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खंडवा में भंवरा कौन:जिसने फूल खिलाया और ले गया राजकुंवर; MLA ने मंत्री को 'जीजाजी' कहकर दिलवा दिया मुआवजा

भोपाल9 महीने पहलेलेखक: राजेश शर्मा
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खंडवा लोकसभा सीट पर उप चुनाव में प्रत्याशियों से ज्यादा प्रचार करने वालों की चर्चा है। चुनाव न लड़ पाने का दर्द फिल्मी गाने से सामने आ रहा है। चुनाव लड़ने के लिए अरुण यादव पिछले 6 माह से जमीन तैयार कर रहे थे, लेकिन एन वक्त पर कांग्रेस की अंदरूनी उठापटक के चलते उन्होंने बैकफुट पर आने में ही अपनी भलाई समझी। अब वे पार्टी उम्मीदवार के लिए प्रचार कर रहे हैं। इस दौरान वे विपक्ष पर हमले कम, अपनी पार्टी के नेताओं पर इशारों में तंज जरूर कसने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं। पहले उन्होंने सोशल मीडिया पर शेर-शायरी के माध्यम से अपनी पीड़ा को बयां किया।

अब सभाओं में बता रहे हैं कि हाईकमान की नजरों में उनका कद एमपी के नेताओं की तुलना में कितना ऊंचा है और उनके बराबर किसी नेता ने त्याग नहीं किया। उन्होंने एक सभा में कहा- मुझे पार्टी जो निर्देश देती है, वो करता हूं। हर बार फसल मैं उगाता हूं, लेकिन किसी को दे देता हूं। 2018 में भी ऐसा हुआ था। आलाकमान ने कहा है कि आप की फसल किसी और को दे दूं तो मैंने कहा दे दो, फिर उगा लेंगे, जो पार्टी कहती है मैं वही करता हूं। बहरहाल, यादव चुनावी अखाड़े में नहीं उतर पाए। इस पर एक नेता ने यादव की स्थिति को 1982 में आई ऋषि कपूर की फिल्म प्रेम रोग के एक गाने के मुखड़े से की- भंवरे ने खिलाया फूल, फूल को ले गया राजकुंवर…

इलाके में सिर्फ दो ही फोटो, मंत्रीजी के साथ मोदी.. और कोई नहीं
शिवराज सरकार में एक मंत्री के इलाके में उनके अधिकतर समर्थकों के घरों में दो फोटो दिखाई दे रही हैं। एक मंत्रीजी की और दूसरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की। मंत्री जी यह दिखाने में लगे हैं कि वह प्रधानमंत्री के अलावा किसी और को तवज्जो ही नहीं देते, इसलिए पूरे पिक्चर से सरकार के मुखिया ही गायब हैं। जासूसों ने देखा कि यहां 'सरकार' तो कहीं दिखाई नहीं दे रहे हैं। फिर क्या था, खबर पहुंचाई गई। बताने का अंदाज भी कुछ इस तरह था, ताकि सरकार नाराज हो जाएं। जासूस ने सरकार तक खबर यह पहुंचाई- जिस तरह से हवा चल रही है, उसका असर यह है कि आप पिक्चर से गायब किए जा रहे हो। यह बात मंत्रीजी के कानों तक भी पहुंच गई। अब मंत्रीजी सफाई देने का अच्छा मौका तलाश रहे हैं।

पहली बार देखा मुख्य सचिव ऐसा रूप
हुआ यह कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कलेक्टरों से रिपोर्ट कार्ड तैयार करने के लिए बैठक ले रहे थेl इस दौरान सभी कलेक्टर अपने कामकाज का प्रेजेंटेशन कर रहे थेl मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बीच-बीच में जरूर कलेक्टरों को शाबाशी भी दे रहे थे और कमजोर परफॉर्मेंस पर नसीहत भी दे रहे थेl इन बैठकों में जब मुख्यमंत्री शामिल होते हैं तो मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस बहुत ही सामान्य तरीके से बात करते हैं, लेकिन इस बैठक में जब रीवा संभाग के एक जिले के कलेक्टर प्रेजेंटेशन कर रहे थे तब मुख्य सचिव ने उन्हें जमकर फटकार लगा दीl उनके इस रूप को देखकर अफसर हदप्रभ हो गएl मुख्य सचिव लगातार कलेक्टर को डांटते रहे तब बैठक में मौजूद सीनियर एक अफसर ने हस्तक्षेप कर बात को डायवर्ट कियाl इस बैठक में मौजूद एक अफसर ने बताया कि मुख्यमंत्री भी मुख्य सचिव के इस रूप को देखकर शायद आश्चर्यचकित हो गए थेl

'निक्कर' पर अकेले पड़ गए मुखिया
आजकल प्रदेश में निक्कर की एंट्री दिलचस्प हो गई है। पहने जाना वाला निक्कर की हर तरफ चर्चा है। कमलनाथ के 'निक्कर' वाले बयान ने सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियां बटोरी। यह बयान तो बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा के संदर्भ में दिया था, लेकिन उन्होंने इसे अपने मातृ संगठन आरएसएस की गणवेश से जोड़ दिया। वह आगे बढ़कर मैदान में कूद पड़े। ट्वीटर पर ट्रेंड हुआ- हां, हम निक्करधारी... शायद मंशा रही होगी कि इससे पार्टी और सरकार विपक्ष पर टूट पड़ेगी। नेता-मंत्री, कार्यकर्ता मैं भी चौकीदार.. की तरह ट्वीटर पर अपने पद के बजाय लिखेंगे- हां, हम निक्करधारी... लेकिन ऐसा हो न सका। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और कैलाश विजयवर्गीय जैसे बड़े नेता तो इस पर बयान बहुत देर से दिया, जब मामला ठंडा हो गया। बाकी कोई आगे नहीं आया। फिर क्या था, मामला शांत होने लगा।

अंत में...

जीजाजी, मोबाइल का स्पीकर ऑन है...
बीएसपी विधायक रामबाई ने सुर्खियों में रहने का फंडा सीख लिया है। मंत्रियों से काम कैसे कराए जाते हैं, इसके लिए रामबाई की कार्यशैली का अनुसरण किया जा सकता है। तत्कालीन कमलनाथ सरकार हो या फिर मौजूदा शिव का राज, रामबाई का कोई काम नहीं रुका। हाल ही में पथरिया में एक परिवार के तीन बच्चों की हादसे में मौत हो गई थी। गुस्साए लोगों ने चकाजाम कर दिया। फिर क्या था, मौके पर पहुंच गईं रामबाई... वहीं से एक मंत्री को फोन लगाया। कॉल रिसीव कर मंत्रीजी कुछ कहते, उससे पहले ही उन्होंने कहा- जीजाजी स्पीकार ऑन है। आपको सब सुन रहे हैं, एक्सीडेंट में बच्चों की मौत हो गई है। ट्रैफिक जाम है,आप तो मुआवजे की घोषणा कर दो। मंत्री ने बिना कुछ सोचे, मुआवजे का ऐलान कर दिया। मंत्रीजी को बाद में समझ में आया कि आर्थिक सहायता करने का क्रेडिट तो रामबाई को मिलेगा।

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