पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Local
  • Mp
  • Test First's Formula Quickly Overcomes Second Wave; 1 Crore Sample Test In 440 Days, Testing Increased From 20 Thousand To 70 Thousand, Then Corona Came Under Control In Mp

भास्कर एनालिसिस:टेस्ट फर्स्ट के फॉर्मूले से MP में एक महीने में ही काबू में आ गई सेकेंड लहर; दोनाें लहर का सबक- टेस्ट घटाते ही घातक होगा कोरोना

मध्यप्रदेश3 महीने पहलेलेखक: राजेश शर्मा
  • कॉपी लिंक

काेरोना संक्रमण की दूसरी लहर के कातिलाना कहर से मध्यप्रदेश एक महीने में ही बाहर आने लगा है। अप्रैल-मई के बीच अस्पताल से लेकर श्मशान तक छोटे पड़ गए.. लोगों ने आंखों के सामने ऑक्सीजन के लिए सांसें उखड़ते देखीं। अब तस्वीर तेजी से बदल रही है। टेस्ट की संख्या 1 करोड़ पार कर गई है। इसमें 40% कोरोना टेस्ट पिछले ढाई महीने में ही हुए हैं। आखिरी के 10 लाख टेस्ट तो 13 दिन में ही करा दिए गए। मरीज को तत्काल ट्रेस करने के लिए एंटीजन टेस्ट पर जोर रहा ताकि RTPCR रिपोर्ट आने तक वेट ना करना पड़े।

दैनिक भास्कर की पड़ताल में आया कि इतनी भयावह स्थिति से तेजी से बाहर निकलने की बड़ी वजह टेस्टिंग फर्स्ट का फॉर्मूला ही बना। पहली और दूसरी दोनों लहरें यह सबक दे गई है कि टेस्ट घटेगी तो कोरोना बढ़ेगा ही..! तब अगस्त तक में रफ्तार नहीं बढ़ाई तो सितंबर में हालात बेकाबू हो गए। इस बार फरवरी मार्च में क्षमता से कम टेस्ट किए तो अप्रैल में हालत बिगड़ गए।

इसे ऐसे समझिए..

पहली लहर : कम टेस्टिंग के कारण 5 महीने लगे काबू पाने में

  • कोरोना की एंट्री मार्च 2020 में हो गई। प्रदेश से लेकर जिले तक के अफसर संक्रमण दर कम बताने के चक्कर में टेस्टिंग से बचते रहे।
  • पहले एक लाख टेस्ट करने में ही 60 दिन लगाए। यानी एक दिन में सिर्फ 1 हजार 666 टेस्ट।
  • 1 से 10 लाख टेस्ट पहुंचने में 149 दिन (18 मार्च से 14 अगस्त ) लगा दिए। नतीजा पहली लहर में सितंबर-अक्टूबर में कोरोना ने कहर ढाया। सर्वाधिक केस और मौतें इन्हीं महीनों में हुई थीं।
  • सरकार ने जांचें बढ़ाकर तीन गुना की तब जाकर चार से पांच महीने में जनवरी में संक्रमण काबू में पाया।

दूसरी लहर : टेस्टिंग बढ़ाने पर एक महीने में काबू आ गई

  • दूसरी लहर की भी वजह कम टेस्टिंग रही। जैसे ही जनवरी 2021 में केस घटे तो सरकार ने पहले की तरह टेस्टिंग घटा दी।
  • यह कोरोनाकाल में टेस्टिंग दूसरी सबसे धीमी रफ्तार थी जब 58 दिन में 10 लाख टेस्ट ही किए गए। नतीजा मार्च 2021 में हालात फिर बिगड़े और अप्रैल में कोरोना की दूसरी लहर से सितम ढा दिया।
  • सरकार जागी और फौरन टेस्टिंग बढ़ा दी। 20 हजार से बढ़ाकर टेस्टिंग 70 हजार तक ले गई। नतीजा- एक महीने में ही दूसरी लहर काबू आ गई। आखिरी के 10 लाख टेस्ट महज 13 दिन में किए गए।
खबरें और भी हैं...