मंडीदीप की जनता का विपरीत ट्रेंड:नप में हर बार उतरते हैं 80 फीसदी नए चेहरे, निर्दलीय दे रहे कड़ी टक्कर

मंडीदीप5 महीने पहले

नगरीय निकाय में अब तक जनता का ट्रेंड प्रदेश सरकार के विपरीत नगर सरकार बनाने का रहा है। इस बार नगर में बदलाव के आसार नजर आ रहे हैं, यही कारण है कि भाजपा लगभग सभी वार्डों में संगठित रूप से प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। तो वहीं कांग्रेस खेमे में पार्षद खुद जोर आजमाइश कर रहे हैं। निर्दलियों ने दोनों ही दलों को कड़ी टक्कर देने की तैयारी है।

अब तक नगर में वार्डों का ट्रेंड कुछ इस तरह रहा है। जहां वार्ड 4 के मतदाताओं ने अब तक सिर्फ अविवाहित युवाओं को ही पार्षद बनने का मौका दिया है। वहीं नगर के 11 ऐसे वार्ड हैं, जहां से किसी प्रत्याशी को दोबारा पार्षद नहीं चुना गया। पार्टियों ने दोबारा टिकट नहीं दिया या फिर मंशानुरूप वार्डों का आरक्षण नहीं हुआ। 7 वार्ड ऐसे भी हैं, जहां एक ही नेता को दो-तीन बार पार्षदी सौंपी गई।

इस तरह नगर पालिका परिषद में 80 फीसदी से अधिक चेहरे हर बार नए ही होते हैं। इस ट्रेंड पर ही जाएं तो फिर बीती परिषद के पार्षदों को तगड़ा झटका लग सकता है। अव्वल तो कांग्रेस ने 4 और भाजपा ने 2 को ही टिकट दिया है। इस तरह पुराने चेहरों को रिपीट न करने का प्रचलन दोनों ही दलों में देखने को मिलता है। दोबारा पार्षद बनने के मामले में कुछ ही भाग्यशाली रहे हैं। नपा गठन 1996 से लेकर अब तक 5 चुनाव हो चुके हैं। इनमें से अगर वर्ष 2016 में हुए वार्ड परिसीमन के पहले की बात करें तो मतदाताओं के रुझान को लेकर कई ट्रेंड बने और कई मिथ्या साबित हुए।

नपा का अब तक का चुनावी समीकरण बताता है कि दूसरी बार की पार्षदी यहां टेढ़ी खीर है। परिसीमन के पहले नगर में 18 वार्ड थे, जिनमें से वार्ड 1, 3, 4, 7, 8, 10, 13, 14, 15, 16 और 17 यानी इन 11 वार्डों के मतदाताओं ने कभी किसी उम्मीदवार को दोबारा पार्षद बनाने का मौका नहीं दिया। वार्ड 2 के मतदाताओं के साथ पार्टियों ने भी 2, 5, 6, 9, 11, 12 और 18 में एक ही पार्षद चेहरे को दो बार मौका दिया।

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