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शिवना शुद्धिकरण:रविवार को भी जारी रहा अभियान, 80 से अधिक लोगों ने लिखे पत्र

मंदसौरएक महीने पहले
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शिवना शुद्धिकरण के लिए सामाजिक संगठन सदस्यों द्वारा चलाया जा रहा पोस्टकार्ड अभियान 24वें दिन गांधी चौराहा पर जारी रहा। शाम को हाेलिका दहन से पहले लोगों ने शिवना में मिल रहे गंदगी को खत्म करने एवं शिवना के लिए प्रयास नहीं कर रहे अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों को सदबुद्धि देने की बात पत्र में लिखी।

रविवार को शिवना शुद्धिकरण के लिए पोस्टकार्ड अभियान का शुभारंभ सत्यनारायण सोमानी, हरिशंकर शर्मा, राजाराम तंवर, राजेंद्र पामेचा, राजेंद्र कुमार धनोतिया ने किया। इन्होंने कहा कि आज होली है। होलिका ने जिस तरह गलत काम के लिए अपने वरदान का दुरुपयोग किया व उसमें वह स्वयं नष्ट हो गई। उसी तरह इस होली पर्व से शहर के दुष्टों का नाश शुरू होगा। भगवान इन सभी को अपने किए की सजा जरूर देंगे। जो अधिकारी व जनप्रतिनिधि शिवना शुद्धिकरण पर ध्यान नहीं दे रहे भगवान जल्द उन्हें सद्बुद्धि देंगे। जब तक शिवना शुद्धिकरण के लिए स्थायी समाधान के प्रयास शुरू नहीं होते तब तक हमारा शिवना शुद्धिकरण के लिए अभियान जारी रहेगा। शिवना के लिए लोग आगे लगे हैं। धीरे-धीरे हर वर्ग व समाज के लोग इस अभियान से जुड़ रहे हैं। शिवना संघर्ष समिति ने 51 हजार पोस्टकार्ड लिखने का लक्ष्य तय किया है।

हम पानी के स्त्रोत सहेजने में असमर्थ रहे हैं

राजेंद्र धनोतिया ने पोस्टकार्ड अभियान में मां शिवना के शुद्धिकरण के लिए कहा कि आजादी के 70 साल बाद भी हम अपने जीवन जीने के लिए पानी के स्त्रोत सहेजने में असमर्थ रहे हैं। ये हालात देखकर, देश की विकास की गति को देख ऐसा लगता है हमारा देश बहुत पिछड़ा हुआ है। इसका दोषी कौन, देश की राजनीति व्यवस्था है और प्रशासनिक व्यवस्था। आम जनता केवल वोट डालने वाली है, टैक्स जमा कराने वाली है और मौन होकर देश जो भी थोप दे उसको स्वीकार करने वाली है। भगवान पशुपतिनाथ के चरणों में बहने वाली मां शिवना आंसू बहा रही है इसके परिणाम भुगतना पड़ सकते हैं।

शिवना के हालात बद से बदतर हो गए हैं

मीडियाकर्मी प्रहलाद शर्मा ने बताया कि आज शिवना का यह पोस्टकार्ड अभियान मंदसौर के साथ पूरे जिले की आम जनता देख रही है। क्योंकि भगवान पशुपतिनाथ विश्वविख्यात हैं और इसी चमत्कारिक प्रतिमा के कारण हमारे शहर, हमारे जिले का नाम पूरे देश के साथ विश्व में पहचान बनाता है। इसी शिवना के दम पर राजनीतिक पार्टियां जीतकर आ रही हैं लेकिन शर्म आती है कि लगातार 20 वर्षों के संघर्ष के बाद उस शिवना के हालात बद से बदतर हो गए हैं। जनप्रतिनिधि जिन को चुनकर भेजा वे इस शिवना की दुर्दशा पर कुछ बोलने को तैयार नहीं।

नगर के सारे जल स्त्रोत गंदगी से भरे पड़े हैं

राजेंद्र पामेचा ने कहा कि हमारे देश के प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री जनप्रतिनिधि यदि नगर के पुराने जल स्त्रोतों की सफाई का काम भी कर दें तो शायद पूरे नगर को पानी पिला सकते हैं। यहां के सारे जल स्त्रोत गंदगी से भरे पड़े हैं। आज भी पुरानी बावड़ी, नदी, तेलिया तालाब, रामघाट मां शिवना के दम पर ही नगर जिंदा है। चंबल का पानी ला रहे, यह एक प्रकार का कहीं छलावा ना हो जाए क्योंकि कालाभाटा भी इसका एक उदाहरण है। आम जनता को लगा था कि कालाभाटा बांध होने से पूरे नगर की पानी की समस्या खत्म हो जाएगी। लेकिन दु:खी मन से लिखना पड़ रहा है कि हमारी शिवना में गंदे नाले और मिला दिए।

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