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निकला हल:गांव के विद्यार्थी नजदीकी हायर सेकंडरी में कर सकते हैं पढ़ाई

जावरा2 महीने पहले
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  • बोर्ड की परीक्षा की तैयारी शुरू लेकिन छात्रावास अब भी बंद, इनमें रहकर अध्ययन करने वालाें काे एग्जाम की टेंशन

बोर्ड की परीक्षा की तैयारी के लिए अब स्कूल खुल चुके हैं। बच्चों की संख्या बढ़ना शुरू हो गई है। जो बच्चे छात्रावास में रहकर अध्ययन करते थे, वे छात्रावास नहीं खुलने से पढ़ाई से दूर होते जा रहे हैं। उन्हें बोर्ड एग्जाम की टेंशन सता रही है। एक तरफ उनके पास ऑनलाइन पढ़ाई के लिए मोबाइल नहीं, दूसरा गांव से शहर आना-जाना उनके लिए महंगा साबित हो रहा है। कई बार वाहन नहीं मिलते, तो कभी मौसम खराब होने के कारण स्कूल बंक करना पड़ता है। अगर छात्रावास खुल जाते तो स्कूल नजदीक होने के कारण पढ़ाई करने में आसानी होती। कोविड के कारण छात्रावास खुलने पर अभी संशय है। ऐसे में स्टूडेंट्स के लिए वैकल्पिक व्यवस्था है कि वह अपने नजदीकी हाई व हायर सेकंडरी स्कूल में क्लासेस अटैंड कर सकते हैं। स्कूल प्रबंधन चाहें तो बच्चे के मूल स्कूल प्राचार्य से चर्चा कर इसकी पुष्टि कर सकता है। 19 दिसंबर से ब्लॉक के 27 हाईस्कूल व हायर सेकंडरी स्कूलों में दसवीं व बारहवीं की कक्षाएं नियमित लगना शुरू हो गई हैं। चूंकि सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले ज्यादातर बच्चे ग्रामीण क्षेत्रों से होते हैं। इनमें आलोट, ताल, पिपलौदा से भी बच्चे आते हैं। वहीं कुछ को छात्रावास की सुविधाएं भी मिलती हैं। कोरोना के बाद से बंद पड़े छात्रावास अब भी बंद हैं। जो बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे उनके लिए ऑनलाइन पढ़ाई और जो जा रहे हैं वे ऑफलाइन पढ़ रहे हैं। बावजूद कई बच्चे हैं जो शिक्षा से अब भी दूर हैं। ऑनलाइन उन्हें समझ नहीं आती और ऑफलाइन के लिए स्कूल जाना मुश्किल है। चूंकि कई इलाकों में बसों की सुविधा नहीं है, ऐसे में बच्चे पहले दो से तीन किमी पैदल, फिर ऑटो और फिर बस से स्कूल तक का सफर तय करते हैं। ठंड में इस तरह दौड़-भाग करना मुश्किल है। अभी जो बच्चे ठंड में ठिठुरते हुए स्कूल पहुंच रहे हैं उन्हें 40 से 50 रुपए राेज खर्च करना पड़ रहे हैं। सबकुछ अनलॉक होने के बाद भी छात्रावास न खोलना समझ से परे है।

शहर में दो छात्रावास, बच्चों की संख्या करीब 60- शहर में कन्या व बालक मिलाकर दो छात्रावास हैं। ये जब से बंद हुए हैं तब से बच्चे गांव में ही बंधकर रह गए हैं। छात्राओं के अनुसार 20 से 30 किमी की दूरी ऐसी ठंड में आना-जाना मुश्किल है। मजबूरी कि बोर्ड की परीक्षा है तो राेज 40 से 50 रुपए खर्च कर स्कूल पहुंचते हैं। कुछ की स्थिति ठीक नहीं होने के कारण वे नहीं पहुंच पातीं।

आईडी कार्ड दिखा किसी भी स्कूल में पढ़ सकते हैं

डीईओ केसी शर्मा ने बताया कि छात्रावास खोले जाने को लेकर अभी कोई आदेश नहीं मिले हैं। इसकी एक वजह कोरोना हो सकता है। लेकिन छात्रावास में पढ़ने वाले बच्चे चाहें तो अपने नजदीकी हाईस्कूल व हायर सेकंडरी स्कूल में जाकर अध्ययन कर सकते हैं। ये वैकल्पिक व्यवस्था है। उन्हें नजदीकी स्कूल में अपना आईडी कार्ड दिखाना होगा। परमिशन जैसा कुछ नहीं है लेकिन संबंधित स्कूल प्रभारी वेरिफिकेशन के लिए मूल स्कूल से चर्चा कर बच्चे की जानकारी कंफर्म कर सकता है।

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