परिवार से मिलने का मौका मिला:पुलिस को धन्यवाद देने आई गीता का मुड़िया खेड़ा में किया स्वागत

सलामतपुर2 महीने पहले
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गीता को सांची स्तूप का स्मृति चिन्ह भेंट करते हुए समाजसेवी। - Dainik Bhaskar
गीता को सांची स्तूप का स्मृति चिन्ह भेंट करते हुए समाजसेवी।

बुधवार को विदिशा जाते समय गीता का सलामतपुर के पास मुड़िया खेड़ा गांव में जोरदार स्वागत किया गया। गांव में समाजसेवी पूरन सिंह लोधी ने कार्यक्रम आयोजित कर गीता का स्वागत कर सांची स्तूप का स्मृति चिन्ह भेंट किया। इस दौरान मूक बधिर संस्था इंदौर के ज्ञानेंद्र पुरोहित व गांव के ग्रामीण काफी अधिक संख्या में मौजूद रहे। गौरतलब है कि परिवार से 22 साल पहले बिछड़कर पाकिस्तान पहुंची गीता को आखिरकार भारत लौटने के 5 साल बाद अपने परिवार से मिलने का मौका मिला है।

गीता का असली नाम राधा वाघमारे है। उसे उसकी मां महाराष्ट्र के नैगांव में मिली। मध्य प्रदेश पुलिस ने राधा को आनंद सोसाइटी के सहयोग से स्थापित मध्य प्रदेश मूकबधिर पुलिस सहायता केंद्र के माध्यम से परिवार से मिलवाया। मूकबधिर गीता को अपनी मां तक पहुंचने में उसके शरीर पर मौजूद एक पैदाइशी निशान मददगार साबित हुआ था।

मध्य प्रदेश जीआरपी और इंदौर पुलिस की सहायता से गीता को अपने परिवारजनों से मिलने में सफलता मिली है। गीता अपनी मां से मिलने के बाद मंगलवार को राधा मध्यप्रदेश पुलिस, जीआरपी सहित तत्कालीन विदेश मंत्री स्वर्गीय सुषमा स्वराज को धन्यवाद कहने के लिए भोपाल आई। इस दौरान राधा ने डीजीपी से भी मुलाकात की। उन्होंने लिखित में सभी के सहयोग के लिए धन्यवाद कहा।

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