने सियासी सरगर्मी बढ़ा दी। दोनों की मुलाकात के बाद प्रदेश संगठन महामंत्री सुहास भगत और सहसंगठन महामंत्री हितानंद शर्मा भी सीएम हाउस पहुंच गए। इस बीच कांग्रेस ने कहा है कि इन मुलाकातों के पीछे क्या मकसद है, हम समझ रहे हैं। इससे किसे डाउन किया जाएगा, किसका लॉक खुलेगा, यह भी समझ आ रहा है।

यही नहीं, सीएम हाउस आने से पहले तीनों संघ कार्यालय भी गए थे। यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि अब राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) भी भाजपा की छवि को सुधारने के लिए मैदान में उतर गया है। सूत्रों की मानें, तो यह किसी बड़े फेरबदल या पार्टी में बदलाव की ओर इशारा करता है। इसे लेकर कांग्रेस ने भाजपा और शिवराज पर निशाना साधा है।

सिंधिया कैंप के लोगों को जगह दिलाने की कोशिश

बताया जाता है, दिनभर चली सियासी मुलाकात का असर प्रदेश कार्यसमिति के गठन, कोर ग्रुप, प्रदेश चुनाव संचालन समिति और अनुशासन समिति के नए नामों को लेकर हो सकता है। माना जा रहा है, सरकार एक बार फिर पार्टी की छवि सकारात्मक बनाने के लिए काम करेगी। इसके लिए आर्थिक और कृषि सुधार समेत लोगों से जुड़े मुद्दों को लेकर कुछ समितियां बनाई जाएंगी। यह समितियां राज्य सरकार के कामकाज के साथ संतुलन बिठाकर उसे नीचे तक ले जाने का काम करेंगी।

अब पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती ज्योतिरादित्य सिंधिया कैंप के लोगों को लेने पर सहमति बनाए जाने की है। मंत्री-विधायकों और चुनाव हारने वालों के साथ कांग्रेस में पदाधिकारी रहे सिंधिया खेमे के लोगों को भी भाजपा प्रदेश कार्य समिति में रखने का दबाव है। हालांकि सभी को शामिल करने की जगह कुछ प्रमुख नामों को लेकर चर्चा भी हुई है, लेकिन इसमें सिंधिया की सहमति जरूरी है।

कोरोना के बाद अब सरकार के कामकाज की चिंता

सरकार मान रही है, दूसरी लहर के बाद स्थिति काफी कुछ सुधरी है, लेकिन पार्टी के नेताओं का कहना है कि लोगों में गुस्सा है। कोरोना के कारण लोगों में आक्रोश बढ़ गया है। ऐसे में सरकार को जल्दी संगठन और सरकार में नए चेहरों के साथ काम करना होगा। जनता से जुड़े मुद्दों पर जल्द निर्णय लेकर उसे आम लोगों तक पहुंचाना होगा।

कांग्रेस का तंज- सब ठीक नहीं

भाजपा नेताओं की बंद कमरे में बैठक को लेकर कांग्रेस ने भी तंज कसा है। भाजपा नेता कह रहे हैं कि लॉकडाउन खुला है। इसलिए सभी एक दूसरे से मिल रहे हैं। महज मुलाकात थी और कुछ नही। अब सभी को पता है कि किसका लॉक खुलने के लिए और किस को डाउन करने के लिए बगैर मास्क के यह मुलाकात हो रही है। बेचारे भाजपा के ये सभी कद्दावर नेता लॉक डाउन में कितने असहाय थे कि एक दूसरे से मिल भी नहीं पा रहे थे।

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