जिले में रोज पहुंच रहे 15 से 20 टैंकर:प्रशासन ने सख्ती कर बंद करवाए अवैध बायोडीजल पंप, अब जिले में शुरू हो गई बेस ऑयल की बिक्री

मंदसौर20 दिन पहले
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प्रशासन की सख्ती के बाद भी जिले में बायोडीजल के नाम पर बेस ऑइल का अवैध कारोबार जोरों पर है। राेज 15- 20 टैंकर बेस ऑइल गुजरात से जिले में पहुंच रहा है। बायो डीजल पंप सील करने के बाद बेस ऑइल फुटकर रूप में गांव-गांव तक बेचा जा रहा है।

पुलिस व प्रशासन द्वारा कार्रवाई नहीं करने से अब तक अवैध रूप से पंप संचालित करने वाले 7 लोग लाइसेंस के लिए आवेदन कर चुके हैं। इंडियन ऑइल कंपनी के अधिकारियाें के अनुसार बेस ऑइल से शासन को 120 करोड़ रुपए राजस्व का नुकसान हाे रहा है। इधर पुलिस अधिकारी मामला जनजीवन से जुड़ा नहीं होने की बात कह कर कार्रवाई से परहेज कर रहे हैं।

प्रशासन द्वारा कार्रवाई के बाद बायोडीजल पंप संचालकों में हड़कंप है। वे अब लाइसेंस प्रक्रिया में जुटे गए हैं। अब तक 7 पंप संचालकों ने आवेदन किए हैं। हालांकि पंप बंद होने के बाद भी जिले में बायोडीजल का अवैध कारोबार जारी है। वाहनों के इंजिन व पर्यावरण प्रदूषित कर लोगों का स्वास्थ्य खराब करने वाले बेस ऑइल के विक्रय पर प्रशासन पूर्ण रूप से प्रतिबंध नहीं लगा पाया है।

यह गांव-गांव तक पहुंचाया जा रहा है। डीजल के मुकाबले कम कीमत होने से लोग भी इसका भरपूर उपयोग कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में इस व्यापार से जुड़े लाेगाें के अनुसार उन्हें यह बायोडीजल (बेस ऑइल) मंदसौर से ही उपलब्ध हो रहा है। राेज 15 से 20 टैंकर गुजरात से यहां खाली हो रहे हैं।

ये टैंकर पूर्व में पंप संचालित कर रहे लोग ही मंगा रहे हैं। इन्हीं के पंपों से रात को कैनों में भरकर यह बेचा जा रहा है। बायोडीजल की खपत सबसे अधिक कृषि कार्य में उपयोग होने वाले उपकरण, ट्रक व बसों में है। ट्रक व बस ऑपरेटर विभिन्न ढाबों से ये बेस ऑइल खरीदते हैं। इन पर अब तक कार्रवाई नहीं हुई।

हो सकती है सभी पर रासुका की कार्रवाई

इंडियन ऑइल सेल्स ऑफिसर कृष्णकांत तिवारी का कहना है कि पंप संचालक बायोडीजल के नाम से लाइसेंस लेने का प्रयास कर रहे हैं। वर्तमान में जो बेचा जा रहा है वह बेस ऑइल है जिसे इंडस्ट्रियल यूज के लिए उपयोग किया जाता है। सरकार की गाइडलाइन के अनुसार 100 लीटर डीजल पर पांच लीटर बायोडीजल की मिक्सिंग की जा सकती है लेकिन यहां पूरी तरह से यही बेचा जा रहा है।

इससे हमारी 10 प्रतिशत (150 से 200 हजार लीटर) सेल घटी है जिससे शासन को करीब सालभर में 120 करोड़ रुपए टैक्स का नुकसान हो रहा है। यदि आपूर्ति विभाग जांच की बात कर रहा है तो इसका सवाल ही नहीं उठता क्याेंकि पंप संचालित करने के लिए भी 10 विभागों से एनओसी लेना होती है। विभाग एनओसी नहीं होने पर ही रासुका की कार्रवाई कर सकता है। गुजरात की तरह यदि प्रशासन यहां भी सख्ती करे तो इस पर रोक लगाई जा सकती है।

अब तक किसी काे नहीं दिया लाइसेंस
पंप बंद होने के बाद भी यदि बायोडीजल बिक रहा है तो पुलिस विभाग व इंडियन आॅइल के अधिकारियों के साथ मिलकर कार्रवाई करेंगे। प्रशासन ने अब तक किसी को भी लाइसेंस जारी नहीं किया है। जब तक सभी विभाग एनओसी नहीं देते तब तक लाइसेंस जारी होने की संभावना भी नहीं हैं।
एस.एन. गोयल, सहायक आपूर्ति अधिकारी, मंदसौर

आपूर्ति विभाग के साथ कार्रवाई करेंगे

  • बायोडीजल से वाहनों का इंजिन खराब होता है, इसका मानव पर उलट प्रभाव नहीं पड़ता इसलिए रासुका की कार्रवाई नहीं हो सकती। प्रतिबंध के बाद भी यदि बायोडीजल बिक रहा है तो इसके खिलाफ आपूर्ति विभाग के साथ मिलकर कार्रवाई करेंगे। -डॉ. अमित वर्मा, एएसपी, मंदसौर
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