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तैयारी:जलसंकट से बचने के लिए नए स्राेत तलाशना शुरू, 3 विभागाें के इंजीनियरों को दी जिम्मेदारी

जावरा2 महीने पहले
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  • खोड़ाना तालाब, रूपनिया के डेड स्टोरेज समेत अन्य विकल्पों का सर्वे कर 26 के पहले देंगे रिपोर्ट

नगर में पेयजल की पूर्ति मौजूदा व आगामी समय की सबसे बड़ी चुनौती है। अभी नगर की आबादी 85 हजार है और इन्हें नगरपालिका एक दिन छोड़कर पानी दे रही है। वह भी 70 लीटर प्रति व्यक्ति के हिसाब से जबकि सरकारी मानक 135 लीटर राेज प्रति व्यक्ति है। एक दिन छोड़कर पानी देने के बावजूद गर्मी में मलेनी बैराज दम तोड़ देता है और पेयजल परिवहन करना पड़ता है इसलिए नए स्त्रोत की तलाश है। पहले नपा ने जल निगम को पत्र लिखकर लावरिया डेम से पानी लाने की योजना में नगर को शामिल करने की मांग की थी लेकिन जल निगम ने मना कर दिया। प्रशासन ने पीएचई, जल संसाधन एवं नपा इंजीनियरों की संयुक्त टीम बनाकर नए जलस्त्रोत तलाशने की जिम्मेदारी सौंपी है। इन्हें 26 जनवरी पहले रिपोर्ट देना है। नगर में राेज पर्याप्त पानी सप्लाई करने के लिए कम से कम 6 एमसीएम और अधिकतम 7 एमसीएम पानी की जरूरत है। जबकि नपा के पास एकमात्र मलेनी बैराज जलस्त्रोत है और उसकी क्षमता महज 2 एमसीएम ही है। बाकी 4 से 5 एमसीएम पानी का नया स्त्रोत तलाशना है। हालांकि ये इतना आसान नहीं है क्योंकि आसपास ऐसा कोई बड़ा स्त्रोत नहीं है। ना ही कोई बारहमासी नदी है कि नया डेम बनाकर पानी की पूर्ति कर सकें इसलिए नगरपालिका ने जल निगम को पत्र लिखा था। जल निगम जावरा विधानसभा क्षेत्र के करीब 252 गांवों में पानी सप्लाई करने के लिए योजना बना रहा है और माही नदी के लावरिया डेम से पानी लाया जाएगा। इसी में जावरा को जोड़ने का आवेदन नपा ने दिया लेकिन जल निगम ने ये कहते हुए मना कर दिया कि लावरिया डेम में इतना पानी नहीं कि गांवों के साथ ही पूरे शहर को आगामी 30 साल तक पानी की पूर्ति कर सकें इसलिए अब फिर से प्रशासन ने ही अपने स्तर पर नया स्त्रोत तलाशने की कवायद शुरू की है।

पहले दिए निर्देश पर कुछ नहीं हुआ, अब बनाएंगे कमेटी

तीन महीने पहले भी एसडीएम ने पीएचई, नपा व जल संसाधन विभाग की बैठक लेकर जलस्त्रोत तलाशने के निर्देश दिए थे लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ इसलिए अब तीनाें विभागों के इंजीनियरों की कमेटी बनाई जा रही है ताकि जिम्मेदारी के साथ काम हो सके। कमेटी बनाने से पहले सर्किट हाउस में विधायक डॉ. राजेंद्र पांडेय, एसडीएम राहुल धोटे ने नपा सीएमओ डॉ. केएस सगर, जल संसाधन एसडीओ हरीश कुमावत एवं पीएचई इंजीनियर इरफान अली के साथ बैठक की। करीब दो घंटे तक विचार हुआ। इसमें तमाम पहलू पर विचार किया लेकिन आसपास कहीं कोई स्त्रोत नजर नहीं आया इसलिए तीनों विभागांे के इंजीनियरों की संयुक्त टीम बनाकर सर्वे का निर्णय लिया। ये टीम आसपास नए स्त्रोत डेवलप करने के लिए सर्वे करेगी और 26 जनवरी से पहले एसडीएम को रिपोर्ट पेश करेगी। इसमें जो उपयुक्त होगा, उस प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया जाएगा।

दो-तीन विकल्प तलाशेंगे- आसपास ऐसा कोई स्त्रोत नहीं है, जिससे कि पूरे शहर की 30 साल तक प्यास बुझाई जा सके। अलग-अलग दो-तीन विकल्प देखना होंगे और सभी को मिलाकर पूर्ति करना पड़ेगी। जल संसाधन एवं पीएचई इंजीनियरों ने सुझाव दिया कि खोड़ाना तालाब का पानी हर साल बहा दिया जाता है। इसके नीचे तरफ सरसौदा या अन्य किसी जगह डेम बना सकते हैं। वहीं रूपनिया जलाशय में जो डेड स्टोरेज है, उसके पानी का भी उपयोग कर सकते हैं। मचुन डेम अथवा अन्य किसी स्त्रोत से भी पानी लेना पड़ सकता है। इन तीनों काे किसी एक सम्पवेल तक लाकर फिर नगर में सप्लाई की जा सकती है। इन सभी बिंदुओं पर तकनीकी टीम सर्वे करेगी कि यह कैसे संभव होगा। पूरी डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाई जाएगी। नपा सीएमओ डॉ. केएस सगर ने बताया सर्वे के बाद समग्र प्रोजेक्ट बनाकर शासन को भेजेंगे। ।

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