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फोरलेन पर अनदेखी:ट्रैफिक सिग्नल 8 साल से बंद, एक दिन में हो सकते हैं ठीक लेकिन कराए कौन

जावराएक महीने पहले
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  • ट्रैफिक सिग्नल चालू नहीं होने से वाहनों की रफ्तार बेलगाम, दोनों तरफ से क्रॉसिंग में होते हैं हादसे

जावरा-मंदसौर फोरलेन चौपाटी चौराहे पर साल 2010 में लगे ट्रैफिक सिग्नल चालू होने से पहले टूटने लगे हैं। जिन सिग्नलों के माध्यम से ट्रैफिक कंट्रोल व यातायात समस्या हल हो सकती थी वो जवाबदारों की अनदेखी के चलते और उपयोग में नहीं लाने के कारण खराब हो गए हैं और अब सिर्फ चौराहे की शोभा बढ़ा रहे हैं।

नतीजा लोग बेरोकटोक गाडियां दौड़ाते हुए रोड क्राॅस करते हैं, ये जानते हुए कि किसी की जान भी जा सकती है। इधर प्रशासनिक अधिकारी सुस्त रवैया अपनाते हुए लापरवाही बरत रहे हैं। जबकि प्रशासन चाहे तो ट्रैफिक सिग्नल एक दिन में ठीक हो सकते हैं अधिकारी किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं। जावरा-नयागांव फोरलेन 2009 में चौपाटी से होकर निकला था तब पिपलौदा रोड चौराहे पर कई एक्सीडेंट हुए।

काफी विरोध, ज्ञापन के बाद एमपीआरडीसी ने चौराहे पर ट्रैफिक सिग्नल लगाएं। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों को सिग्नलों का उपयोग व हर साल मेंटेनेंस करना था। लेकिन ऐसा नहीं हुआ और सिग्नल बारिश से पुरी तरह खराब हो गए। जब हादसे में कुछ लोगों की जान चली गई तो सिग्नलों के संचालन की मांग शुरू हुई तब ट्रैफिक पुलिस ने संचालन व नगरपालिका ने मेंटेनेंस की हां की थी।

तकनीकी खराबी के कारण वे चालू नहीं हो सके। बीच में एक-दो बार प्रयास हुए लेकिन बाद में वे फिर खराब हो गए। ऐसे में जब से ट्रैफिक सिग्नल लगे, इसके बाद से ही बंद है। लोगों ने भी अब सिग्नलों को नजर अंदाज करना शुरू कर दिया है।

यातायात पुलिस सिग्नलों को चालू करने के लिए गंभीर नहीं दिख रही, वहीं नगरपालिका भी इनकी मरम्मत कराने के लिए शिकायत व पत्र आने का इंतजार कर रही है। दस सालों में ट्रैफिक सिग्नल वाले भीमाखेड़ी फाटक चौराहे, चौपाटी चौराहे पर हादसे हो चुके है। इनमें से कुछ लोगों की मौत हो चुकी है और कई लोग घायल भी हुए। ट्रैफिक सिग्नल चालू होने से कम से कम हादसे होंगे ।

पिपलौदा रोड चौराहे पर क्रॉसिंग में होती है घटना

पिपलौदा रोड चौराहा सबसे व्यस्ततम चौराहा है। यहां चारों दिशाओं से वाहन गुजरते है। कई बार तो हादसे से लोग बाल-बाल बचते है। वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए सिग्नल लगे है लेकिन वे बंद पड़े है। कुछ पुरी तरह खराब हो गए तो कुछ में टुट-फूट हो गई। फोरलेन पर वाहनों का दबाव अधिक रहता है। फोरलेन के दूसरी तरफ नर्सिंग होम, स्कूल, कॉलोनियां, दुकानें, पेट्रोल पंप आदि हैं। लोग जल्दी निकलने के चक्कर में ध्यान नहीं देते और फोरलेन क्रास कर लेते हैं।

सिग्नल चालू होने पर ये फायदे होंगे

चौराहे पर लगे ट्रैफिक सिग्नल चालू होने से तेज रफ्तार वाहनों पर कंट्रोल बनेगा। दुर्घटना का डर कम होगा। कम अमले में काम करना आसान होगा। चौराहे पर सिर्फ सिग्नल ऑपरेट करने के लिए एक जवान लगेगा। इससे फोरलेन चौराहा पूरी तरह सुरक्षित हो जाएगा।

नपा की तरफ से रिस्पांस नहीं

ट्रैफिक पुलिस इंचार्ज कैलाश बघेल ने बताया सिग्नल चालू करवाने के लिए नगरपालिका से चर्चा की थी। इसके बाद रिमाइंडर भी किया लेकिन अभी तक ठोस कदम नहीं उठाए गए है। जबकि सिग्नल चालू है, सिर्फ कनेक्शन जोड़कर टाइमर सेट करवाना है। एक-दो दिन में फिर से नपा अधिकारियों से चर्चा करेंगे।

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