अव्यवस्थाओं की मंडी:शेड पर व्यापारियों का कब्जा, सड़क पर किसानों की उपज

जीरापुर24 दिन पहले
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किसानों को स्थानीय कृषि उपज मंडी में अव्यवस्थाओं का सामना करना पड़ रहा है। मंडी में किसानों को शुद्ध पेयजल भी नसीब नहीं हो रहा है। हालात यह है की सुबह से देर शाम तक मंडी में उपज नीलामी तक रुकने के लिए बैठने तक के इंतजाम नहीं है। करीब 15 साल पहले किसानों की सुविधा की दृष्टि से मंडी बोर्ड द्वारा 65 लाख रुपए खर्च कर बनाए गए कृषक विश्राम गृह पर ताला लगा हुआ है। ऐसे में किसान पेड की छांव में या टेक्टर ट्रॉली के नीचे लेटकर आराम करते हुए देखे जा रहे हैं। खरीफ के सीजन के दिनो मे 7 हजार क्विंटल उपज की रोजाना आवक वाली इस मंडी में व्यवस्था में सुधार के लिए जिम्मेदारों ने अब मंडी बोर्ड को पत्र लिखा है।

सुलभ कांप्लेक्स : व्यापारियों ने सामान रख किया कब्जा :

नगर के पचोर रोड पर स्थित मंडी जिले की बड़ी मंडी के रुप में पहचान बनाए हुए हैं। यहां जीरापुर क्षेत्र के अलावा आगर, शाजापुर व राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्र तक के किसान उपज विक्रय के लिए आ रहे हैं। अव्यवस्थाएं ऐसी कि 5 साल पहले बनाए गए सुलभ कांप्लेक्स में व्यापारियों ने अपना सामान भरकर कब्जा कर लिया है, अलबत्ता पेयजल के नाम पर मंडी प्रबंधन ने परिसर में 1 टैंकर खड़ा करवाया है। दूसरी और कृषक विश्राम गृह में निर्माण सामग्री रखी हुई है।

निर्माण की गुणवत्ता पर भी संशय
उपज मंडी में 73.80 लाख की लागत से 2 चेक पोस्ट, केंटीन, पानी की टंकी, पेयजल के लिए टयूबवेल खनन सहित अन्य कार्य किए जा रहे हैं। इन निर्माण कार्यों की गुणवत्ता भी ठीक नजर नहीं आती।

  • एक शेड में व्यापारियों का समान पड़ा है।

गोडाउन की कमीं है, बारिश में व्यापारियों को माल जमाने के लिए दिया था, आज ही खाली करवाने की कार्यवाही करता हूं। { सुलभ कांप्लेक्स में व्यापारियों का सामान भरा हुआ है, किसान उपयोग नहीं करते। कांप्लेक्स में ताला लगा था, किसने खोला में देखता हूं। पानी की समस्या के कारण ये शुरू नहीं किया है। {कृषक विश्राम गृह क्यो बंद है, इसमें निर्माण सामग्री पड़ी हुई है। फर्नीचर, बिजली व अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए मंडी बोर्ड को पत्र लिखा है। मंडी में निर्माण चल रहा है, ठेकेदार ने अपना सामान रख दिया होगा। {किसानों ने कहा है- यहां पेयजल भी नहीं मिल रहा। अभी हम रोज टैंकर खड़ा कर रहे हैं, पानी की टंकी का निर्माण चल रहा है।

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