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मेडिकल कॉलेज की कवायद फिर शुरू:2 साल बाद 3 टुकड़ाें में मेडिकल कॉलेज के लिए जमीन चिह्नित कर 270 करोड़ की डीपीआर भेजी

मंदसौर8 दिन पहले
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  • बड़ा सवाल : अलग-अलग जमीन हाेने से ही रतलाम में 10 साल लेट हाे गया था प्राेजेक्ट, यहां भी एेसे हाल न हो जाएं
  • अधिकारी : टुकड़ों में जमीन समस्या नहीं, जगह पर्याप्त होना चाहिए, 4 से 5 माह में टेंडर के साथ निर्माण हाे सकता है शुरू

शहर में स्वास्थ्य सुविधा को बढ़ावा देने के लिए आखिरकार 2 साल बाद मेडिकल कॉलेज की कवायद फिर शुरू हाे गई है। शासन द्वारा नियुक्त कंसल्टेंट ने 270 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट तैयार कर स्वीकृति के लिए भेज दिया है। जिला प्रशासन ने इसके लिए तीन टुकड़ों में बायपास पर जमीन का चयन किया है। इससे प्राेजेक्ट के पूरा हाेने में संशय है। इसी तरह 3 टुकड़ों में जमीन चयनित किए जाने पर रतलाम में मेडिकल कॉलेज 10 साल लेट हाे गया था। हालांकि अधिकारियों के अनुसार टुकड़ों में जमीन कोई समस्या नहीं है।

2 साल पहले केंद्र शासन ने मंदसौर व नीमच जिले में मेडिकल कॉलेज की स्वीकृति दी। इसके लिए शासन ने 325 करोड़ रुपए स्वीकृत किए हालांकि दाेनाें ही जिलाें में स्थानीय अधिकारी व जनप्रतिनिधि इस पर तेजी से काम नहीं कर पा रहे हैं। मंदसाैर में पहले जमीन चयन में एक साल निकाल दिया। कांग्रेस की कमलनाथ सरकार के समय संजीत रोड पर ग्राम भूखी में मगरे पर जमीन चयनित की। सरकार बदलते ही जमीन अनुपयुक्त हो गई। अब जिला प्रशासन ने बायपास पर पुलिस कॉलोनी, आरटीओ कार्यालय के बीच व आसपास तीन टुकड़ों में मेडिकल कॉलेज के लिए जमीन चुनी है। पीआईयू ने सर्वे कर रिपोर्ट शासन को करीब 8 माह पहले ही भेज दी। आखिरकार अब कुछ उम्मीद जागी है। पीआईयू अधिकारियांे के अनुसार भोपाल स्तर से ही मेडिकल कॉलेज के लिए उपलब्ध जमीन के अनुसार 270 करोड़ की डीपीआर तैयार हो गई है। इसे मंजूरी के लिए स्वास्थ्य शिक्षा विभाग को भेजा है। डीपीआर को मंजूरी मिलते ही अधिकारी प्रशासनिक स्वीकृति लेने व टेंडर लगाने की बात कह रहे हैं। सबकुछ अच्छा रहा तो 4 से 5 माह में टेंडर प्रक्रिया के साथ निर्माण शुरू कर दिया जाएगा। हालांकि साथ में स्वीकृत हुए नीमच जिले में तो प्रशासन अब तक कॉलेज के लिए जमीन का चयन तक नहीं कर पाया है।

रतलाम में 2001 में स्वीकृत हुआ था काॅलेज, 2018 में हाे पाया तैयार

जब तक निर्माण के लिए जमीन उपयुक्त ना हो तब तक स्वास्थ्य विभाग निर्माण की अनुमति नहीं देता है। इसी तरह के मामले में रतलाम मेडिकल कॉलेज को 10 साल की देरी हुई। जानकारी के अनुसार रतलाम में मेडिकल कॉलेज करीब 2001-02 में स्वीकृत हुआ था। स्थानीय प्रशासन ने जिला जेल व कॉलेज काे अन्य जगह शिफ्ट कर उनकी जगह काॅलेज बनाने का प्रस्ताव रखा। मेडिकल कॉलेज के अस्पताल को जिला अस्पताल में ही डेवलप करने का प्रस्ताव तैयार किया। इन तीन टुकड़ों के प्रस्ताव को स्वास्थ्य विभाग ने सालों तक मंजूरी नहीं दी। 10 साल बाद प्रशासन ने रतलाम के पास बंजली गांव में जमीन का चयन कर निर्माण कराया व 2018 में तैयार होकर शुरू हो पाया। इसी तरह मंदसौर में भी समस्या हो सकती है।

केंद्र सरकार ने दिए 50 करोड़ रुपए

जानकारी के अनुसार मेडिकल कॉलेज के लिए 325 करोड़ रुपए स्वीकृत हुए हैं। इसमें 60 फीसदी यानी 195 करोड़ केंद्र शासन व 40 फीसदी 130 करोड़ रुपए राज्य शासन को देना है। अधिकारियों के अनुसार केंद्र ने अपने हिस्से में से 50 करोड़ रुपए राज्य शासन को दे दिए हैं।

अलग-अलग कैंपस हाेने से दिक्कत नहीं
सीएमएचओ डॉ. के.एल. राठौर ने बताया कि तीन टुकड़ों में कैंपस होना कोई गलत नहीं है, यह तो अच्छा है। इसके लिए जमीन जितनी चाहिए उतनी होना चाहिए। हर जगह की स्थिति अलग-अलग होती है। तीन टुकड़ों में आप एक हिस्से में मेडिकल कॉलेज बना सकते हैं। दूसरे में अस्पताल एवं तीसरे में रेसीडेंस व हॉस्टल बन सकता है।

मेडिकल काॅलेज के लिए अब यह प्रक्रिया बाकी

  • डीपीआर को मंजूरी के बाद प्रशासकीय व तकनीकी स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा।
  • प्रशासकीय व तकनीकी स्वीकृति मिलने के बाद टेंडर कॉल किए जाएंगे
  • टेंडर होने के बाद एक से दो माह बाद निर्माण शुरू होगा।
  • मेडिकल कॉलेज निर्माण में कम से कम 2 से 3 साल का समय लगेगा।
  • भोपाल स्तर से ही डीपीआर तैयार की।

270 करोड़ का प्रस्ताव भेज रहा है
मेडिकल कॉलेज के लिए भोपाल स्तर से ही डीपीआर तैयार की गई है। करीब 270 करोड़ का प्रपोजल स्वीकृति के लिए शिक्षा विभाग को भेजा है। मंजूरी मिलते ही प्रपोजल को प्रशासकीय स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। उसके बाद टेंडर होगा।
बबीता सोनकर, कार्यपालन यंत्री, पीआईयू

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