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  • In 3 Days, 532 People Out Of 24682 Took Objection And Said That We Are Not Ineligible, The Name Will Be Removed From The Portal Till The Remaining 15

दावे-आपत्ति का समय खत्म:3 दिन में 24682 में से 532 लोगों ने आपत्ति लेकर कहा हम अपात्र नहीं, बाकी के 15 तक पोर्टल से हटेंगे नाम

जावराएक महीने पहले
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  • अपात्रों की सूची में सिर्फ उन्हीं के नाम जो सर्वे में मिले नहीं या कहीं चले गए

सरकार ने अपात्र लोगों के नाम सरकारी राशन लेने वालों की सूची से काटने के लिए 15 अगस्त घाेषित की है। 3 दिन पहले 24 हजार 682 अपात्र लोगों की सूची को सार्वजनिक करते हुए उन्हें राशन दुकानों, नपा परिसर व पंचायत के बाहर चस्पा की थी ताकि पात्र लोग दावे-आपत्ति लेकर नाम कटने से बचा सकें। ब्लॉक में अभी तक महज 532 लोगाें ने आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा है कि वे पात्र हैं और उनका नाम नहीं काटा जाए। बाकी लोग तो आए ही नहीं। ऐसे में अब खाद्य विभाग के पास बचे हुए लोगों नाम काटने के अलावा अब कोई चारा नहीं है। दावे-आपत्ति का समय खत्म हो चुका है। अब जिन्होंने दावे-आपत्ति लेकर अपने आपको पात्र बताया है उनका फाइनल वेरिफिकेशन होगा। काटे जाने वाले नामों की जगह फिर पात्र लोगों के नाम जोड़े जाएंगे। शहर में 8 हजार से अधिक बीपीएल, 1090 अंत्योदय, 1400 प्राथमिक हितग्राही हैं। इसके अलावा एपीएल कूपनधारी अलग से। इससे ज्यादा लोगों के कार्ड ग्रामीण क्षेत्रों में बने हुए हैं। आबादी के मान से अपात्र लोगों की संख्या 12 फीसदी है। इनमें ग्रामीण क्षेत्र के 15918, शहरी क्षेत्र के 8764 हितग्राही हैं। इनके अपात्र होने के बाद भी राशन जारी होता था। अब भी कई अपात्र हितग्राही ऐसे होंगे जो पात्र बनकर राशन ले रहे हैं। चूंकि अभी सर्वे के सत्यापन का क्राइटेरिया सिर्फ सर्वे के दौरान नहीं मिलने वालों तक सीमित है। सर्वे ऑनलाइन था ऐसे में अपात्रों की सूची भी भोपाल से जारी हुई। वहीं नोटिस बोर्ड पर लगाई। 2 से 7 अगस्त का समय दावे-आपत्ति के लिए दिए गया। दो दिन की त्याेहारी छुट्‌टी के बाद 3 दिन बचे। जिन लोगों को सूचना मिली उन्होंने दावे-आपत्ति ली। यानी सिर्फ 532 लोग ही अपने आपको पात्र बताते हुए दावे-आपत्ति देने आगे आए। इन्होंने अपने आपको अपात्रों की सूची से बाहर नहीं करने की अपील की। अब दावे-आपत्तियों का निराकरण होगा।

इन अपात्रों में सक्षम परिवारों के कार्डधारी नहीं हैं
3 साल पहले नपा द्वारा किए सर्वे में 1551 परिवार ऐसे थे जिनके कूपन बने थे और पात्रता से बाहर थे। फिर नपा ने अपात्र बीपीएल कार्डधारियों से राशनकार्ड जमा करने का कहा तो सिर्फ 251 लोगों ने जमा कराए। बाकी 1300 लोगों ने अब तक राशनकार्ड जमा नहीं कराए। इसके बाद से वे गरीब बनकर का राशन ले रहे हैं। शासन ने जिन अपात्रों की सूची जारी की है, इसमें वे शामिल हैं जो सर्वे के दौरान मौके पर नहीं मिले। जो मृत हो गए, विवाह के बाद अन्यत्र चले गए, डुप्लीकेट दर्ज, लापता व अन्य कारणों के शामिल हैं। इनमें वे कार्डधारी नहीं आए जो सुख-सुविधाओं से संपन्न हैं और पात्र बनकर राशन ले रहे हैं। मापदंडों के मुताबिक तो कूपन का लाभ सिर्फ जरूरतमंद व गरीब परिवारों को मिलना चाहिए। उनके चक्कर में कई वास्तविक गरीब वंचित रह रहे हैं।

तहसील-एसडीएम कोर्ट में लोग नहीं आए
शहरी उपभोक्ताओं को आपत्ति देने के लिए एसडीएम कार्यालय, ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिए आपत्ति तहसील कार्यालय में दी जाना थी। आवेदन के साथ समग्र आईडी, संबंधित योजना का प्रमाण-पत्र, पूरे परिवार के सदस्यों के आधारकार्ड की प्रति जमा कराना होगी। इसके बाद उनका निराकरण होगा। जितने अपात्रों को लिस्टेड किया था उनमें से गिने-चुने लोगों ने ही आवेदन देकर आपत्ति दर्ज कराई।

जो आए नहीं अब उनके नाम काटने की प्रोसेस होगी
सहायक खाद्य आपूर्ति अधिकारी पीके अहिरवार ने बताया ब्लॉक में राशन लेने वाले उपभोक्ता परिवारों व सदस्यों का सर्वे व सत्यापन करवाया था। इसमें 24 हजार 682 अपात्र सदस्य निकले हैं, जिनके नाम काटने के लिए प्रस्तावित सूची का सार्वजनिक तौर पर प्रकाशन किया गया। 7 अगस्त तक दावे-आपत्ति प्रस्तुत करना थे। तीन दिन में 532 लोगों ने आवेदन दिए। जो आए नहीं अब उनके नाम काटने की प्रोसेस होगी।

समय कम होने से लोग नहीं ले पाए आपत्ति

आलोट | राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा पोर्टल पर दर्ज हितग्राहियों का भौतिक सत्यापन पूर्व में हो चुका है। अपात्र लोगों की सूची नप कार्यालय में चस्पा की और आपत्ति ली गई। समय अवधि कम होने से कम ही लोग आपत्ति दर्ज करवा पा रहे हैं। अवधि नहीं बढ़ाई तो कई अपात्र हो जाएंगे। कार्यालय पर सूची भी अंग्रेजी में लगाई है, इस कारण हितग्राही नाम भी नहीं ढूंढ पा रहे हैं। भाजपा नेता दिनेश कोठारी, जियोस सदस्य अनिल भरावा ने कलेक्टर से दावे-आपत्ति का समय बढ़ाने की मांग को लेकर एसडीएम एमएल आर्य को ज्ञापन सौंपा। इसमें उन्होंने कहा वार्ड अनुसार सूची बनाई जाए ताकि नाम ढूंढने में आसानी हो। उन्होंने दावे-आपत्ति का समय 20 दिन बढ़ाने की मांग की। इस संबंध में सांसद अनिल फिरोजिया को अवगत कराया है।

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