रताैंधी रोग / 5 दिन के भीतर गरोठ में 15 केस आए सामने, 6 माेरों की मौत

रतौंधी रोग से घायल होकर जमीन पर पड़े मोर। रतौंधी रोग से घायल होकर जमीन पर पड़े मोर।
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रतौंधी रोग से घायल होकर जमीन पर पड़े मोर।रतौंधी रोग से घायल होकर जमीन पर पड़े मोर।

  • डॉक्टर बोले : डिहाइड्रेशन व विटामिन की कमी के चलते अंधापन और बेहोशी का शिकार हुए
  • जिले में सबसे ज्यादा गरोठ शामगढ़ में 3 हजार से अधिक मोर पाए जाते हैं

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 06:56 AM IST

गरोठ. राष्ट्रीय पक्षी मोरों में बीते चार-पांच दिनों से रताैंधी रोग नामक बीमारी की घटना सामने आई है। रतौंधी रोग के चलते मोरों को दिखाई देना बंद हो जाता है और वे वृक्ष, बिजली पोल, केबल व जमीन पर बैठे-बैठे अचानक चक्कर आकर माेर गिर पड़ते हैं या फिर एक ही स्थान पर गोल-गोल घूमने लगते हैं।

विभाग द्वारा मिली जानकारी के अनुसार बीते 5 दिन में विभाग ने ऐसे 15 से ज्यादा मोरों का रेस्क्यू किया है। इसमें 6 मोरों की मृत्यु भी हो गई है। हालांकि कुछ मोरों की मृत्यु का कारण चक्कर आकर गिरने के बाद घायल होने की वजह भी बताई जा रही है। लगातार घटनाएं सामने आने के बाद वन विभाग ने दो मोरों का ऑपरेशन कराकर कारण जानना चाहा तो उसमें निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन) व विटामिन की कमी के चलते आंखों में अंधापन एवं बेहोशी सामने आई है।

गरोठ शामगढ़ में 3 हजार से ज्यादा राष्ट्रीय पक्षी, मेलखेड़ा बीट में ज्यादा घटनाएं
जिले में सबसे ज्यादा तादात में राष्ट्रीय पक्षी मोर गरोठ एवं शामगढ़ तहसील में पाए जाते हैं। यहां इनकी संख्या 3000 से अधिक है, शामगढ़ तहसील के मेलखेड़ा बीट में 15 मई से मंगलवार 19 मई तक 10 मोरों का वन विभाग ने रेस्क्यू किया है। जिसमें 2 की मृत्यु भी हो गई। वहीं नारिया बुजुर्ग, बर्डिया अमरा गरोठ में भी 7-8 मोरों का रेस्क्यू किया था जिसमें 3 की मृत्यु हो गई जबकि दो-तीन मोरों को जानवरों ने घायल कर मार दिया।

पक्षियों के लिए दाना- पानी डालें यही एकमात्र उपाय
 वन विभाग रेंजर कमलेश सालवी ने बताया गर्मी के चलते मोरों के अंदर डिहाइड्रेशन विटामिन की कमी हो गई है। इसके कारण मोरों को अंधापन और बेहोशी हुई है। हमने गांव-गांव में लोगों को पक्षियों के दाने पानी के लिए जागरूक किया है। पशु चिकित्सक दीपक निगवाल से चर्चा कर दवाइयां भी वितरण की हैं। अपने स्तर पर दाने पानी की भी व्यवस्था कर रहे हैं। सामाजिक संगठनों को आगे आने की जरूरत है।

ये है समाधान :

  • पानी में इलेक्ट्रोलाइट एवं एंटीबायोटिक मिलाकर पिलाने से समस्या का समाधान हो सकता है ।
  • ठंडे जगह पर रखने से समस्या काम हो सकती।(तापमान में बढ़ोतरी के कारण ऎसा होता है।)
  • ठंडा पानी शरीर पर छिड़कने से एवं पौष्टिक आहार देने से धीरे-धीरे समस्या से उबर सकते हैं।

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