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'शिव' का खेल बिगाड़ने की पटकथा:स्टाफ ने लेन-देन की बात कर मंत्रीजी को संकट में डाला, कड़क मिजाज वाले अफसर बिना ढोल-नगाड़े के घर बैठ गए

भोपालएक वर्ष पहलेलेखक: राजेश शर्मा
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प्रदेश की 4 सीटों पर होने वाले उपचुनाव को बीजेपी और कांग्रेस 2023 के विधानसभा का सेमीफाइनल मान कर मैदान में है। यही वजह है कि इस चुनाव में शिवराज और कमलनाथ की प्रतिष्ठा भी दांव पर है, लेकिन दोनों नेताओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती है गृह क्लेश। दोनों पार्टियों की आपस में तुलना करें तो बीजेपी में ज्यादा, कांग्रेस में थोड़ा कम। कांग्रेस में सब सार्वजनिक है, लेकिन बीजेपी में पर्दे के पीछे से खेल बिगाड़ने की पटकथा लिखी जा रही है। खंडवा लोकसभा सीट पर केंद्रीय नेतृत्व की रुचि ज्यादा है, इसलिए सरकार-संगठन दोनों ताकत झोंक रहे हैं। बीजेपी के अंदरखाने में चर्चा है कि इस सीट पर दो पूर्व मंत्रियों ने सरकार को सबक सिखाने की ठान ली है। दरअसल, दोनों ही अपने आप को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद थी कि पार्टी उन्हें मौका देगी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया तो शीतयुद्ध के लिए दोनों ने हाथ मिला लिया। अब देखना है कि पार्टी इनके कथित षडयंत्र को कैसे भेदेगी?

गिफ्ट देने दिल्ली गए थे मंत्रीजी
इन दिनों सरकार के कामकाज पर संगठन की पैनी नजर है। केंद्रीय नेतृत्व और संघ ने कई दूतों को भोपाल में स्थाई पड़ाव भी डलवा दिया है। ऐसे में मंत्रियों को इनके दरबार में हाजिरी लगाना पड़ रही है। वजह यह है कि इन दूतों ने मंत्रियों के यहां अपने जासूस भी छोड़ दिए हैं। सुना है कि एक मंत्री के स्टाफ ने ट्रांसफर के लिए संघ के किसी पदाधिकारी से लेन-देन की बात कर ली थी। इसके बाद इस मंत्री को तलब किया गया। करीब दो घंटे तक सवाल-जवाब हुए। अब पता चला है कि यह मंत्री हाल ही में दिल्ली गए थे। मंत्रीजी ने दिल्ली का कार्यक्रम उस समय बनाया, जब उनसे सवाल-जवाब करने वाले नेताजी भी दिल्ली में थे। मंत्रीजी ने उनके निवास पर जाकर मुलाकात की और एक गिफ्ट भी दिया। इसमें क्या था, यह फिलहाल राज ही है।

बड़े बे-आबरू होकर तेरे कूचे से निकले
मुख्य सचिव रैंक के एक सीनियर आईएएस अफसर हाल ही में रिटायर हो गए। ऐसा दूसरी बार हुआ जब मंत्रालय में अफसर की विदाई नहीं हुई यानी फेयरवेल पार्टी नहीं हुई। वजह यह है कि इस अफसर के पास पिछले 7 महीने से कोई काम नहीं था। वे बतौर ओएसडी रहे, जबकि इनका सरकार में इतना जलवा रहा कि 2018 में मुख्य सचिव बसंत प्रताप सिंह के रिटायर होने के बाद इस कुर्सी पर इनके ही काबिज होने का अनुमान था, लेकिन ऐसा हो ना सका। इनकी कड़क मिजाजी के कारण नेता भी इनसे बात करने के पहले सोचते थे, लेकिन नौकरी का अंतिम पड़ाव ऐसा हो, यह किसी को अंदाजा नहीं था। इसकी मंत्रालय में चर्चा है। एक अधिकारी ने कहा- बड़े बे-आबरू होकर तेरे कूचे से निकले। इससे पहले भी इसी साल अप्रैल में एक आईएएस अफसर भी बिना शोर-शराबे के मंत्रालय से विदा हो गए थे। हालांकि उनकी विदाई इसलिए नहीं हो पाई थी, क्योंकि उस समय कोरोना की दूसरी लहर थी।

उमा भारती की आड़ में अफसर ने 'सरकार' को घेरा
आबकारी विभाग में एक अफसर को लूप लाइन में डाल दिया गया है। एक समय ऐसा था, जब इस अफसर की पूरे प्रदेश में खासकर सरकार में तूती बोलती थी। बीच में 15 महीने की कमलनाथ सरकार में भी इस अफसर को दो मंत्रियों का साथ मिल गया था। अब यह अफसर मेन स्ट्रीम में आने के लिए छटपटा रहा है। उच्च राजनीतिक संपर्कों के बावजूद 'सरकार' के फैसले के खिलाफ कोई उसकी मदद नहीं कर रहा है। अब उसने उमा भारती की आड़ लेकर 'सरकार' की छवि बिगाड़ने का खेल शुरू कर दिया है। दरअसल, उमा शराब बंदी को लेकर हमलावर है। सुना है कि इस अफसर ने शराब से अवैध कमाई का पूरा चिठ्‌ठा उमा भारती तक पहुंचा दिया है। यह जानकारी भी विभाग के अफसरों ने 'सरकार' तक पहुंचा दी है। अब देखना है कि इस अफसर का अंजामे गुलिस्ता क्या होगा? बता दें कि यह अफसर इंदौर पोस्टिंग के दौरान बहुत चर्चित रहे हैं।

चेहरे का रंग ही काला हो तब क्या करोगे?
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इन दिनों जनदर्शन यात्रा कर रहे हैं। इस दौरान वे केवल जनता की सुन रहे हैं। खासकर उपचुनाव वाले क्षेत्र में। शिकायत मिलने पर स्पॉट एक्शन। यानी अधिकारी-कर्मचारी 'सरकार' के निशाने पर। सरकार की इस यात्रा का बीजेपी को चुनाव में कितना फायदा मिलेगा, यह 2 नवंबर (उपचुनाव परिणाम) को पता चलेगा। लेकिन शासन-प्रशासन बिल्कुल नहीं चाहता कि चुनावी माहौल में कोई राजनीतिक विरोधी जनता के बीच 'सरकार' की खिलाफत करे। इसको लेकर पुलिस महकमा ज्यादा संजीदा है। सुना है कि पुलिस मुख्यालय से आदेश गया है कि जनदर्शन में काले कपड़े (कमर के ऊपरी हिस्से में) पहने किसी भी व्यक्ति को एंट्री न दी जाए। भले ही वह सत्ताधारी पार्टी का कोई नेता-कार्यकर्ता ही क्यों न हो।

इस आदेश के बाद पुलिस कोई रिस्क नहीं ले रही है। सतना और टीकमगढ़ में ऐसा हो चुका है। काली शर्ट, कुर्ता यहां तक कि काला मास्क तक प्रतिबंधित कर दिया गया है। टीकमगढ़ में ऐसा ही एक वाक्या हुआ। काली शर्ट पहले एक कार्यकर्ता को कार्यक्रम में जाने नहीं दिया। उसे दूसरी शर्ट पहनकर आना पड़ा। तब उसने पुलिस वाले से कहा-चेहरे का रंग ही काला होगा तो क्या करोगे?

...और अंत में

बीजेपी विधायक के गुरुजी गए जेल
प्रयागराज में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध मौत के मामले में पुलिस ने उनके शिष्य आनंद गिरि को गिरफ्तार किया है। आनंद गिरि का मध्य प्रदेश के मालवा इलाके से कनेक्शन रहा है। बीजेपी की एक महिला विधायक ने आनंद गिरि से दीक्षा भी ली है। अब इस विधायक को पार्टी के नेता किसी न किसी बहाने फोन कर आनंद गिरि के बारे में पूछ रहे हैं। हालांकि वे कोई सफाई तो नहीं दे रही है, लेकिन इतना जरूर कह रही हैं कि जैसी करनी-वैसी भरनी।

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