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लहसुन:अफीम के बाद अब लहसुन भी बनेगा मंदसौर की पहचान इंटरनेशनल लेवल पर इसकी सरकार खुद करेगी ब्रॉडिंग

मंदसौर2 महीने पहले
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जिले में अफीम के साथ मसाला फसलों का उत्पादन बड़ी मात्रा में होता है। इसमें लहसुन प्रमुख है। जिले में हर साल लगभग 1 लाख 82 हजार मीट्रिक टन से अधिक लहसुन का उत्पादन होता है। यह प्रदेश में तीसरे नंबर पर है। शासन ने भी एक जिला एक उत्पाद में केवल मंदसाैर के लहसुन काे शामिल किया है। प्रशासन द्वारा मंदसौर लहसुन का एक ब्रांड व लोगो तैयार कर किसानों के माध्यम से ही इसे देश, विदेशों में एक्सपोर्ट किया जाएगा। इससे निश्चित ही किसानों को लाभ होगा। इससे लहसुन उत्पादक के रूप में जिले को देश-विदेश में नई पहचान मिलेगी। मंदसौर का लहसुन अन्य जगह के लहसुन से तीखा व लंबे समय तक चलता है। किसानों द्वारा पैकेजिंग पर थोड़ा-सा ध्यान दिया जाए तो इसकी मांग में और तेजी आ सकती है। इसके लिए उद्यानिकी विभाग खेती में रखने वाली सावधानी, फसल निकालने के बाद खेत में ही उसे किस तरह तैयार करना है, इन सबकी जानकारी किसानों को देगा। जल्द ही प्रशासन मंदसौर लहसुन का ब्रांड व लोगो तैयार करेगा। यह काम करीब डेढ़ माह में हाे जाएगा। इसके बाद इसे देश-विदेश में भेजा जाएगा। प्रदेश में सबसे अधिक लहसुन का उत्पादन रतलाम में 26576 हेक्टेयर में होता है। दूसरे नंबर पर नीमच है जहां 22000 हेक्टेयर में लहसुन होता है। तीसरे नंबर पर मंदसौर आता है। यहां 18211 हेक्टेयर में लहसनु का उत्पादन किया जाता है।

इसलिए खास है... मंदसौर का लहसुन

व्यापारी अनिल मित्तल ने बताया कि मंदसौर के लहसुन देश में सबसे अच्छी होती है इसलिए इसकी मांग अधिक रहती है। यह ज्यादा सफेद, कड़क एवं 15 माह तक चलता है। गुजरात का लहसुन छोटा हाेता है, उसमें डंडी लंबी रहती है। यूपी के लहसुन में काली मूंछ रहती है। राजस्थान का लहसुन 7 से 8 माह में खराब हाेने लगता है इसलिए हमारा लहसुन सबसे बेहतर है।

एक्सपर्ट व्यू

सीधे एक्सपाेर्ट की सुविधा नहीं हाेने से नुकसान
मित्तल ने बताया कि मंदसौर का लहसुन अभी मलेशिया, बांग्लादेश, पाकिस्तान, श्रीलंका में एक्सपोर्ट होता है। इसके लिए हम मंदसौर से माल काेलकाता भेजते हैं। यहां से बांगलादेश, पाकिस्तान जाता है। मुम्बई से मलेशिया जाता है। अभी सीधे मंदसौर से एक्सपोर्ट की कोई सुविधा नहीं होने से किसानों को नुकसान हो रहा है।

चायना से लड़ने के लिए होना होगा तैयार : चायना का लहसुन मंदसौर के लहसुन से ज्यादा सफेद व बड़ा होता है। मित्तल ने बताया कि चायना में किसान खेतों में ही लहसुन की ग्रेडिंग करते हैं। वहीं पर मशीनों से इसकी नमी कम कर पैकिंग करते हैं। अपने यहां किसान ऐसे ही ट्राॅलियों में भरकर मंडी में लाता है। यहां नीचे फैला देता है। इससे 10 से 20 फीसदी लहसुन यहीं खत्म हो जाता है। इसके लिए किसानों को तैयार करना होगा।

यहां के लहसुन में ऑइल व तीखापन अधिक हाेता है

कृषि वैज्ञानिक डॉ. एस.एस. कुशवाह ने बताया कि मंदसौर व आसपास का मौसम लहसुन के लिए अनुकूल है। रतलाम के जावरा व पिपलाैदा से लेकर नीमच तक लहसुन अच्छा होता है। हालांकि मंदसौर की मिट्‌टी में वाटर होल्डिंग की क्षमता अच्छी है। पोटाश की मात्रा भी उपयुक्त है। वहीं किसान सल्फर का उपयोग अच्छे से करना जानते हैं। इससे यहां के लहसुन में ऑइल व तीखापन अधिक पाया जाता है। इसके कारण मंदसौर का लहसुन देशभर में प्रसिद्ध है। इसे सही से प्रमोट किया जाए तो यह जिले की पहचान दुनिया में बना सकता है।

18 हजार हेक्टेयर से अधिक में केवल लहसुन हाेता है
^अकेले मंदसौर जिले में 18 हजार हेक्टेयर से अधिक में केवल लहसुन की फसल हाेती है। इसकी गुणवत्ता में और सुधार लाने के लिए किसानों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे किसान खेत पर ही इसकी ग्रेडिंग व पैकेजिंग कर सकेंगे। इसके लिए कई योजनाओं में किसानों की मदद भी की जाएगी। जल्द ही मंदसौर के लहसुन का एक ब्रांड तैयार होगा।
मनीष चौहान, उपसंचालक उद्यानिकी


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