भोपाल के जंगलों से आई खुशखबरी / बाघिन टी-123 ने दिया दो शावकों को जन्म, एक दशक के बाद जंगल में बढ़ा बाघों का कुनबा

भोपाल के जंगलों में बाघिन टी-123 ने दो शावकों को जन्म दिया है। बाघिन अपने दोनों बच्चों के साथ मेंडोरा के जंगल में सौंसर के पास पानी पीने निकली। यहां पर ट्रैप कैमरे में कैद हो गई।
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  • बाघिन अपने दोनों शावकों के साथ मेंडोरा में सॉसर के पास वन विभाग के ट्रैप कैमरे में कैद हुई
  • भोपाल और आसपास के जंगलों में 18 से अधिक बाघ-बाघिनों का मूवमेंट रहता है

सुमित पांडेय

सुमित पांडेय

Jun 30, 2020, 11:49 PM IST

भोपाल. भोपाल के जंगलों से खुशखबरी आई है। यहां पर बाघिन-123 ने दो शावकों को जन्म दिया है। इसमें एक बाघ और दूसरी बाघिन शावक बताए जा रहे हैं। शावक अब करीब 2 महीने के हो गए हैं और पूरी तरह स्वस्थ हैं। वन विभाग की माने तो करीब एक दशक बाद भोपाल के आसपास के जंगल में बाघिन ने शावकों को जन्म दिया है। इससे भोपाल के जंगलों में मूवमेंट कर रहे बाघों का कुनबा बढ़ गया है। बताया जा रहा है कि इसके पहले 2011 में टी-2 बाघिन ने केरवा के जंगल में बच्चों को जन्म दिया था। 

वन विभाग भोपाल इसे बड़ी उपलब्धि मान रहा है। बाघिन अपने शावकों के साथ मेंडोरा के जंगलों में सॉसर में पानी पीते हुए वन विभाग के ट्रैप कैमरे में कैद हुई है। यही वो तस्वीर है, जब विभाग को बाघिन के दो शावकों को जन्म देने का पता चला। बाघिन सॉसर के पास दोनों शावकों के साथ चलहकदमी करती दिख रही है। 

बाघिन अपने शावकों के साथ मेंडोरा में सॉसर के आसपास देखी जा रही है। 

इन दोनों शावकों का जन्म टी-2 बाघ के साथ मेटिंग से हुआ है। दो महीने के दौरान फिर से मेटिंग के लिए बाघिन टी-123 के पास पहुंचा था, लेकिन इस बार बाघिन का ध्यान अपने बच्चों पर है, बताया जा रहा है कि बाघिन बच्चों को बाघ की नजर में नहीं आने देना चाहती है। वन विभाग बाघिन के मूवमेंट पर लगातार नजर रख रहा है, साथ ही एहतियात भी बरत रहा है, जिससे इस कुनबे को कोई नुकसान न हो। अभी तक दोनों शावकों का नामकरण नहीं किया गया है। 

बाघिन की लोकेशन मेंडोरा के आसपास है 
कोरोना संकट के दौरान इंसान का हस्तक्षेप कम हुआ, हवा और पानी साफ हुआ तो वन्य जीवों को खुलकर रहवास मिला। यही वजह रही कि बाघ टी-2 और बाघिन टी-123 के बीच मेटिंग संभव हो सकी और बाघों के कुनबे में बढ़ोत्तरी हुई। बाघिन ने केरवा क्षेत्र में दोनों बच्चों को जन्म दिया है और अब वह इनके आसपास ही घूमती रहती है। वन विभाग के अनुसार, फिलहाल बाघिन की लोकेशन मेंडोरा के आसपास है। 

बाघिन के मूवमेंट पर वन विभाग की पूरी नजर है। इस समय उसका मूवमेंट मेंडोरा और मेंडोरी के जंगलों में देखा जा रहा है। 

18 से अधिक बाघों का मूवमेंट 
जिला वन मंडलाधिकारी एचएस मिश्रा ने बताया कि बाघिन का दो बच्चों को जन्म देना। हमारे लिए किसी उपलब्धि से कम नहीं है। बाघिन और उसके बच्चों के मूवमेंट पर हमारी पूरी नजर है। भोपाल और आसपास के जंगलों में 18 से अधिक बाघ-बाघिनों का मूवमेंट रहता है। ये केरवा, मेंडोरा-मेंडोरी, कलियासोत, चंदनपुरा, कठौतिया के जंगलों में मूवमेंट करते हैं। इन क्षेत्रों में घूमते हुए बाघ-बाघिन रातापानी सेंचुरी और ओबेदुल्लागंज की तरफ बढ़ जाते हैं।

बाघ टी-2 फिर से मेटिंग के लिए आया था, लेकिन इस बार बाघिन उससे नहीं मिली। 

फिर से मेटिंग लिए आया था टी-2 बाघ 
बाघ टी-2 पर वन विभाग की पूरी नजर है। बाघ घूमते हुए फिर से ट्रैप कैमरे में कैद हुआ है। अनुमान लगाया जा रहा है कि वह फिर से मेटिंग करने आया था, लेकिन बाघिन का ध्यान अपने बच्चों की तरफ है। ऐसे में बाघ को लौट जाना पड़ा है। असल में, बाघिन बच्चों को बाघ की नजर में नहीं आने देना चाहती है, क्योंकि इससे उन्हें खतरा हो सकता है।

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