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फजीहत:विक्रेता हाजिर होकर कहे कि मुझे आपत्ति नहीं तभी क्रेता का हो पा रहा है नामांतरण

जावरा2 महीने पहले
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  • पहले रजिस्ट्री के साथ आवेदन-पत्र पर विक्रेता के हस्ताक्षर से हो रहे थे नामांतरण

रजिस्ट्रार कार्यालय में रजिस्ट्री के बाद राजस्व रिकाॅर्ड में क्रेता का नाम चढ़ाने यानी नामांतरण करवाने में लोगों को चक्कर काटना पड़ रहे हँ। महीनेभर पहले तक ऐसी परेशानी नहीं थी लेकिन रजिस्ट्री होने के बाद जैसे ही क्रेता नामांतरण आवेदन देता है नए नियमों का हवाला देकर उसे कहा जा रहा है कि विक्रेता को लेकर कार्यालय में उपस्थित हो। धारा 18 (4) का शपथ-पत्र दें, जिसमें विक्रेता ये सहमति देगा कि हां मैंने जमीन बेची है और नामांतरण पर मुझे आपत्ति नहीं है। तभी नामांतरण होगा। इस नई व्यवस्था से क्रेताओं की फजीहत बढ़ गई है। क्रेताओं का कहना है जो विक्रेता रजिस्ट्रार कार्यालय में प्रत्यक्ष उपस्थित होकर जमीन बेच कर पैसे गिन चुका है। वह वापस आए, ये जरूरी नहीं। कई लोग तो जानबूझकर भी उपस्थित नहीं होते और इस बहाने क्रेता से और पैसे ऐंठने की सोचते हैं। यही वजह है कि क्रेतागण परेशान हैं। हालांकि एक नियम ये भी है कि तहसील कार्यालय से एक सूचना-पत्र विक्रेता को जाना चाहिए। उसके बाद भी 15 दिन तक यदि विक्रेता आपत्ति दर्ज नहीं करवाए तो यह मानकर एक पक्षीय नामांतरण करना चाहिए कि विक्रेता को आपत्ति नहीं है। यहां ऐसा नहीं हो रहा और लोग परेशान हो रहे है। प्रॉपर्टी ब्रोकर एसोसिएशन का एक प्रतिनिधि मंडल पिछले दिनों इसे लेकर एसडीएम से मिला। प्रतिनिधि मंडल में शामिल शरद डूंगरवाल, हेमंत श्रीमाल, अनिल नांदेचा, अजय बैरागी, ललित भंडारी ने एसडीएम से कहा कि रजिस्ट्रार कार्यालय में विक्रेता प्रत्यक्ष उपस्थित है। उसका आधार कार्ड लगा है। उसका लाइव फोटो खींचा जा रहा है। वह रजिस्ट्रार कार्यालय में सहमति दे रहा है तो फिर उसे नामांतरण के लिए बुलाना कहां तक सही है। कई विक्रेता जानबूझकर नहीं आते हैं। कुछ बुजुर्ग या महिलाएं होती हैं, जिन्हें बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाना ठीक नही लगता। इसलिए इस व्यवस्था में बदलाव करते हुए पुरानी व्यवस्था लागू करें। प्रॉपर्टी ब्रोकर शरद डूंगरवाल ने बताया हमें एसडीएम ने आश्वस्त किया कि यदि सूचना-पत्र के बावजूद विक्रेता नहीं आता है तो एक पक्षीय नामांतरण करवाएंगे। एक अन्य प्रॉपर्टी ब्रोकर अनिल सांईवाल का कहना है कुछ मामलाें में अभी भी नियम फॉलो नहीं किए जा रहे हैं। क्रेता पर ही विक्रेता को बुलाने का दबाव बनाया जा रहा है। ऐसे में नामांतरण अटके हुए हैं। प्रशासन को व्यवस्था में सरलीकरण तो करना ही चाहिए।

ऑनलाइन सूचना जा रही, इसलिए दिक्कत नहीं होना चाहिए

रजिस्ट्रार महेश कश्यप के मुताबिक रोज औसत 25 रजिस्ट्रियां हो रही है। इनमें कृषि व अन्य भूमियां व संपत्तियां शामिल हैं। कृषि भूमियों के मामले में तो आरसीएमएस पोर्टल पर यह व्यवस्था है कि जैसे ही रजिस्ट्री होगी, ऑनलाइन तहसील कार्यालय के पोर्टल पर नामांतरण की सूचना चली जाएगी। फिर क्रेता रजिस्ट्री व आवेदन पेश करता है। इस आधार पर नामांतरण में दिक्कत नहीं होना चाहिए। यदि तहसील के कोई नए नियम आए है तो इसकी जानकारी हमें नहीं है। रजिस्ट्रार का कहना है अब तक तो कृषि भूमियों के नामांतरण की स्व-सूचना तहसील कार्यालय में जा रही है आने वाले समय में नगर व पंचायत सीमा क्षेत्र की अन्य संपत्तियों की रजिस्ट्री होने पर भी ऐसे ही सूचनाएं जाएगी, इसकी तैयारी विभाग स्तर पर चल रही है।

कई बार आपत्तियां बाद में आती हैं, उपस्थिति जरूरी
^विक्रेता को धारा 18 (4) के शपथ-पत्र के साथ तहसील कार्यालय में उपस्थित होकर नामांतरण के लिए सहमति देना जरुरी है। ये नियम भी है। कई बार नामांतरण होने के बाद विक्रेताओं की तरफ से आपत्तियां आती है। ऐसी स्थिति से बचने के लिए शपथ-पत्र व विक्रेता की समक्ष में सहमति ली जा रही है। इसमें कुछ गलत नहीं है।
-बीएल बामनिया,
तहसीलदार जावरा

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