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विरोध:3 माह में मंडी को 2 करोड़ टैक्स का घाटा, अब 1 रु. बढ़ाकर 1.70 रु. टैक्स वसूली शुरू

जावरा13 दिन पहले
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  • मॉडल मंडी एक्ट में मंडियों के बाहर बिना टैक्स कारोबार की छूट मिलने से व्यापारी खफा हुए थे

मॉडल मंडी एक्ट और नए कृषि कानूनों में मंडी परिसर के बाहर बिना टैक्स कारोबार करने पर छूट है। इससे मंडियों के अंदर कारोबार करने वाले व्यापारी डरे हुए थे। इसलिए राज्य सरकार ने नवंबर में मंडी के अंदर की टैक्स दरें भी 1 रुपए प्रति सैंकड़ा घटाकर मात्र 50 पैसे कर दी थी। इसमें 20 पैसे निराश्रित शुल्क जोड़कर व्यापारियों को 70 पैसे टैक्स भरना पड़ रहा था। अब सरकार ने 14 फरवरी से छूट समाप्त करते हुए 1.70 रुपए टैक्स वसूली शुरू कर दी। इससे व्यापारियों में नाराजगी है और वे पुन: आंदोलन की रणनीति बनाने में जुट गए हैं। इधर तीन महीने के दरमियान जावरा मंडी को करीब दो करोड़ से ज्यादा का टैक्स घाटा हुआ है। प्रदेशभर में यह आंकड़ा अरबों में है।

जावरा कृषि उपज मंडी प्रदेश की ए ग्रेड मंडियों की श्रेणी में शामिल है। यहां सालाना 15 से 17 करोड़ रुपए मंडी टैक्स जमा होता है। हर महीने औसत सवा करोड़ रुपए टैक्स जमा होने से मंडी के वारे-न्यारे थे। व्यापारियों के विरोध के बाद राज्य सरकार ने 6 नवंबर 2020 से टैक्स दरें घटा दीं और 14 नवंबर से ये लागू कर दी गईं। तब से 14 फरवरी के बीच तीन महीने मंडी को औसत 35 से 40 लाख रुपए की मासिक आय ही हुई। सीधे तौर पर दो करोड़ से ज्यादा का नुकसान उठाना पड़ा है। अब 14 फरवरी से वापस पुरानी दरों पर टैक्स वसूली शुरू होने से रेवेन्यू बढ़ गया और औसत 4 लाख रुपए रोज की आमदनी होने से मंडी प्रशासन तो प्रसन्न है लेकिन व्यापारियों को यह रास नहीं आ रहा है।

मंडी प्रभारी सचिव सुरेश शर्मा का कहना है कि शासन ने तीन महीने की छूट दी थी और ये सॉफ्टवेयर में ऑटो अपडेट था। जैसे ही तीन महीने पूरे हुए 14 फरवरी से वापस पुरानी दरों पर टैक्स वसूली शुरू हो गई। इसे कम करना या नहीं करना शासन के अधिकार क्षेत्र का मामला है। ये जरूर है कि टैक्स रेट कम होने से तीन महीने में मंडी को दो करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ है।

अभी बाहर खरीदी नहीं हो रही, आगे हुई तो अंदर कौन आएगा

मंडी व्यापारी संगठन अध्यक्ष पवन पाटनी का कहना है कि मॉडल मंडी एक्ट व नए कृषि कानूनों में निजी मंडियों का प्रावधान है और मंडी के बाहर जो खरीदी हो रही थी, उसे टैक्स फ्री कर रखा था। यदि सारी उपज बाहर बिकेगी तो अंदर जो लाइसेंसी व्यापारी हैं, उनका क्या होगा। इसलिए अंदर भी टैक्स में छूट की मांग व्यापारी महासंघ ने की थी ताकि अंदर-बाहर किसानों की उपज समान रेट में बिके और व्यापारियों का भी नुकसान नहीं हो। अभी चूंकि निजी मंडियां अथवा बाहर की खरीदी बंद है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने नए कानून लागू करने पर अस्थायी रोक लगा रखी है। जैसे ही रोक हटेगी या सरकार कानून लागू करेगी तो फिर यही स्थिति निर्मित होगी।

इसलिए टैक्स घाटा हुआ यह कहकर टैक्स की पुरानी दरें लागू करना गलत है। व्यापारी महासंघ प्रदेश स्तर पर सीएम व अन्य मंत्रियों से मिलकर टैक्स में छूट के नियम वापस लागू करने की मांग कर रहे हैं। यदि ऐसा नहीं हुआ तो वापस मंडी बंद आंदोलन की तरफ बढ़ना मजबूरी होगी।

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