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  • 43 Out Of 67 Ponds And Barrages In The District Have Not Been Filled Even 40%, There Will Be Problem In The Rabi Season Itself

गंभीर है स्थिित पानी बचाना जरूरी:जिले के 67 में से 43 तालाब व बैराज 40% भी नहीं भरा पाए हैं, रबी सीजन में ही होगी दिक्कत

मंदसौरएक महीने पहले
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  • पेयजल व सिंचाई पर मंडरा सकता है संकट, विशेषज्ञ बोले : मानसून सिग्नल बेहतर, आज दोपहर में होगी अच्छी बारिश

आधा सितंबर बीतने के बाद भी जिले में तालाबों का दामन खाली है। इस साल बारिश का आंकड़ा महज 21 इंच पर ही सिमट गया है। जबकि जिले की औसत बारिश 34 इंच है। पिछले साल बारिश का आंकड़ा 86 इंच तक पहुंच चुका था। कम बारिश का असर यह है कि जलसंसाधन विभाग के 67 में से 43 तालाब व बैराज 40 फीसदी तक भी नहीं भरा पाए हैं। इनमें पर्याप्त पानी नहीं आने की वजह से कुएं एवं बोरवेल के जलस्तर पर भी असर पड़ेगा। अगर ऐसी ही स्थिति रही तो भविष्य में पेयजल संकट मंडराने के आसार हैं। हालांकि मौसम विशेषज्ञ एस.एन. मिश्रा का कहना है कि मानसून सिग्नल पॉजिटिव है, शनिवार दोपहर में अच्छी बारिश होने की संभावना है। लोकल क्लाउड को देखते हुए 23-24 सितंबर को भी अच्छी बारिश की उम्मीद है।

इन तालाब व बैराज में जीरो प्रतिशत पानी

जलसंसाधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार असावती, आक्याबिका, बहीखेड़ा, अडमालिया, चांगली, ईशाकपुरा, माेल्याखेड़ी, पाड़लियालाल मुंहा, सेमली के तालाब व बैराज में जीरो प्रतिशत पानी ही आ सका है। इससे करीब 90 हजार लाेग पानी की परेशानी से जूझेंगे और करीब 25 गांव की कृषि भूमि काे सिंचाई के लिए पानी नहीं मिलेगा।

काका गाडगिल सागर डैम : 25 फीसदी ही भरा

काका गाडगिल सागर डैम इस साल की बारिश में क्षमतानुसार 25 फीसदी तक ही भरा सका है। पूरे मल्हारगढ़ क्षेत्र में कुओं व बोरवेल के जलस्तर को बनाए रखने में डैम की अहम भूमिका रहती है। डैम से लगी 3500 हेक्टेयर जमीन सिंचित होती है। इसके साथ पिपलियामंडी नगर व मल्हारगढ़ नगर की पूरी आबादी पेयजल के लिए इसी डैम पर निर्भर है। ऐसे में माैजूदा पानी नहीं बचाया ताे आगे भीषण जलसंकट का सामना करना पड़ सकता है।

बरखेड़ानायक का तालाब : 10 फीसदी पानी भी नहीं आया

ग्रापं बरखेड़ा नायक के समीप बना तालाब हर साल लबालब रहता है जिससे करीब एक दर्जन से अधिक गांवों में जलस्तर ठीक रहता है। इस बारिश में यह तालाब 10 फीसदी भी नहीं भरा सका है। इससे जलस्तर पर असर पड़ने के साथ रबी सीजन में खेतों की सिंचाई भी प्रभावित होगी।

बोलिया रोड स्थित तालाब : 60 में से 15 फीट भरा सका

बोलिया रोड स्थित तालाब 60 फीट गहरा है। 15 फीट ही भरा सका है। तालाब क्षेत्र से 20 गांवों का जलस्तर ठीक रहता है। एक दर्जन गांवाें के किसान पानी सिंचाई के लिए उपयोग में लेते हैं। जरूरत होने पर गरोठ में पेयजल सप्लाई होती है। इस बार संभलकर पानी का उपयाेग करना हाेगा।

सीतामऊ का तालाब : 25 हेक्टेयर में बना, 50 फीसदी भराया

तालाब 25 हेक्टेयर में विस्तारित है। कैचमेंट एरिया में खेड़ा, चिकला, पतलासी, रामाखेड़ी, सेमलिया रानी, तितरोद आदि हैं। तालाब के भीतर व वेस्टवेयर में बने कुएं सीतामऊ नगर में पेयजल की आपूर्ति करते हैं। इस साल की बारिश में यह तालाब 50 फीसदी ही भरा सका है।

नाकामी : जल संरक्षण को लेकर नहीं किए उपाय

पिछले साल अतिवृष्टि के बाद भी प्रशासन ने जल संरक्षण को लेकर प्रयास किए थे। खुद कलेक्टर मनोज पुष्प ने वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को ड्रीम प्रोजेक्ट के रूप में लिया था। कलेक्टर ने नगरीय निकायों से लेकर ग्राम पंचायतों के माध्यम से वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को शासकीय भवनों व कार्यालयों में स्थापित किया। इसके साथ नए निजी भवनों के निर्माण के दौरान बारिश के पानी को संरक्षित करने के लिए कदम उठाए थे। इस साल ना तो इस तरह के अभियान चलाए गए और ना ही किसी प्रकार की सख्ती बरती गई। वहीं अतिवृष्टि के दौरान क्षतिग्रस्त हुए तालाबों का जीर्णोद्धार भी नहीं हो सका।

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