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बदनाम को मिला मंत्री का साथ:मंत्री ने दागी अफसर को बनाया अपना सलाहकार, प्रमुख सचिव का निगम मुख्यालय में बन रहा आलीशान आफिस

भोपालएक महीने पहलेलेखक: राजेश शर्मा
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एक मंत्री ने एक ऐसे अफसर को अपना सलाहकार बना लिया है, जो भ्रष्टाचार करने के मामले में कभी विभाग में बदनाम था। रिटायरमेंट के पहले 5 साल में उनके खिलाफ कई शिकायतों पर लोकायुक्त में जांच शुरू हुई थी। उस समय के प्रमुख सचिव (अब अपर मुख्य सचिव ) ने उन्हें आड़े हाथों लिया था, तो इस अफसर ने ‘श्यामला हिल्स’ का करीबी होने का डर दिखाने की कोशिश भी की थी। विभाग के पीएस और इस अफसर के बीच लंबे समय तक ठनी रही, लेकिन पीएस ने विभागीय जांच कर उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के कई मामले तैयार कर लोकायुक्त को भेज दिए थे। अब मंत्री के सलाहकार बनने पर मंत्रालय में चर्चा है कि ‘सरकार’ मंत्रियों को हिदायत दे चुके हैं कि अपने स्टाफ से बच कर रहे, लेकिन मंत्रीजी पर इसका कोई असर नहीं।

एमडी की देखा-देखी, पीएस भी बनवा रहे आफिस
एक निगम सरकार के सामने सब्सिडी का रोना जब चाहे रोता रहता है। सरकार ने हाल ही में इस विभाग को सब्सिडी की राशि ट्रांसफर कर दी। अब विभाग के प्रमुख सचिव निगम मुख्यालय में अपना आलीशान दफ्तर बनवा रहे हैं, जबकि उनका मंत्रालय में चैंबर है। महकमे में चर्चा है कि पीएस, निगम के एमडी की देखा-देखी कर अपने आप का कमतर साबित नहीं करना चाहते हैं।

दरअसल, एमडी के चैंबर में हाल ही में 20 लाख रुपए खर्च हुए। इससे पहले विभाग में पीएस थे, जब वे निगम मुख्यालय जाते थे तो वे चीफ इंजीनियर के कक्ष में बैठते थे। यहीं बैठक भी करते थे, लेकिन अब पीएस के लिए चैंबर बनाने का काम तेज गति से चल रहा है।

शाबाशी के हकदार मंत्री नहीं, कलेक्टर-SP
उपचुनाव में कुछ मंत्रियों ने रात-दिन एक कर पार्टी को जिताने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी, लेकिन उन्हें इसका क्रेडिड नहीं मिल पा रहा है। इतना ही नहीं, दो मंत्री तो ऐसे हैं जिन्होंने हार को जीत में बदलने के लिए आउट ऑफ वे जाकर काम किया, लेकिन ‘सरकार’ की नजर में शाबाशी के हकदार कलेक्टर-एसपी बने हुए हैं। सुना है कि ‘सरकार’ के करीबी ने दोनों मैदानी अफसरों की जमकर मार्केटिंग कर दी है। इस पर एक नेता ने कहावत से टिप्पणी की- मेहनत करे मुर्गा, अंडा खाए फकीर… बहरहाल, मामला संगठन तक पहुंच गया है।

पीएस-कमिश्नर में खींचतान
सरकार को राजस्व देने वाले एक विभाग में प्रमुख सचिव और कमिश्नर के बीच जमकर खींचतान चल रही है। कमिश्नर उन्हें हटवाकर खुद पीएस की कुर्सी चाहते हैं। दरअसल, कमिश्नर 1996 बैच के आईएएस अफसर हैं और वे प्रमुख सचिव पद पर प्रमोशन पा चुके हैं, लेकिन सरकार ने उन्हें कमिश्नर की ही जिम्मेदारी दे रखी है। अब वे चाहते हैं कि इसी विभाग में प्रमख सचिव बन जाएं। इसके लिए उन्होंने घोड़े दौड़ाना शुरू कर दिया है। प्रमुख सचिव का परफॉर्मेंस ‘सरकार’ की नजरों में बेहतर है। राजस्व बढ़ाने के लिए बैठकों में वे मैदानी अफसरों से उनका सीधे संवाद भी कमिश्नर को खलने लगा है। बता दें कि प्रमुख सचिव सीएम कार्यालय पकड़ मजबूत हैं।

सरकार के 'खास' अफसर का करीबी खरीद रहा जमीनें
सुना है कि सरकार के खास अफसरों में से एक का करीबी भोपाल के आसपास जमीनें खरीद रहा है। वैसे तो उनका ग्वालियर-चंबल से सीधा नाता है, लेकिन वे अपना जमीनी कारोबार भोपाल के आसपास फैला रहे हैं। अंदरखाने से खबर निकल कर आई है कि भोपाल के आसपास जमीनें खरीदने की वजह यह है कि सरकार के खास अफसर जब रिटायर होंगे तो वे राजधानी में ही बसने की प्लानिंग कर चुके हैं। वे पोस्ट रिटायरमेंट अपना प्लान एक साल पहले से कर रहे हैं।

अंत में….

तैयार हो रहा मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड
उपचुनाव के बाद अब मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड संगठन तैयार कर रहा है। खंडवा लोकसभा और तीन विधानसभा सीटों पर सरकार के लगभग सभी मंत्रियों को अलग-अलग जिम्मेदारी सौंपी गई थी। अब संगठन बूथ से लेकर विधानसभा वार कितने वोट मिले। इसमें मंत्रियों की भूमिका कितनी है? सुना है कि मुख्यमंत्री अगले दो माह में मंत्रिमंडल विस्तार करने की योजना बना रहे हैं। जिसमें कुछ मंत्रियों का विभाग बदला जा सकता है। इसमें विभाग के परफॉर्मेंस के साथ चुनावी रिपोर्ट कार्ड के नंबर भी देखे जाएंगे।

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