किसानों को भा रही धान की खेती:ओबैदुल्लागंज ब्लॉक में इस बार 44 हजार हेक्टेयर में करेंगे खेती

मंडीदीप2 महीने पहले
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क्षेत्र में पिछले एक दशक से खरीफ सीजन की फसल सोयाबीन की खेती में किसानों को लगातार नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऐसे में अब किसान सोयाबीन में हुए नुकसान की भरपाई के लिए धान की खेती पर जोर दे रहे हैं। 10 वर्ष पूर्व धान की खेती का रकबा लगभग 3 से 4 हजार हेक्टेयर था, जो इस साल बढ़कर 10 गुना से अधिक यानि लगभग 40 से 44 हजार हेक्टेयर होने का अनुमान है। क्षेत्र के किसानों ने इसकी खेती के लिए जोरदार तैयारियां भी शुरू कर दी हैं।

खरीब सीजन की मुख्य फसल व पीला सोना कहे जाने वाला सोयाबीन पिछले कई सालों से अतिवृष्टि के चलते किसानों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रहा है। जिसके चलते क्षेत्र में इस साल सोयाबीन के स्थान पर किसान धान की खेती करेंगे।

धान की खेती बनी फायदे का सौदा

सोयाबीन की फसल अतिवृष्टि की स्थिति में खराब हो जाती है। धान में अधिक बारिश होने पर भी नुकसान नहीं होता। दाहोद के किसान पवन नागर ने बताया कि उन्होंने बीते वर्ष अपने खेत में सोयाबीन की फसल बोई थी जो अधिक बारिश होने से पूरी तरह चौपट हो गई थी। धान की फसल में अधिक बारिश होने पर भी नुकसान नहीं होता। क्षेत्र में काली मिट्टी धान के अनुकूल है।

तैयार किए धान के गटे

धान की सिंचाई के लिए पानी पर्याप्त मात्रा में जरूरी है। इसके अलावा धान की फसल में पर्याप्त पानी व मिट्टी में नमी बनाए रखने के लिए छोटी इकाइयों में इसकी बोनी की जाती है। जिसके लिए किसानों ने अपने खेतों में छोटे आकार के गटे बनाकर तैयार कर लिए हैं। क्षेत्र का कुल रकवा 43.300 हजार हेक्टेयर है। 10 वर्ष पहले 38 से 40 हजार हेक्टेयर में सोयाबीन की बोनी होती थी। धान का रकवा 3 से 4 हजार हेक्टेयर था। जो अब उलट गया है। सोयाबीन सिमट कर 1500 से 2000 हेक्टेयर पर रह गया है। शेष रकवे में मक्का व अन्य फसलें सहित कुल 50 हजार हेक्टेयर में खरीफ फसल की बोनी होती है।

क्षेत्र में धान के प्रति किसानों का तेजी से रुझान बढ़ रहा है, इस वर्ष अनुमान के अनुसार धान का रकबा लगभग 42 हजार हेक्टेयर तक पहुंच सकता है।

- डीएस भदौरिया, वरिष्ठ कृषि अधिकारी औबेदुल्लागंज।

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