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  • 16054 Children Of Pravi Mavi Ate 5 Months Of Wheat, Rice, Pulses And Oil In The Mid day Meal And Now The Schools Distributed Drought

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वितरण:प्रावि-मावि के 16054 बच्चों ने मध्याह्न भोजन में 5 महीने खाए गेहूं-चावल, दाल-तेल अब आया तो स्कूलों ने सूखा बंाट दिया

जावरा2 महीने पहले
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  • प्रावि-मावि के बच्चों को अब तक मिल रहा था खाद्य सुरक्षा भत्ता, मध्याह्न भोजन के तहत नवंबर से दाल-तेल भी मिलना था

सरकारी प्राइमरी व मिडिल स्कूल कोविड-19 के कारण नए साल में भी नहीं खुले। स्कूलों में बंटने वाले मध्याह्न भोजन की जगह बच्चों को पांच महीने से गेहूं, चावल घर बैठे मिल रहा था। भोजन पकाने के लिए उन्हें भत्ता मिल रहा था लेकिन अगस्त से इसी भत्ते के तहत सूखा राशन यानी तुअर दाल और सोयाबीन का तेल भी मिलना था। इसे लेकर अक्टूबर आखिर में सर्कुलर भी जारी हुआ लेकिन पांच महीने से प्रावि-मावि के 16054 बच्चे घर पर सिर्फ गेहूं और चावल ही खा रहे हैं। सूखे राशन के रूप में दाल और तेल उन्हें नए साल में जाकर मिली है। सामग्री को बच्चों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी शिक्षकों को दी गई और उन्हें बांटी। इस संबंध में शिक्षा विभाग का कहना है कि हमें जैसे ही सूखा राशन मिला, हमने बांट दिया। कोरोना संक्रमण के कारण 23 मार्च के बाद से ही प्राइमरी व मिडिल स्कूलों पर ताले लगे हैं। बच्चों को घर पर अध्यापन करने में सुविधा हो इसके लिए मध्याह्न भोजन भी उनके घरों तक पहुंच रहा है। ब्लॉक में 220 प्रावि, 97 मावि स्कूल हैं। प्रावि में 10200 और मावि में 5854 विद्यार्थी दर्ज हैं। मध्याह्न भोजन कार्यक्रम के तहत इस कारण स्कूलों में दर्ज बच्चों को खाद्य सुरक्षा भत्ते के रूप में भोजन पकाने की राशि के समतुल्य 73 दिवस यानी अगस्त के 23, सितंबर के 26 और अक्टूबर के 24 दिन के लिए प्रति छात्र 362.81 रुपए एवं माध्यमिक स्कूल के लिए प्रति छात्र 543.85 रुपए के मान से भोजन पकाने की राशि के समतुल्य दाल और तेल का वितरण हुआ। केंद्रीय भंडार को आदेश दिनांक से 45 दिवस की अवधि में विकासखंडस्तर पर सूखा राशन पहुंचाना था लेकिन नए साल में राशन बच्चों के घरों तक पहुंचा। प्राथमिक शाला में दर्ज बच्चों के लिए 2 किलो तुवर दाल, 525 ग्राम तेज और मावि के बच्चों के लिए 3 किलो तुवर दाल और 783 ग्राम तेल शामिल हैं। दो दिन पहले ही विधायक डॉ.राजेंद्र पांडेय, एसडीएम राहुल धोटे ने खाद्य सुरक्षा भत्ता योजना के तहत शिक्षकों को सूखा राशन दिया।

आवंटन स्कूली बच्चों के घर तक पहुंचा दिया
बीआरसी विवेक नागर ने बताया प्रावि-मावि स्कूल के बच्चों को पहले सिर्फ गेहूं व चावल बांटे जा रहे थे। अब खाद्य सामग्री में तेल व दाल दिए हैं। शेष सामग्री कुछ होगी तो उसे शिक्षक कोविड नियमों का पालन करते हुए घर-घर जाकर बच्चों को बांटेंगे। जैसे ही आगे से दाल और तेल का अलॉटमेंट प्राप्त हुआ उसे स्कूली बच्चों के घर तक पहुंचा दिया गया है।

इसलिए भत्ते की जगह दिया सूखा राशन
जब स्कूल खुले थे तो बच्चों को मध्याह्न भोजन स्व-सहायता समूहों के माध्यम से स्कूल पहुंचता था और बच्चे उन्हें खाते थे। कोविड-19 के बाद स्कूल बंद हैं। ऐसे में उन्हें सूखा राशन पहुंचाने के साथ ही भोजन बनाने में होने वाले खर्च स्वरूप बच्चों के खातों में भत्ते की राशि जमा होती थी। कई बच्चे ऐसे थे जिनके खाते चालू नहीं थे, कुछ मामलों में राशि उनके पोषण आहार पर खर्च नहीं हो पाती थी। ऐसे में सरकार ने सूखा राशन देना शुरू किया। अब भोजन पकाने के लिए दी जाने वाली राशि की जगह तेल व दाल बच्चों को बांटे जा रहे हैं।

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