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भोपाल ने ही झेली दुनिया की सबसे बड़ी त्रासदी:37 साल पुरानी ‘भोपाल गैस त्रासदी’ से बड़ी कोई विपदा नहीं, गूगल भी यही बता रहा

भोपाल6 महीने पहलेलेखक: ईश्वर सिंह परमार

भोपाल गैस त्रासदी। ठीक 37 साल पहले। 2-3 दिसंबर 1984 की वो रात। आज की पीढ़ी ने उस भयानक रात के बारे में सिर्फ सुना या तस्वीरों में देखा होगा। यकीन मानिए कि वह रात दुनिया सबसे खौफनाक रातों में से एक है। गूगल सर्च इंजिन भी मानता है कि दुनिया में उससे पहले और उसके बाद आज तक ऐसा कोई भी इंडस्ट्रियल डिजास्टर नहीं है, जो भोपाल गैस त्रासदी के दुख-दर्द और नुकसान के बराबर हो।

इस घटना को करीब से देखने वाले और कवर करने वाले बताते हैं कि लाशें ही लाशें थीं, जिन्हें ढोने के लिए गाड़ियां कम पड़ गईं। चीखें इतनी कि लोगों को आपस में बातें करना मुश्किल हो रहा था। धुंध इतनी कि पहचानना ही चैलेंज था उस रात।

दैनिक भास्कर टीम ने आज के युवाओं को इस त्रासदी की भयावहता बताने के लिए यह कोशिश की है। इसके लिए 15 से ज्यादा तरीकों से सर्च इंजन गूगल पर दुनिया की सबसे बड़ी त्रासदी खोजने की कोशिश की, ताकि उससे भोपाल की घटना की तुलना की जा सके।

तमाम कोशिशों में हर बार गूगल रिजल्ट में भोपाल गैस त्रासदी ही सबसे पहले नंबर पर आई। इसके लिए हमें कभी दुनिया की सबसे बड़ी त्रासदी लिखा, तो कभी वर्ल्ड्स बिगेस्ट इंडस्ट्रियल डिजास्टर (अंग्रेजी में) तो कभी गैस ट्रैजेडी लिखकर भी सर्च किया। हर बार नतीजा निकला कि दुनिया में आज भी त्रासदियों में भोपाल गैस कांड ही सबसे ऊपर है।

यह हुआ था उस रात
JP नगर में यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के प्लांट नंबर-CK टैंक नंबर-610 से लीक हुई मिथाइल आइसोसाइनेट ने हजारों परिवारों को तबाह कर दिया। इस रात को जब शहर चैन की नींद सो रहा था, तब गैस भोपाल के बड़े इलाकों में लाशों का ढेर बिछा रही थी। लाशों को ढोने के लिए गाड़ियां और कफन भी कम पड़ गए थे।

लाशों से भरे ट्रक आने का सिलसिला हमीदिया अस्पताल में जारी रहा। मरने वालों की संख्या कितनी थी, इसे लेकर आज तक सही आंकड़े सामने नहीं आ सके हैं।
लाशों से भरे ट्रक आने का सिलसिला हमीदिया अस्पताल में जारी रहा। मरने वालों की संख्या कितनी थी, इसे लेकर आज तक सही आंकड़े सामने नहीं आ सके हैं।

गैस त्रासदी एक नजर में

  • भोपाल के 36 वार्डों को गैस कांड के बाद प्रभावित माना गया।
  • रिकॉर्ड के मुताबिक, 3787 लोगों की मौत गैस रिसाव से 24 घंटे के भीतर हुईं।
  • 35 हजार लोगों की अब तक जहरीली गैस के प्रभाव से मौतें हुईं।
  • 5,74,386 लोगों को गैस त्रासदी का मुआवजा मिला।

दुनिया की बड़ी ट्रैजेडी

चेरनोबिल ( यूक्रेन) : 26 अप्रैल, 1986 को यूक्रेन के एसएसआर के उत्तर में पिपरियात शहर के पास, चेरनोबिल परमाणु ऊर्जा संयंत्र में नंबर 4 रिएक्टर पर हुई एक परमाणु दुर्घटना के कारण हुई थी। इसमें सैकड़ों जानें गई थीं।

चेरनोबिल विपदा।
चेरनोबिल विपदा।

हैलिफैक्स धमाका (कनाडा) : हैलिफैक्स धमाका 6 दिसंबर, 1917 की सुबह कनाडा के हैलिफैक्स में हुई एक आपदा थी। विस्फोट में करीब 2 हजार लोग मारे गए थे। वहीं, 9 हजार से ज्यादा लोग घायल हुए थे।

हैलिफैक्स धमाका।
हैलिफैक्स धमाका।

सेंट्रलिया माइन डिजास्टर (यूनाइटेड स्टेट्स): 25 मार्च, 1947 को सेंट्रलिया शहर के पास सेंट्रलिया नंबर 5 कोयला खदान में विस्फोट हो गया, जिसमें 111 लोग मारे गए।

सेंट्रलिया माइन डिजास्टर।
सेंट्रलिया माइन डिजास्टर।

लैक मेगांटिक रेल आपदा (कनाडा): 6 जुलाई, 2013 की सुबह कच्चे तेल से भरे 72 टैंकरों को ले जा रही एक ट्रेन क्यूबेक के लैक-मेगेंटिक शहर के पास पहुंचते ही पटरी से उतर गई थी। इससे टैंकर में विस्फोट हो गया और तेल में आग लग गई थी। इस दौरान 47 लोगों की मौत हुई थी। वहीं, कई बिल्डिंग नष्ट हो गई थीं।

लैक मेगांटिक रेल आपदा।
लैक मेगांटिक रेल आपदा।

फिलिप्स ट्रेजेडी (संयुक्त राज्य अमेरिका): फिलिप्स ट्रेजेडी 23 अक्टूबर 1989 एक बड़ी ट्रेजेडी थी, जो संयुक्त राज्य अमेरिका के टेक्सास के पासाडेना में ह्यूस्टन शिप चैनल के पास हुई थी। फिलिप्स पेट्रोलियम कंपनी के ह्यूस्टन केमिकल कॉम्प्लेक्स (एचसीसी) में यह ट्रेजेडी हुई थी।

फिलिप्स ट्रेजेडी।
फिलिप्स ट्रेजेडी।

3 दिसंबर को स्थानीय अवकाश
भोपाल गैस त्रासदी दिवस पर शहर में 3 दिसंबर शुक्रवार को स्थानीय अवकाश रहेगा।

दिवंगतों को श्रद्धांजलि देंगे
बरकतउल्ला भवन, सेंट्रल लाइब्रेरी में 3 दिसंबर की सुबह 11.30 बजे राज्यपाल मंगूभाई पटेल और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में सर्व-धर्म प्रार्थना सभा होगी। इसमें दिवंगत गैस पीड़ितों को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी और धर्मगुरु धर्म ग्रंथों का पाठ करेंगे।

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