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आरटीई में स्कूलों में एडमिशन:पिछले साल नहीं मिला प्रवेश, इस बार भी सीटें लॉक, 550 वेटिंग में

जावरा4 दिन पहले
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  • सरकारी स्कूल खुलने की तारीख तय नहीं, इस बार सेशन लेट शुरू होने से पिछड़ सकती है पढ़ाई, स्कूल अब तक नहीं खुले

सरकारी स्कूलों में पहली से आठवीं तक के बच्चे जनरल प्रमोशन होकर कक्षा में प्रमोट तो हो गए लेकिन आरटीई के तहत अपनी पसंद के स्कूल में दाखिला बच्चे अब भी नहीं ले पा रहे हैं। पिछले साल की तरह इस बार भी सिर्फ सीटें ही लॉक हुईं लेकिन प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने के लिए कोई टाइम टेबल नहीं आया है। हर बार जून अंत तक ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया होकर बच्चों की लॉटरी निकल जाती है लेकिन सालभर से बच्चे सिर्फ इंतजार कर रहे हैं। करीब 550 अभिभावक अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में प्रवेश दिलाना चाहते हैं वे असमंजस में हैं कि अगर ऐसे ही देर हुई तो उनके बच्चों के प्रवेश का क्या होगा। वहीं शिक्षा पर भी इसका असर पड़ेगा।

निर्धन एवं कमजोर वर्ग के छात्रों को निजी स्कूलों में शिक्षा मुहैया कराने के लिए शासन ने ब्लॉक की 117 प्राइवेट स्कूल की प्रारंभिक कक्षा में 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित की हैं। इसमें नर्सरी, केजी-1, केजी-2 और पहली के लिए एडमिशन होना है। साल 2019 में स्कूलों में प्रवेश हुए तो खाली सीटें अधिक होने के कारण दूसरे और तीसरे चरण में बच्चों को प्रवेश दिए गए। साल 2020 की तरह साल 2021 में अभी तक शिक्षा विभाग ने प्रवेश के लिए कोई गाइडलाइन जारी नहीं की है। इसके कारण प्रथम चरण की प्रक्रिया कब शुरू होगी, इसकी जानकारी तक अभिभावकों को नहीं मिल रही है।

भले ही बच्चों को बिना रोकटोक के अगली कक्षा में प्रमोट किया जा रहा है लेकिन प्रवेश प्रक्रिया में देरी का असर बच्चों की पढ़ाई पर भी पढ़ेगा। ब्लॉक में आरटीई के तहत निजी स्कूलों में 1181 सीटों से अधिक सीटें आरक्षित हैं। यह सभी पूरी तरह से नहीं भर पाती हैं। साल 2019 में भी 40 फीसदी से अधिक सीटें खाली रह गई थीं। आरटीई एक्ट लागू होने से अभी तक एक बार भी ऐसा नहीं हुआ कि जब आरक्षित सीटों पूरी भर गई हों। आज की स्थिति में अभी निजी स्कूलों ने 25 फीसदी सीटों को पोर्टल पर लॉक किया है। पोर्टल कब खुलेंगे, इसे लेकर भी कोई जानकारी नहीं है।

इन्हें मिलता है आरटीई का लाभ, इस साल नंबर लगेगा कहना मुश्किल

शिक्षा का अधिकार कानून के तहत बीपीएल व अंत्योदय कार्डधारी, एससी-एसटी व विमुक्त जाति, वनभूमि पट्‌टेधारी, शारीरिक रुप से नि:शक्त, एचआईवी पीड़ित, अनाथ बच्चों को प्रवेश की पात्रता है। इसके लिए बच्चे का जन्म प्रमाण-पत्र, एड्रेस प्रूफ, जिस वर्ग के तहत आवेदन कर रहे हैं, उस वर्ग का प्रमाण पत्र देना जरूरी होती है और इन्हें ही लाभ भी मिलता है। लेकिन सालभर से किसी बच्चे को आरटीई का लाभ नहीं मिला है। इस साल भी उनका नंबर लगेगा या नहीं, कहना मुश्किल है।

आरटीई रिपोर्ट कार्ड, पिछले साल प्रवेश जीरो
वर्ष 2016 में 126, वर्ष 2017 में 438, वर्ष 2018 में 463 बच्चों का प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन हुआ था। अभी 2019 की बात करें तो 1181 सीटों पर बच्चों का प्रवेश होना था। इसमें नर्सरी के लिए 244, केजी-1 के लिए 3, केजी-2 के लिए 436 और पहली के लिए 498 सीटें रिजर्व थीं। इनमें से 650 बच्चों की लॉटरी खुली थी। वर्ष 2020 में न स्कूल खुले और न आरटीई की सीटों पर बच्चों को प्रवेश मिला। अब 2021 लग चुका है।

सीटें लॉक हुईं, आदेश का इंतजार

बीआरसी विवेक नागर ने बताया कि आरटीई के तहत प्रवेश की प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हुई है। सिर्फ सीटें लॉक हैं जो पिछले साल के बराबर ही हैं। प्रवेश कब मिलेगा और कैसे मिलेगा, इसे लेकर शासन के आदेश का इंतजार है। वैसे भी स्कूल अभी बंद हैं, स्कूल खुलने के बाद स्थिति क्लियर होगी।

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