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आपदा, अवसर और आत्मनिर्भर नारी की कहानी:पहले पिता फिर भाई के निधन के बाद विधवा भाभी और बीमार मां का बनीं सहारा, रोज 85 किमी कर रहीं अपडाउन

ढोढर9 महीने पहले
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  • महिला दिवस पर हनुमंतिया की शिक्षिका पिंकी शर्मा ने बताया अपना संघर्ष

मैं 17 साल की थी तब पिता लक्ष्मीनारायण शर्मा का निधन हो गया। चूंकि हमारे पास खेती या रोजगार का अन्य साधन नहीं था इसलिए पिता के जाने के बाद पढ़ाई छूट गई। भाई मुकेश को परिवार के पालन-पौषण में परेशानी होने लगी तो मैंने पिपल्याजोधा के शारदा विद्यालय में प्राइवेट शिक्षिका के रूप में पढ़ाना शुरू किया। संचालक भारतसिंह पंवार ने मेरी आगे की पढ़ाई पूरी करने में मदद की। वर्ष 2013 में शिवगढ़ के सरकारी प्राथमिक शाला में संविदा शिक्षिका के तौर पर चयन हो गया। वहां किराये के मकान में रहकर नौकरी कर रही थी।

सब ठीक चलने लगा था कि दस महीने में जून 2020 को भाई मुकेश की हार्ट अटैक से मौत हो गई। इसका मां मांगूबाई को गहरा सदमा लगा और मां ने बीमार होकर बिस्तर पकड़ लिया। अब इनका और विधवा भाभी एवं एक भतीजे की देखभाल के लिए परिवार में मेरे अलावा कोई नहीं बचा।

परिवार और नौकरी दोनों जरूरी है। इसलिए शिवगढ़ से किराये का मकान खालीकर वापस गांव हनुमंतियां आ गई। यहां परिवार का ध्यान रखने के साथ ही रोज 85 किमी दूर शिवगढ़ अप-डाउन कर रही हूं। कभी बस तो कभी स्कूटी से जिंदगी का संघर्षभरा सफर जारी है। चूंकि अभी संविदा पर हूं। स्थायी नौकरी के लिए प्रतियोगी परीक्षाएं दे रही हूं। समय बचता है तो गांव में ही 15 बच्चों को भी फ्री तैयारी करवा रही हूं।

ये कहानी है हनुमंतियां की 30 वर्षीय अविवाहित पिंकी शर्मा की, जो पोस्ट ग्रेजुएट हैं और परिवार एवं नौकरी के बीच संतुलन बनाते हुए सशक्त नारी शक्ति का परिचय दे रही हैं। महिला दिवस पर वे कहती है कि मुसीबतों का सामना करना खीचें। रास्ते खुद-ब-खुद बन जाएंगे।

जिल्लतभरी जिंदगी छोड़ स्वाभिमानी जीवन जी रहीं मां-बेटी

ढोढर | ग्राम चिकलाना में रहने वाली बांछड़ा समुदाय की महिला राजूबाई बोड़ाना जिल्लतभरी जिंदगी छोड़कर मेहनत-मजदूरी करके स्वाभिमानी जीवन जी रही हैं। वे कहती हैं कि बेटी रवीना और बेटे विकास का जीवन संवारने के लिए समाज की कुप्रथा से दूर खेती-मजदूरी शुरू की और बेटे-बेटी दोनों को उच्च शिक्षा दिलाई। बेटी रवीना बीए शिक्षित है। बेटा विकास भी एमए फाइनल करने के साथ ही पुलिस सेवा के लिए मेहनत कर रहा है। रवीना और विकास कहते हैं कि मां ने हमें काबिल बनाया। अब आगे की मेहनत हमें करना है।

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