श्रीनाथजी को लगाया अन्नकूट का भोग:दर्शन करने कलेक्टर, एसपी सहित कई श्रद्धालु का सैलाब, महाआरती के बाद श्रद्धालुओं दिया भोग

राजगढ़ (भोपाल)22 दिन पहले

राजगढ़ में बड़े श्रीनाथ जी के मंदिर पर नगरपालिका अध्यक्ष की ओर से शनिवार रात को अन्नकूट का आयोजन किया। मौके पर मंदिर की आकर्षक सजावट की गई है। भगवान श्रीनाथ जी को 56 तरह के व्यंजनों का भोज लगाया गया।जहां दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का ताता लगा रहा।

प्रदोष काल के मौके पर नगरपालिका अध्यक्ष विनोद साहू द्वारा घूम घाटी पर स्थित बड़े श्रीनाथजी के मंदिर पर अन्नकूट का आयोजन करवाया गया। जहां केले के पत्तों और फूलों से मंदिर को विशेष सजाया। जहां शाम 6 बजे भगवान को 56 तरह के पकवानों का भोग लगाया गया। जिसको लेकर मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का ताता लगा रहा। शाम साढ़े 6 बजे आरती के साथ दर्शन खुले। जहां अन्नकूट के दर्शन करने के लिए राजगढ़ कलेक्टर हर्ष दीक्षित अपनी पत्नी के साथ पहुंचे। वहीं, एसपी अवधेश कुमार गोस्वामी और विधायक बापू सिंह तंवर के साथ ही बड़ी संख्या में लोग पहुंचे और दर्शन किए। जिसके बाद देर रात तक यहां प्रसाद वितरित किया गया।

कब हुई थी मंदिर की स्थापना

राजगढ़ के घूम घाटी पर स्थित पुष्टि मार्ग संप्रदाय का श्रीनाथ जी का बड़ा मंदिर है। जिसकी स्थापना 1911 में राजगढ़ के राजा बलभद्र सिंह जी के द्वारा की गई थी। यहां के राजा ठाकुर जी की इस प्रतिमा को नाथद्वारा से लेकर आए थे।यहां इस मंदिर में स्थापित किया था। तब से यहां प्रति वर्ष अन्नकूट का आयोजन होता है।

जानिए..ठाकुर जी क्यों लगाते है 56 भोग

राजगढ़ के बड़े श्रीनाथ जी मंदिर के मुखिया गिरिराज अनंत ने बताया कि द्वापरयुग में भगवान कृष्ण ने इंद्र की पूजा बंद करवा कर गोवर्धन की पूजा कराने के लिए संकल्प लिया। इससे क्रोधित होकर इंद्र राजा ने गोवर्धन पर्वत और ब्रजमंडल में बहुत तेज बारिश शुरू कर दी। इससे परेशान होकर ब्रजवासियों ने भगवान श्री कृष्ण के चरणों मे जाकर विनती की। महाराज बारिश से पूरा ब्रजमंडल, पूरी गाय, गौ चारण सब परेशान हो गए है। इंद्र के क्रोध से सब परेशान हैं।भगवान ने इंद्र का मान भंग करने के लिए।

कृष्ण भगवान ने 7 वर्ष की आयु में चीटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत को उठाया और सभी ब्रजवासियों को गोवर्धन पर्वत के नीचे अपनी शरण मे लाएं। 7 दिनों तक जो तेज बारिश हुई। उसमें उन्होंने सब की रक्षा की। 7 दिनों तक भगवान भूखे प्यासे खड़े रहे। भगवान को पुष्टि मार्ग में एक दिन में 8 समय भोग लगाया जाता है। 8 समय के हिसाब से 7 दिन तक भगवान भूखे रहे इस लिए 56 भोग हो गए। 56 तरह के व्यंजन लगाने की परंपरा द्वापर युग से चली आ रही है।उसी के चलते आज राजगढ़ में ठाकुर जी को गोवर्धन के रूप में 56 भोग लगाए गए हैं।

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