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सेंचुरी में बनाया बोमा:अफ्रीकन चीते गांधीसागर में बसाएंगे, इनके खाने के लिए ला रहे चीतल, पहली खेप दीवाली तक पहुंचेगी

मंदसौर2 महीने पहले
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मंदसौर के गांधीसागर अभयारण्य में जल्द ही चीतल व उनका शिकार करते चीते दिखाई देंगे। यह पहली बार है जब गांधीसागर में वन्य प्राणियों को बाहर से लाकर बसाया जा रहा है। इसके लिए नरसिंहगढ़ सेंचुरी राजगढ़ में बोमा पद्धति से चीतल को पकड़ने का काम शुरू हो गया है। यहां से 500 चीतल गांधीसागर में छोड़े जाएंगे। इसके बाद अफ्रीका से चीते के जोड़े को लाया जाएगा। भविष्य में यहां टाइगर भी लाने की योजना है। गांधीसागर अभयारण्य 181 वर्ग किमी मंदसौर एवं 187 वर्ग किमी नीमच जिले सहित कुल 368.62 वर्ग किमी में फैला है। यहां प्रदेश में दूसरे नंबर पर सर्वाधिक गिद्ध पाए गए हैं। यहां पक्षियों की 226 से ज्यादा प्रजातियां हैं। पिछले माह भोपाल से वन्यप्राणी विशेषज्ञों के दल ने निरीक्षण किया। यहां चीतों को बसाने के लिए अफ्रीका की ही तरह घासवाले मैदान अच्छी स्थिति में पाए गए। चीतों को बसाने से पहले शासन गांधीसागर में 500 चीतल को लाने जा रहा है। दीपावली से पहले चीतल की पहली खेप को गांधीसागर में छोड़ा जाएगा। यह है बोमा पद्धति- इसमें चीतलों को बिना पकड़े एक बाड़े में घेर देते हैं। यहां से उन्हें मूव कराकर सीधे ट्रक में चढ़ देते हैं। इसके बाद अन्य स्थान पर भेजा जाता है।

इस तरह गांधीसागर को मिल रहा मौका

चीतों को लाने के लिए सन 2000 के आसपास प्रयास शुरू हुए थे। 2005-06 में जब चीते लाए जा रहे थे तो गांधीसागर की स्थिति अच्छी नहीं थी। कमेटी ने पिछले माह गांधीसागर का फिर निरीक्षण किया, यहां 80% से ज्यादा सुधार दिखा। चीते के लिए पहाड़ी घास वाले मैदान स्ट्रांग पाइंट मिले जिसके बाद यह प्रक्रिया शुरू की गई। चीतों से पहले उनके लिए चीतल को बसाया जा रहा है। भविष्य में चीतों की बसाहट व ग्रोथ के बाद टाइगर को भी बसाने की योजना शासन स्तर पर तैयार की जा रही है।

ग्रास लैंड गांधीसागर में सवाना की तरह जो चीतों के लिए फायदेमंद

वाइल्ड लाइफ भोपाल एपीसीसीएफ जसबीरसिंह चौहान ने बताया कि पहले हम चीते को लाने की बात करते थे तो नोरादेही व पुणे का ही नाम आता था। गांधीसागर में भी बहुत संभावनाएं हैं। यहां सवाना (अफ्रीका) की तरह ग्रास लैंड है। गांधीसागर के उस एरिया में कोई गांव व आबादी नहीं है जो चीते के लिए बहुत फायदेमंद है। चीतों के भोजन के लिए चीतल को लाने का काम किया जा रहा है। गांधीसागर में चीतल के पूर्ण रूप से बसने के बाद चीतों को लाएंगे। दीपावली बाद वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया से टीम आएगी जो गांधीसागर का निरीक्षण करेगी।

यहां यह है खास
गांधीसागर अभयारण्य में वृक्षों की 70 प्रजातियां, जड़ी-बूटियों और झाड़ियों की 23 प्रजातियां, लताओं और परजीवियों की 9 प्रजातियां, घासों व बांसों की 16, स्तनधारी की 18, पक्षियों की 226, मछलियों की 14, सरीसृप की 17, उभयचरों की 5, तितलियों की 15 से ज्यादा प्रजातियां पाई जाती हैं।

गांधीसागर में वन्य जीवों की स्थिति

वन्य जीव संख्या रीछ 05 तेंदुआ 53 नीलगाय 541 जंगली बिल्ली 06 जंगली कुत्ता 32 जंगली सूअर 272 लंगूर 595 भेड़िया 02 सियार 115 सेही 02 लोमड़ी 19 खरगोश 39 हायना 79 चिंकारा 199 गिद्ध 682

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