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एक दिन में शादी:सुबह बारात, दिन में सगाई, शाम को फेरे, रिसेप्शन कर हो गई विदाई

जावरा2 महीने पहले
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आठ महीने के इंतजार के बाद बुधवार को देवउठनी ग्यारस पर देव उठे और ढोल-ढमाकों के साथ शादियों के सीजन का श्रीगणेश हो गया हुआ। इन समारोह में दिखावे के बजाय सादगी नजर आ रही है। सामान्य दिनों में 1000 से ज्यादा लोगों का रिसेप्शन होना आम बात है इस बार संख्या कम होने के साथ ही आयोजन मनाने के तरीकों में भी बदलाव हुआ है। जो लोग पत्रिका बंाट चुके थे उन्होंने मेहमानों को मना करने के बजाय अलग-अलग समय बुलाकर स्नेहभोज दिया। पहले दिन 25 से ज्यादा जोड़े परिणय सूत्र में बंधे। आलम ये हैं कि दो दिन में वैवाहिक आयोजनों की अनुमति के लिए 220 अर्जियां आईं। इसका मेन कारण लॉकडाउन में शादियां न हो पाने की कसर है। एक ट्रेंड यह भी आया है कि शादी के कार्ड में बाल मनुहार के साथ कोरोना से सावधानी रखने का आग्रह किया जा रहा है ताकि शादी में खुशियां आए, कोरोना नहीं। कोरोना संक्रमण के बीच इस बार शादियों पर प्रशासन की नजर है। आयोजन स्थल पर भीड़ ना जुटे और निर्देशों का पालन हो, इसलिए पुलिस जवान गश्त कर रहे है। लोग विवाह समारोह में भीड़ से बच रहे हैं। आलम ये हैं कि तीन से चार दिन चलने वाली शादी एक दिन में निपट रही है। कोई तो चट मंगनी पट ब्याह वाली कहावत चरितार्थ कर रहा है। कोरोना गाइडलाइन के नियमों के बीच ऐसा ही मामला रिद्धि-सिद्धि एक्सटेंशन में देखने को मिला। बैरागी परिवार ने इकलौती बेटी की शादी एक दिन में कर दी। परिवार के दिनेश बैरागी ने बताया विवाह समारोह की अनुमति की सभी शर्तों का पालन करते हुए विवाह किया। दो दिन के प्रोग्राम को एक दिन में मैनेज किया। सुबह बारात बुला ली थी। जो चित्तौड़ से आई। दोपहर में तिलक-चीढ़ी व सगाई की रस्म अदा हो गई। शाम को दूल्हा-दुल्हन के फेरे हो गए। रात 7 बजे से मेहमानों का आना शुरू हो गया। ढाई घंटे चले रिसेप्शन में टुकड़ों में 20-25 लोग आते गए और दूल्हा-दुल्हन को आशीर्वाद दिया। पूरे रिसेप्शन 150 लोगों के बीच निपट गया। इसके बाद दुल्हन की विदाई की रस्म हुई। बैरागी ने बताया इच्छा तो थी कि घर की इकलौती बेटी की शादी धूमधाम से करेंगे, कोरोना के कारण कम लोगों की मौजूदगी में प्रोग्राम रखा और सबकुछ अच्छे से निपट गया।

आयोजकों को प्रशासन का, मेहमानों को कोरोना का डर

बिना अनुमति विवाह करने व निर्देशों का पालन नहीं करने पर प्रकरण दर्ज करने का डर आयोजकों को सता रहा है। इधर शादी में बुलाएं जाने वाले मेहमानों को कोरोना का डर है। यही कारण है कि पंडालों में सीमित संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। आयोजक कार्यक्रम स्थल पर व्यवस्था को लेकर गंभीर है। ऐसा न हो कि अचानक रंग में भंग पड़ जाए। प्रोसेशन को लेकर पाबंदी है ऐसे में नगर में प्रोसेशन नहीं निकला। धर्मशालाओं के बाहर जहां देररात तक मेहमानों की आवाजाही रहती थी वो खत्म हो रही। मेहमान भी नाइट कर्फ्यू के चक्कर में जल्दी खाना खाकर घर पहुंच रहे हैं।

बिना अनुमति विवाह नहीं, ऐसे में अर्जियां बढ़ीं
कोरोना को लेकर प्रशासन सतर्क नजर आ रहा है। बिना अनुमति विवाह या उसमें 100 से अधिक लोगों के शामिल होने पर कड़ी कार्रवाई के आदेश से आयोजकों और विवाह वाटिका संचालकों में खलबली बची है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दो दिन में विवाह आयोजन की अनुमति के लिए 220 अर्जियां एसडीएम कार्यालय में आई। कई आयोजक एनवक्त पर रस्में व मेहमानों की संख्या सीमित कर रहे हैं। लोगों ने महिला संगीत सहित कई रस्मे अपने घर पर ही निपटा रहे हैं।

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