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MP पंचायत चुनाव दिसंबर में होने की उम्मीद:एक्शन में राज्य निर्वाचन आयोग; कलेक्टरों से 3 दिन में मांगी परिसीमन की पुरानी स्थिति की रिपोर्ट

6 महीने पहले
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मध्य प्रदेश में पंचायत चुनाव परिसीमन की पुरानी स्थिति के हिसाब से ही कराए जाएंगे। इसके साथ ही पंचायतों का आरक्षण भी 2019 से पहले की स्थिति के हिसाब से माना जाएगा। राज्य निर्वाचन आयुक्त बसंत प्रताप सिंह ने सोमवार देर शाम कलेक्टरों से 3 दिन में परिसीमन की पुरानी स्थिति की रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए हैं। ऐसा माना जा रहा है कि पंचायत चुनाव का ऐलान अब दिसंबर में होगा। जबकि आयोग ने नवंबर के अंतिम सप्ताह में अधिसूचना जारी करने की तैयारी कर ली थी।

आयोग के सूत्रों का कहना है कि पंचायत चुनाव की मैदानी तैयारी पूरी हो चुकी थी। इसको लेकर जल्दी ही अधूसूचना भी जारी होने वाली थी, लेकिन राज्य सरकार ने ऐसी पंचायतों के परिसीमन को निरस्त कर दिया, जहां बीते एक साल से चुनाव नहीं हुए हैं। ऐसी सभी जिला, जनपद या ग्राम पंचायतों में पुरानी व्यवस्था ही लागू रहेगी। जो पद, जिस वर्ग के लिए आरक्षित है, वही रहेगा। इसके लिए सरकार ने मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज (संशोधन) अध्यादेश-2021 लागू कर दिया है। इसकी अधिसूचना रविवार देर शाम जारी की गई।

अधिसूचना जारी होने के बाद पंचायत विभाग और राज्य निर्वाचन आयोग में सोमवार को दिन भर बैठकों का दौर जारी रहा। इसके बाद राज्य निर्वाचन आयुक्त ने कलेक्टरों के साथ बैठक की। आयुक्त सिंह ने सोमवार शाम को कलेक्टरों के साथ वीडियो कांफ्रेंस करके पुरानी स्थिति के हिसाब से तैयारी करने के निर्देश दिए। साथ ही सभी जिलों से दो दिन में पूर्व की स्थिति और 2019-20 में किए गए परिसीमन का मिलान करके जिन क्षेत्रों की सीमा में परिवर्तन हुआ है, उसकी जानकारी तीन दिन में भेजने के लिए कहा है।

बैठक में राज्य निर्वाचन आयुक्त ने सभी अधिकारियों को अध्यादेश के प्रभाव के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अब पुरानी व्यवस्था रहेगी। आरक्षण की व्यवस्था भी पूर्ववत बनी रहेगी। ऐसी ग्राम, जनपद या जिला पंचायत क्षेत्रों पर इस अध्यादेश का प्रभाव नहीं पड़ेगा, जो संबंधित पंचायत के अंतिम निर्वाचन के बाद किसी नगरीय क्षेत्र में शामिल हो गए हैं। जिला स्तर पर विकासखंड को इकाई मानते हुए जानकारी तैयार करें।

मतदाता सूची में करना पड़ेगा सुधार
आयोग के सूत्रों का कहना है कि 2019 के बाद हुए परिसीमन को मद्देनजर रखते हुए पंचायत चुनाव के लिए मतदाता सूची तैयार कराई गई थी। नई व्यवस्था के हिसाब से अब फिर मतदाता सूची को सुधारना पड़ेगा। इसमें पुरानी व्यवस्था के हिसाब से मतदाताओं के नाम और मतदान केंद्रों का निर्धारण होगा। आयोग को अपने साफ्टवेयर में भी दर्ज जानकारियों में संशोधन कराना होगा।

कांग्रेस ने कहा- अध्यादेश को कोर्ट में चुनौती देंगे
राज्य सरकार द्वारा जारी अध्यादेश को लेकर कांग्रेस का रुख पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है, लेकिन पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस विधायक पीसी शर्मा ने कहा कि सरकार कानून और नियमों को दरकिनार कर चुनाव कराना चाहती है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज (संशोधन) अध्यादेश-2021 को कोर्ट में चुनौती दी जाएगी।

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