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  • The Tigress Attacked In Bandhavgarh, The Victim Said Eyes Were Closed For A Moment After Seeing Death, Buffaloes Came And Saved Their Lives

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बाघिन के जबड़े से मालिक को बचा लाईं भैंसे:​​​​​​​बांधवगढ़ में बाघिन ने किया हमला, पीड़ित बोला- एक पल के लिए सामने मौत देख कर बंद हो गई थीं आंखें, भैंसों ने आकर बचा ली जान

उमरिया15 दिन पहले
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मध्य प्रदेश के उमरिया में मौत के मुंह से अपने मालिक को भैंसे बचा लाईं। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व पार्क में भैंसों को पानी पिलाकर लौट रहे युवक पर बाघिन ने हमला कर दिया। चेहरे, गर्दन पर बाघिन के हमले से खून की धार निकल पड़ी। युवक को बाघिन अपने मुंह में दबा कर ले जाने लगी तो बीच में उसकी भैंसे खड़ी हो गईं। 5 से 6 की संख्या में भैंसों ने बाघिन को घेर लिया। उनकी आवाज सुनकर बाघिन लौट गई। युवक को मानपुर सामुदायिक स्वास्थ्य में भर्ती कराया गया है। उसके चेहरे पर दो टांके लगे हैं। कंधे पर नाखून के गहरे निशान हैं। घटना बांधवगढ़ रिजर्व पार्क के पनपथा कोर रेंज के चुंसरा बीट आरएफ 446 में सोमवार को दोपहर करीब 3:30 बजे की है।

पनपथा रेंज के रेंजर पराग सेनानी ने बताया कि उमरिया के कोठिया गांव निवासी लल्लू यादव पुत्र रामकिशोर यादव (26) किसान हैं। उनके पास कुछ मवेशी भी हैं। कोठिया गांव से लगे पनपथा कोर के जंगल में इस समय एक बाघिन ने भी डेरा डाला है। लल्लू रोजाना मवेशियों को चराने यहां आया करता था। सोमवार की दोपहर वह मवेशियों को पानी पिलाकर घर लौट रहा था। इस दौरान झाड़ियों में छिपी बाघिन ने उस पर हमला कर दिया। लल्लू को वन विभाग के वाहन से मानपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचाया गया। वहां उसका इलाज चल रहा है। मुंह में दो जगह टांके लगे हैं। कंधे में भी चोट आई है। डॉक्टरों ने जांच कर युवक की स्थिति को ​​​​​खतरे से बाहर बताया।

पीड़ित की दास्तां- एक पल के लिए लगा जान गई
दोपहर के करीब 3.30 बजे होंगे। मैं भैंसों को सौसर (वाटर होल) में पानी पिलाकर लौट रहा था। अचानक पीछे से बाघिन ने झपट्टा मारा। मेरे शरीर से खून की धार निकल पड़ी। बाघिन का पंजा मुंह के पास गाल व कंधे में लगा था। मैं जमीन पर गिर पड़ा। बाघिन गर्दन में पंजा मारकर मुझे मुंह में दबाने की कोशिश कर थी। एक पल के लिए लगा मेरी मौत सामने है। इसी दौरान मेरी भैंसे तेज आवाज करते हुए बीच में आ गईं। करीब 10 मिनट भैंसे और बाघिन आमने-सामने थीं, बाद में बाघिन मुझे छोड़कर चली गई।

कभी बाघ की आहट नहीं मिली थी
लल्लू ने बताया कि इसके पहले भी वह मवेशी लेकर कोठिया के इस कच्चे मार्ग से आ चुका था। कभी भी बाघ की आहट नहीं मिली। अगर ऐसा होता तो वह अपनी और मवेशियों की जान खतरे में नहीं डालता। लल्लू ने कहा कि एक पल के लिए उसने मौत स्वीकार कर ली, लेकिन उसकी भैंसों ने उसे नया जीवनदान दे दिया।

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