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लाखों का घोटाला:17 सोसायटियों ने गेहूं खरीदी में किया 62 लाख रुपए का घोटाला

मंदसौर/ शामगढ़11 दिन पहले
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  • सरकार ने 16.74 रुपए खरीदी व्यय एवं 8 रुपए माल गोदाम तक पहुंचाने के तय किए, सोसायटियों ने इसमें 16 रुपए अतिरिक्त जोड़कर ली राशि

गेहूं खरीदी के दौरान जिले की 17 सोसायटियों द्वारा 62 लाख रुपए का घोटाला करने का खुलासा हुआ है। यह एक किसान द्वारा सूचना के अधिकार में जानकारी मांगने के बाद शुरू हुई जांच में सामने आया। अधिकारी फाइनल फिगर अंतिम जांच के बाद सामने आने की बात कह रहे हैं। 2020-21 में मार्केटिंग एवं प्राथमिक कृषि साख सहकारी संस्थाओं ने गेहूं व चने की खरीदी की।

सरकार ने खरीदी व्यय 16.74 रुपए एवं गोदाम तक माल पहुंचाने के लिए 8 रुपए तय किए थे। सोसायटियों ने खरीदी व्यय बढ़ाकर लिया। इससे करीब 62 लाख रुपए का घोटाला हुआ। खुलासा तब हुआ जब चंदवासा निवासी भारतसिंह पंवार ने खर्च को लेकर चंदवासा सोसायटी से जानकारी ली। इस पर गड़बड़ी सामने आई। भारतसिंह ने 4 दिसंबर 2020 को कार्यालय उपायुक्त सहकारिता एवं लोक सूचना अधिकारी से आरटीआई के तहत जिले की सभी 87 सोसायटियों में हुए खर्च का हिसाब मांगा लेकिन जानकारी नहीं दी गई।

उन्होंने प्रथम अपील की। प्रथम अपीलीय अधिकारी एवं संयुक्त रजिस्ट्रार सहकारी सोसायटी संभाग उज्जैन ने 8 फरवरी 2021 काे 15 दिन के अंदर जानकारी प्रस्तुत करने के आदेश जारी किए। इसके पहले लोक सूचना अधिकारी ने 1 जनवरी 2021 को अपीलार्थी को सूचित किया कि कार्यालय के अंकेक्षण कक्ष से प्राप्त टीप के अनुसार 2020- 21 के समर्थन मूल्य केंद्रों से संबंधित गेहूं एवं चना के संबंध में संस्थाओं द्वारा कार्यवाही पुस्तिका संधारित की जाती है। बिल वाउचर भी संस्था के केंद्र द्वारा बनाए जाते हैं। इस पर अपीलार्थी ने आयुक्त सहकारिता को शिकायत की।

इस पर संयुक्त आयुक्त ने 8 जून को जांच के निर्देश दिए। जांच टीम में सहकारी निरीक्षक टी.आर. शर्मा, अंकेक्षण अधिकारी पी.के. बडोनिया, अजयपालसिंह बिलोदिया शामिल हुए। जांच दल को सभी संस्थाओं के दस्तावेज नहीं मिले इसलिए अब तक जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं किया गया। हालांकि एक अंतरिम जांच प्रतिवेदन दिया। इसमेंं 17 सहकारी समितियों की कार्यवाही पुस्तिका के अनुसार स्वीकृत व्यय, क्लेम-पत्र के अनुसार राशि में एवं शॉर्टेज के रूप में लगभग 62 लाख 36 हजार 466 रुपए का अंतर आया।

ऑडिटर की आपत्ति पर सहमति जताई, बाद में आगे ‘अ’ लिख दिया
शिकायतकर्ता पंवार ने बताया कि सोसायटियों को प्रत्येक क्विंटल 16.74 रुपए लेना थे लेकिन गड़बड़ी करते हुए इसमें 16 रुपए प्रति क्विंटल और बढ़ाकर राशि ली। इस पर जब ऑडिटर ने आपत्ति ली तो सहकारिता निरीक्षक अनिलकुमार जैन ने पहले तो सहमति जताई लेकिन शिकायत के बाद सहमति के आगे अ लिखकर असहमति कर दिया। जैन का कहना है कि अधिक व्यय कोरोनाकाल के कारण हो सकता है। उस दौरान मंडियां बंद थीं। समितियों को डबल माल खरीदना पड़ा। मजदूरों की कमी से डबल मजदूरी देना पड़ी।

सीमा से अधिक व्यय करना पाया
जांच अधिकारी अजयपालसिंह बिलोदिया बोले अंतिम प्रतिवेदन नहीं अपितु अंतरिम प्रतिवेदन है। प्रथम दृष्टया सहकारी समितियों द्वारा तय सीमा से अधिक व्यय करना पाया गया। 17 समितियों के अंकेक्षण में 62 लाख से अधिक रुपए खर्च किए जो कि संदेहास्पद हैं। सोमवार के बाद की जांच में आंकड़ों में मामूली परिवर्तन हो सकता है।

100% दोषी निकलेंगी समितियां
उपायुक्त सहकारी मनोज गुप्ता का कहना है कि जांच में सहकारी समितियां 100 फीसदी दोषी निकलेंगी। हम अभी अंतरिम जांच प्रतिवेदन के आधार पर कोई कार्रवाई नहीं कर सकते। जांच प्रतिवेदन आने के बाद दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। वसूली होगी।

1 खरीदी केंद्र पर 1 साल में 7 से 8 लाख रुपए का गबन हो रहा

आपूर्ति निगम सहकारिता विभाग की साेसायटियाें को खरीदी केंद्र बनाता है। इसके लिए निर्धारित दर पर खर्च करना होता है लेकिन अधिकारियों की सांठगांठ से साेसायटियां खर्चे को दोगुना कर लेती हैं। उदाहरण के तौर पर हम्माल को केवल 13 रुपए प्रति क्विंटल भुगतान किया जाता है लेकिन 22 रुपए के मान से राशि निकाली जाती है। ऐसे ही अन्य खर्चे लगाकर लगभग 1 खरीदी केंद्र पर 1 साल में 7 से 8 लाख रुपए का गबन हो रहा है। मामले में विपणन अधिकारी जेनिफर खान का कहना है कि भुगतान ऑडिट बिल के अनुसार किया जाता है। यदि इसमें कुछ गड़बड़ी है तो सोसायटियां जिम्मेदार हैं।

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