ज्योतिष मेष में गोचर करेंगे:पांच ग्रहों के योग से बनेंगे अच्छी बारिश के आसार

रायसेन2 महीने पहले
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ग्रहों के सेनापति मंगल 27 जून को अपनी ही राशि मेष में गोचर कर गए हैं। मेष राशि में दूसरा आक्रामक ग्रह राहु पहले से ही विराजमान है। ऐसे में मंगल-राहु की यह युति अंगारक योग का निर्माण करने जा रही है, जो प्राकृतिक आपदाओं की आशंका बनाती है। इससे पहले मंगल-राहु का अंगारक योग 1985 में बना था। उस दौरान भी प्राकृतिक आपदाएं व अतिवृष्टि हुई थी। इस बार पांच विशेष संयोग के कारण बारिश के योग बन रहे हैं।

ज्योतिषाचार्य पंडित गजेंद्र शर्मा के अनुसार मंगल ग्रह को अग्नि तत्व का कारक माना गया है, जबकि राहु ग्रह को अशुभ ग्रह माना गया है। यह योग 10 अगस्त रात 9.08 पर मंगल के वृषभ राशि में प्रवेश करने के साथ समाप्त होगा। ग्रह गोचर की गणना से देखें तो आषाढ़ मास में पांच ग्रह स्वयं की राशि में रहेंगे।

इसमें मंगल वृषभ में जाएंगे, बुध का मिथुन में प्रवेश 1 जुलाई को होगा। शनि कुंभ राशि में और गुरु मीन राशि में पहले से ही गोचरस्थ हैं। इन पांच ग्रहों की उत्तम स्थिति के कारण ही वर्षा ऋतु में श्रेष्ठ बारिश के योग बन रहे हैं। इसके साथ ही अंगारक योग के दौरान मेष, वृष, सिंह, कन्या, तुला, धनु, मकर और मीन राशि वालों को संभलकर रहना होगा।

जानिएः विशेष योग का किस राशि क्या होगा अस
मेष- पराक्रम में वृद्धिए सम्मान। वृषभ-शत्रुओं से रहें सावधान। मिथुन-यश और प्रतिष्ठा बढ़ेगी। कर्क-कार्यक्षेत्र में होगी उन्नति। सिंह-धार्मिक यात्रा के बनेंगे योग। कन्या- व्यर्थ के विवादों से बचें। तुला-व्यापार क्षेत्र से होगा लाभ। वृश्चिक- शुभ समय का आरंभ। धनु- धन लाभ के बनेंगे योग। मकर-स्वास्थ्य का रखें ध्यान। कुंभ-स्वान परिवर्तन के योग। मीन- खर्च बढ़ने के आसार।

14 जुलाई से सावन, 18 दिन विशेष योग
13 जुलाई को स्नान दान पूर्णिमा के अगले दिन 14 जुलाई को श्रावण की शुरुआत होगी। समापन 11 अगस्त को रक्षाबंधन पर होगा। श्रावण मास 29 दिन का रहेगा। पूर्व आषाढ़ में 30 जून से गुप्त नवरात्रा प्रारंभ होंगे। ज्योतिषविद् के अनुसार सावन में 18 दिन विशेष योग रहेंगे। 15 से 25 तक लगातार 8 दिन और 1 से 12 अगस्त तक लगातार 11 दिन विशेष योग रहेंगे।

आखिरी मुहूर्त 9 जुलाई को
इस सीजन का आखिरी मुहूर्त 9 जुलाई को रहेगा। इससे एक दिन पहले 8 जुलाई को भड़ैया नवमी को अबूझ मुहूर्त रहेगा। इस दिन अधिक शादियां होंगी। इस सीजन में अब सिर्फ 11 दिन और शहनाई बजेगी। 10 जुलाई से देव सो जाएंगे। फिर चार माह बाद नवंबर में देवउठनी एकादशी का सावा होगा।

हालांकि शुक्र तारे के अस्त होने से विधिवत लग्न मुहूर्त 28 नवंबर से शुरू होंगे। यानी भड़ल्या नवमी के बाद विवाह मुहूर्त शुरू होने के लिए 140 दिन इंतजार करना होगा। हालांकि 4 नवंबर को देवउठनी एकादशी पर अबूझ मुहूर्त में कई जोड़े दाम्पत्य सूत्र में बंधेंगे।

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